भारत की चिप क्रांति को मिली रफ्तार: गुजरात के धोलेरा में टाटा का मेगा सेमीकंडक्टर प्लांट अंतिम चरण में
अहमदाबाद/नई दिल्ली: भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में नई पहचान दिलाने वाला गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR) में बन रहा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का मेगा सेमीकंडक्टर प्लांट अब अपने अंतिम निर्माण चरण में पहुंच गया है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत यह परियोजना देश के तकनीकी और औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
करीब 91,000 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हो रहा यह प्लांट भारत का पहला बड़ा सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट (Fab) होगा, जो देश की आयात निर्भरता कम करने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को नई मजबूती देगा।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट
केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य देश में चिप निर्माण उद्योग को विकसित करना है। इसी मिशन के तहत धोलेरा में यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है।
सरकार द्वारा इस परियोजना के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) को मंजूरी दी गई है। अनुमान है कि इससे लगभग 21,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे गुजरात सहित पूरे देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।
टाटा और PSMC की साझेदारी से बनेगी हाई-टेक फैब
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स इस परियोजना को ताइवान की प्रसिद्ध कंपनी पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन (PSMC) के साथ मिलकर विकसित कर रही है।
यह अत्याधुनिक फैब 300 मिमी वेफर तकनीक पर आधारित होगी और हर महीने लगभग 50,000 वेफर स्टार्ट्स की उत्पादन क्षमता रखेगी। यहां 28nm से 110nm तकनीक आधारित चिप्स का निर्माण किया जाएगा, जिनका उपयोग कई महत्वपूर्ण उद्योगों में होगा।
किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?
धोलेरा में बनने वाली चिप्स का उपयोग निम्न क्षेत्रों में किया जाएगा:
- ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- 5G और वायरलेस कम्युनिकेशन
- डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग
- IoT डिवाइस
- डिस्प्ले और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बना सकती है।
ASML की तकनीक से मिलेगा बड़ा समर्थन
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने हाल ही में नीदरलैंड की अग्रणी लिथोग्राफी कंपनी ASML के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। ASML से मिलने वाली उन्नत तकनीक और उपकरणों की मदद से प्लांट का उत्पादन और तकनीकी क्षमता विश्वस्तरीय स्तर तक पहुंच सकेगी।
साथ ही यह सहयोग भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के प्रशिक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
2026 के अंत तक शुरू हो सकता है ट्रायल प्रोडक्शन
सूत्रों के अनुसार प्लांट में क्लीनरूम, मशीन इंस्टॉलेशन और सिस्टम इंटीग्रेशन का कार्य तेजी से चल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि:
- 2026 के अंत तक ट्रायल प्रोडक्शन शुरू हो सकता है।
- शुरुआती चिप्स का उत्पादन दिसंबर 2026 तक संभव है।
- पूर्ण व्यावसायिक संचालन 2029-30 तक शुरू होने का लक्ष्य है।
गुजरात बन रहा भारत का सेमीकंडक्टर हब
धोलेरा के अलावा गुजरात के सनंद और अन्य क्षेत्रों में भी कई सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। माइक्रॉन, CG पावर और अन्य कंपनियों के निवेश से राज्य तेजी से भारत के प्रमुख सेमीकंडक्टर केंद्र के रूप में उभर रहा है।
बेहतर सड़क, बंदरगाह, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं धोलेरा को उद्योगों के लिए आदर्श स्थान बनाती हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक सुरक्षा को मिलेगा लाभ
भारत वर्तमान में अपनी अधिकांश चिप आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है। घरेलू स्तर पर चिप निर्माण शुरू होने से:
- आयात खर्च में कमी आएगी।
- इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूती मिलेगी।
- रक्षा क्षेत्र को रणनीतिक लाभ मिलेगा।
- लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- वैश्विक निवेश आकर्षित होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2030 तक भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 100 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है।
निष्कर्ष
गुजरात के धोलेरा में बन रहा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का सेमीकंडक्टर प्लांट भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह परियोजना न केवल देश को वैश्विक चिप निर्माण मानचित्र पर स्थापित करेगी, बल्कि रोजगार, निवेश और तकनीकी नवाचार को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। आने वाले वर्षों में यह प्रोजेक्ट भारत की डिजिटल और औद्योगिक क्रांति का प्रमुख आधार बन सकता है।
यह प्लांट गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR) में बनाया जा रहा है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और उसके साझेदारों द्वारा लगभग 91,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।
यहां 28nm से 110nm तकनीक आधारित एनालॉग, लॉजिक IC और अन्य सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण होगा।
इस परियोजना से लगभग 21,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना है।
यह परियोजना आयात निर्भरता कम करेगी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाएगी तथा भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में नई पहचान दिलाएगी।

