🇮🇳 रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण: DRDO की बड़ी कामयाबी, भारत की रक्षा ताकत को मिला नया आयाम
नई दिल्ली। भारत की रक्षा तकनीक ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) ने मिलकर स्वदेशी रुद्रम-II एयर-टू-सर्फेस मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है।
यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से 2 जून 2026 को किया गया। इस सफलता को भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह परीक्षण भारत को एडवांस्ड वेपन सिस्टम के क्षेत्र में नए मुकाम पर ले जाता है।
क्या है रुद्रम-II मिसाइल?
रुद्रम-II एक एडवांस्ड एंटी-रेडिएशन एयर-लॉन्च मिसाइल है, जिसे दुश्मन के रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और एयर डिफेंस नेटवर्क को खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है।
यह मिसाइल दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को कमजोर करने (SEAD – Suppression of Enemy Air Defences) में अहम भूमिका निभाती है।
रुद्रम-II की प्रमुख विशेषताएं
- 🔹 रेंज: लगभग 300–350 किमी
- 🔹 स्पीड: Mach 5.5 तक (हाइपरसोनिक क्षमता के करीब)
- 🔹 वारहेड: 200 किलोग्राम हाई-इम्पैक्ट एक्सप्लोसिव
- 🔹 लॉन्च प्लेटफॉर्म: Su-30 MKI फाइटर जेट
- 🔹 नेविगेशन: INS + GPS/NavIC + IIR सीकर
- 🔹 लक्ष्य: रडार, कम्युनिकेशन और RF एमिशन सिस्टम
यह मिसाइल भारत की पुरानी रूसी Kh-31 मिसाइल का स्वदेशी विकल्प मानी जा रही है।
परीक्षण क्यों है खास?
इस परीक्षण को “एक्सट्रीम कंडीशंस” में किया गया, जिसमें मिसाइल ने पूरी सटीकता के साथ अपने लक्ष्य को भेदा।
फ्लाइट डेटा के अनुसार:
- सभी सिस्टम पूरी तरह सफल रहे
- हाइब्रिड गाइडेंस सिस्टम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया
- पिन-पॉइंट एक्यूरेसी साबित हुई
इससे यह साफ होता है कि रुद्रम-II अब ऑपरेशनल तैनाती के बेहद करीब है।
भारत की रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा
रुद्रम-II के शामिल होने से भारतीय वायु सेना की क्षमता में बड़ा बदलाव आएगा। यह मिसाइल दुश्मन के एयर डिफेंस को पहले ही निष्क्रिय कर हवाई हमलों को सुरक्षित बनाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत की स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक और SEAD क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।
अधिक जानकारी के लिए स्रोत देखें:
Airforce Technology Report
The Indian Express Defence Coverage
The Week Defence News
DRDO की भूमिका
इस परियोजना में कई लैब्स ने मिलकर काम किया, जैसे:
- RCI हैदराबाद (मुख्य विकास केंद्र)
- DRDL
- HEMRL
- ARDE
- ITR चांदीपुर
यह “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान का मजबूत उदाहरण है।
निष्कर्ष
रुद्रम-II का सफल परीक्षण भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। यह न सिर्फ भारतीय वायु सेना को तकनीकी बढ़त देता है, बल्कि देश को वैश्विक रक्षा शक्ति के रूप में भी मजबूत करता है।
आने वाले समय में ऐसी तकनीकें भारत को आधुनिक युद्ध रणनीतियों में और अधिक सक्षम बनाएंगी।
यह एक एयर-लॉन्च एंटी-रेडिएशन मिसाइल है, जो दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करती है।
इसे मुख्य रूप से Su-30 MKI फाइटर जेट से लॉन्च किया जाता है।
रुद्रम-II की अनुमानित रेंज 300 से 350 किलोमीटर है।
यह भारत की SEAD क्षमता बढ़ाती है और दुश्मन के एयर डिफेंस को कमजोर करने में मदद करती है।
नवीनतम परीक्षण के बाद यह ऑपरेशनल तैनाती के बहुत करीब मानी जा रही है।

