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लोकसभा में पास हुआ दिल्ली अध्यादेश बिल, अमित शाह ने कहा हमारे पास इसको लेकर अधिकार, केजरीवाल ने बिल के विरोध में किया ट्वीट

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गुरुवार को लोकसभा में दिल्ली में अधिकारीयों के तबादले और पोस्टिंग से जुड़े अध्यादेश की जगह लेने वाला विधेयक पारित हो गया। अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जायेगा। इस बिल का कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके सहित अन्य विपक्षी दलों ने विरोध किया। लोकसभा में बिल पर चर्चा का जवाब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिया। अमित शाह के जवाब के बाद विपक्ष ने सदन से वाकआउट किया।

गृहमंत्री अमित शाह ने विधेयक के पक्ष में जवाब देते हुए सदन में कहा कि अध्यादेश सुप्रीमकोर्ट के उस आदेश को संदर्भित करता है जिसमे सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली को लेकर सरकार को किसी भी मुद्दे पर कानून बनाने का अधिकार है। इसके अलावा संविधान में भी ये अधिकार दिया गया है। इसके बाद अमित शाह ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, राजाजी, राजेंद्र प्रसाद और डॉ भीम राव अंबेडकर भी दिल्ली को राज्य का दर्जा देने के विरोध में थे। अमित शाह ने आगे कहा कि विपक्ष को दिल्ली की नहीं सिर्फ अलाइंस की चिंता है। विधेयक का विरोध सिर्फ राजनीती के लिए किया जा रहा है।

अमित शाह का सदन में विपक्ष पर साधा निशाना

अमित शाह ने चर्चा में आप पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि 2015 में एक पार्टी सत्ता में आयी। उस पार्टी का लक्ष्य दिल्ली की सेवा करना नहीं बल्कि लड़ाई करना था। ये अधिकारीयों की ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार नहीं चाहते, बल्कि सतर्कता विभाग पर अधिकार चाहते हैं। अमित शाह ने आगे कहा कि विपक्ष की प्राथमिकता अपने गठबंधन को बचाना है। विपक्ष को मणिपुर की चिंता नहीं है। सभी विपक्षी दल एक राज्य के अधिकारों के विषय में बात कर रहे हैं। लेकिन कौन सा राज्य ? दिल्ली एक राज्य नहीं है बल्कि केंद्र शासित प्रदेश है।

कांग्रेस सांसद ने सदन में कहा

कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा में कहा कि दिल्ली में ऐसे छेड़खानी होती रहेगी तो आप और राज्यों के लिए भी ऐसे ही बिल लेट रहेंगे। आप को लगता है कि यहाँ घोटाला होता है तो उसके लिए आपको यह बिल लाना जरूरी था। आपके पास ईडी, सीबीआई और आईटी है आप उसका इस्तेमाल क्यों नहीं करते हैं ?

अरविन्द केजरीवाल ने किया ट्वीट

अरविन्द केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा “आज लोकसभा में अमित शाह जी को दिल्लीवालों के अधिकार छीनने वाले बिल पर बोलते हुए सुना। बिल का समर्थन करने के लिए उनके पास एक भी वाजिब तर्क नहीं है। बस इधर उधर की फालतू बातें कर रहे थे। वो भी जानते हैं कि वो गलत कर रहे हैं। ये बिल दिल्ली के लोगों को गुलाम बनाने वाला बिल है। उन्हें बेबस और लाचार बनाने वाला बिल है। इंडिया ऐसा कभी नहीं होने देगा।“

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