हीटवेव अलर्ट 2026: दिल्ली, यूपी, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 11 जून तक भीषण गर्मी का अलर्ट, तापमान 46°C तक पहुंचने की संभावना
नई दिल्ली, 9 जून 2026। उत्तर भारत के कई राज्यों में एक बार फिर भीषण गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजस्थान सहित कई राज्यों में 11 जून तक हीटवेव और गंभीर हीटवेव की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 42 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि कुछ इलाकों में इससे भी अधिक गर्मी दर्ज होने की आशंका है।
उत्तर भारत में बढ़ा हीटवेव का खतरा
IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक पश्चिमी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक गर्म हवाएं चलने की संभावना है। कई शहरों में तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिससे लोगों को दिन और रात दोनों समय राहत नहीं मिल रही है।
मौसम विभाग ने बताया कि पश्चिम राजस्थान के श्रीगंगानगर में हाल ही में 44.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो इस सीजन के सबसे अधिक तापमानों में शामिल है।
क्या होती है हीटवेव?
जब किसी क्षेत्र का अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाए और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाए, तब उसे हीटवेव माना जाता है। वहीं तापमान अत्यधिक बढ़ने पर इसे गंभीर हीटवेव की श्रेणी में रखा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार उत्तर भारत में गर्मी बढ़ने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें तेज लू, उच्च दबाव प्रणाली, कम बादल और मॉनसून की धीमी प्रगति प्रमुख हैं।
राज्यवार हीटवेव की स्थिति
दिल्ली-NCR
राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। रात का तापमान भी सामान्य से अधिक बना हुआ है।
राजस्थान
राजस्थान का पश्चिमी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है। बीकानेर, जैसलमेर और श्रीगंगानगर जैसे शहरों में लू का असर लगातार बढ़ रहा है और तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
पंजाब और हरियाणा
दोनों राज्यों में 8 से 11 जून तक हीटवेव की स्थिति बनी रहने की संभावना है। खेतों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
उत्तर प्रदेश
पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश दोनों क्षेत्रों में गर्मी का प्रभाव देखने को मिल रहा है। लखनऊ, आगरा, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में तापमान लगातार बढ़ रहा है।
मध्य प्रदेश और विदर्भ
मध्य प्रदेश के कुछ जिलों और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भी गर्म हवाओं का असर बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर असर
भीषण गर्मी के कारण अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विशेष रूप से बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग अधिक जोखिम में हैं।
हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण
- तेज चक्कर आना
- अत्यधिक कमजोरी
- उल्टी या मतली
- बेहोशी
- शरीर का अत्यधिक गर्म होना
- मांसपेशियों में ऐंठन
हीटवेव से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
- दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी, ORS, नींबू पानी और छाछ का सेवन करें।
- हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।
- सिर को टोपी या कपड़े से ढककर रखें।
- बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
- पालतू जानवरों के लिए पानी और छाया की व्यवस्था करें।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर भी असर
हीटवेव का असर केवल लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि और अर्थव्यवस्था पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। अधिक तापमान के कारण फसलों में नमी कम हो रही है, जिससे गेहूं, सब्जियां और फल प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती गर्मी से श्रमिकों की कार्यक्षमता कम होती है और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ता है। वहीं बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने लगी है, जिससे कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
मॉनसून से कब मिलेगी राहत?
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आगे बढ़ रहा है, लेकिन उत्तर भारत तक पहुंचने में अभी कुछ समय लग सकता है। यदि मॉनसून समय पर सक्रिय होता है तो लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत में गर्मी और लू का असर जारी रहेगा।
निष्कर्ष
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान समेत कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए और गर्मी से बचाव के सभी जरूरी उपाय अपनाने चाहिए। बढ़ती हीटवेव की घटनाएं जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती की ओर भी संकेत करती हैं, जिसके लिए दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।

