गिलगित-बाल्टिस्तान चुनावों पर भारत का कड़ा ऐतराज, पाकिस्तान के कदम को बताया अवैध
नई दिल्ली, 6 जून 2026: पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) क्षेत्र में 7 जून को प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान द्वारा वहां चुनाव करवाने का प्रयास अंतरराष्ट्रीय कानूनों और वास्तविक तथ्यों के खिलाफ है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तान के इस कदम को अवैध बताते हुए कहा कि भारतीय क्षेत्र पर जबरन कब्जा कर चुनाव आयोजित करने से जमीनी सच्चाई नहीं बदलेगी। भारत ने पाकिस्तान से अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करने की भी मांग दोहराई है।
भारत ने क्यों जताया विरोध?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आधिकारिक बयान में कहा कि पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान में तथाकथित विधानसभा चुनाव आयोजित कर अपने अवैध कब्जे को वैध साबित करने की कोशिश कर रहा है। भारत ने इस कार्रवाई को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का संपूर्ण क्षेत्र, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत का अविभाज्य हिस्सा है।
भारत का कहना है कि किसी भी प्रकार की राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधि इस ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को नहीं बदल सकती।
गिलगित-बाल्टिस्तान क्यों है विवाद का केंद्र?
गिलगित-बाल्टिस्तान ऐतिहासिक रूप से जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा रहा है। वर्ष 1947-48 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान यह क्षेत्र पाकिस्तान के नियंत्रण में चला गया था। भारत आज भी इसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का हिस्सा मानता है।
करीब 85 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी सीमाएं चीन, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ती हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिस पर भारत लगातार आपत्ति जताता रहा है।
चुनावों को लेकर क्या है पाकिस्तान की योजना?
पाकिस्तान प्रशासन 33 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव कराने जा रहा है। इनमें 24 सामान्य सीटों पर मतदान प्रस्तावित है। विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों सहित सैकड़ों प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इन चुनावों के माध्यम से गिलगित-बाल्टिस्तान में अपनी प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने और क्षेत्र को अधिक संवैधानिक मान्यता देने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
मानवाधिकार और विकास को लेकर उठते रहे हैं सवाल
भारत ने अपने बयान में केवल क्षेत्रीय दावे ही नहीं दोहराए, बल्कि गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा भी उठाया है।
रिपोर्टों के अनुसार स्थानीय लोगों द्वारा लंबे समय से विकास कार्यों की कमी, बेरोजगारी, बिजली संकट, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और राजनीतिक अधिकारों के अभाव को लेकर शिकायतें की जाती रही हैं। कई स्थानीय समूहों ने क्षेत्र में बढ़ती सैन्य मौजूदगी और राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी चिंता जताई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में संसाधनों का दोहन तो हो रहा है, लेकिन स्थानीय आबादी को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
पाकिस्तान ने भारत के आरोपों को किया खारिज
भारत के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान ने भारतीय बयान को निराधार बताया है। पाकिस्तान का दावा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और भारत को इस मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े भारत के निर्णयों पर भी सवाल उठाए और मानवाधिकारों के मुद्दे उठाते हुए भारत पर पलटवार किया।
क्षेत्रीय राजनीति पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनाव केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर भारत-पाकिस्तान संबंधों और दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के प्रशासनिक बदलाव को वह मान्यता नहीं देता। ऐसे में चुनावों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
गिलगित-बाल्टिस्तान चुनावों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर पुराना विवाद उभरकर सामने आया है। भारत का कहना है कि यह क्षेत्र उसके संप्रभु अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है और पाकिस्तान द्वारा कराए जा रहे चुनाव अवैध हैं। वहीं पाकिस्तान इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है। ऐसे में 7 जून को होने वाले चुनावों पर केवल स्थानीय जनता ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की नजरें टिकी हुई हैं।
गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के नियंत्रण वाला क्षेत्र है, जिसे भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का हिस्सा मानता है।
भारत का कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान उसका अभिन्न हिस्सा है और वहां चुनाव कराना पाकिस्तान का अवैध कदम है।
यह क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का महत्वपूर्ण हिस्सा है और चीन व मध्य एशिया के करीब स्थित है।
पाकिस्तान द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा चुनाव 7 जून 2026 को आयोजित किए जाने प्रस्तावित हैं।
पाकिस्तान का कहना है कि चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और भारत के आरोप निराधार हैं।

