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Monsoon Update 2026: केरल में जल्द दस्तक देगा मानसून, उत्तर भारत में बारिश से राहत, IMD ने जारी किया नया पूर्वानुमान

नई दिल्ली, 3 जून 2026: देशभर की निगाहें इस समय दक्षिण-पश्चिम मानसून पर टिकी हुई हैं। किसानों से लेकर आम नागरिकों तक, हर कोई मानसून के आगमन का इंतजार कर रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 24 घंटों के भीतर केरल में प्रवेश कर सकता है। हालांकि इसकी प्रगति इस बार थोड़ी धीमी रही है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून सामान्य तिथि के आसपास ही दस्तक देगा।

केरल में कब पहुंचेगा मानसून?

IMD के नवीनतम बुलेटिन के मुताबिक, अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल और तमिलनाडु के आसपास अनुकूल मौसमीय परिस्थितियां बन चुकी हैं। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 4 जून 2026 के आसपास मानसून केरल तट पर सक्रिय हो सकता है।

केरल में मानसून की आधिकारिक घोषणा तभी की जाती है जब राज्य के निर्धारित मौसम केंद्रों में से कम से कम 60 प्रतिशत केंद्रों पर लगातार दो दिनों तक 2.5 मिमी या उससे अधिक वर्षा दर्ज हो और हवा व आर्द्रता से जुड़े अन्य मानक भी पूरे हों।

पिछले वर्ष 2025 में मानसून 24 मई को केरल पहुंच गया था, जो पिछले कई वर्षों में सबसे जल्दी आगमन में से एक था। इस बार शुरुआती अनुमान 26 मई का था, लेकिन समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण इसकी गति कुछ धीमी रही।

दक्षिण भारत में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने केरल, तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु और लक्षद्वीप के कई इलाकों में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई है।

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में 20 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की जा सकती है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, बाढ़ और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं। स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और आवश्यक तैयारियां करने की सलाह दी गई है।

पूरे देश के लिए कैसा रहेगा मानसून 2026?

मानसून के आगमन की तारीख जितनी महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण पूरे सीजन में होने वाली कुल वर्षा होती है।

IMD के संशोधित लॉन्ग रेंज फोरकास्ट के अनुसार जून से सितंबर 2026 के बीच देश में औसत मौसमी वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। विभाग ने अनुमान लगाया है कि इस वर्ष कुल वर्षा लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत तक रह सकती है, जिसे “Below Normal” श्रेणी में रखा जाता है।

क्षेत्रवार अनुमान

  • पूर्वोत्तर भारत: सामान्य वर्षा की संभावना
  • उत्तर-पश्चिम भारत: सामान्य से कम वर्षा
  • मध्य भारत: सामान्य से कम वर्षा
  • दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: सामान्य से कम वर्षा
  • मानसून कोर जोन (MCZ): कम बारिश की आशंका

El Niño क्यों बढ़ा रहा है चिंता?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में El Niño की स्थिति विकसित हो रही है। आमतौर पर El Niño भारत में मानसून की ताकत को कमजोर करता है और वर्षा में कमी का कारण बन सकता है।

अनुमान है कि जून के दौरान इसका प्रभाव सीमित रहेगा, लेकिन मानसून के अंतिम महीनों तक यह मजबूत हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो कृषि उत्पादन और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।

उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश से राहत

उत्तर भारत के कई राज्यों में इन दिनों सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ मौसम को प्रभावित कर रहे हैं। इसके चलते जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा रही है।

अगले कुछ दिनों तक इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। हालांकि इससे गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।

दिल्ली-NCR के मौसम में बदलाव

दिल्ली और एनसीआर के लोगों को फिलहाल भीषण गर्मी से राहत मिलने के संकेत हैं। मौसम विभाग ने 2 से 4 जून के बीच हल्की बारिश, बादल छाए रहने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है।

इस दौरान अधिकतम तापमान 36 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जून के दूसरे पखवाड़े में तापमान दोबारा बढ़ सकता है।

कृषि और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

भारत की बड़ी आबादी और कृषि व्यवस्था मानसून पर निर्भर है। धान, सोयाबीन, कपास, मक्का और दालों जैसी खरीफ फसलों की बुवाई सीधे मानसून की स्थिति से प्रभावित होती है।

यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो:

  • फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
  • जलाशयों में पानी का स्तर कम रह सकता है।
  • सिंचाई की लागत बढ़ सकती है।
  • बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
  • खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञ सरकार को जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन और फसल बीमा योजनाओं को मजबूत करने की सलाह दे रहे हैं।

निष्कर्ष

दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 अब केरल में दस्तक देने के बेहद करीब है। जहां दक्षिण भारत में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है, वहीं उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी मौसम सुहावना हो रहा है। हालांकि पूरे सीजन में सामान्य से कम बारिश की आशंका और El Niño का प्रभाव चिंता का विषय बना हुआ है।

ऐसे में किसानों, प्रशासन और आम नागरिकों को मौसम विभाग की ताजा अपडेट पर लगातार नजर रखने की जरूरत है ताकि किसी भी संभावित चुनौती का समय रहते सामना किया जा सके।


FAQs

1. केरल में मानसून कब पहुंच सकता है?

IMD के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून 2026 के आसपास केरल पहुंच सकता है।

2. क्या इस साल मानसून सामान्य रहेगा?

मौसम विभाग के अनुसार 2026 में कुल मौसमी वर्षा लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के लगभग 90% रहने की संभावना है, जो सामान्य से कम मानी जाती है।

3. El Niño का मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?

El Niño आमतौर पर भारत में मानसून को कमजोर करता है और वर्षा की मात्रा कम कर सकता है।

4. दिल्ली-NCR में अगले कुछ दिनों का मौसम कैसा रहेगा?

दिल्ली-NCR में हल्की बारिश, तेज हवाएं और तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी।

5. कम बारिश का कृषि पर क्या असर होगा?

कम वर्षा होने पर खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे किसानों और खाद्य आपूर्ति दोनों पर असर पड़ सकता है।

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