देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन तैयार: मुंबई-बेंगलुरु रूट पर 16 कोच, 823 यात्रियों के साथ जल्द होगी शुरुआत
नई दिल्ली।
भारतीय रेलवे लगातार अपने नेटवर्क को आधुनिक और हाईटेक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसी क्रम में देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन तैयार हो चुकी है और फिलहाल बेंगलुरु में अंतिम परीक्षण (Final Testing) से गुजर रही है। यह ट्रेन मुंबई (CSMT) और बेंगलुरु (KSR) के बीच चलाई जाएगी, जिससे दोनों महानगरों के बीच यात्रा पहले से कहीं अधिक तेज, आरामदायक और सुरक्षित हो जाएगी।
भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) ने चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) की तकनीक के साथ इस ट्रेन का निर्माण किया है। ऑरेंज और ग्रे रंग की यह आधुनिक ट्रेन भारतीय रेलवे की नई पहचान बन सकती है।
बेंगलुरु में चल रही है अंतिम टेस्टिंग
दक्षिण पश्चिम रेलवे के अधिकारियों के अनुसार ट्रेन इस समय SMVT बेंगलुरु स्टेशन पर परीक्षण के लिए रखी गई है। सभी स्पीड ट्रायल, सुरक्षा परीक्षण और रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद इसे यात्रियों के लिए शुरू किया जाएगा।
रेल मंत्रालय पहले ही इस रूट पर वंदे भारत स्लीपर सेवा शुरू करने के संकेत दे चुका है।
पहली वंदे भारत स्लीपर की सफलता के बाद दूसरा बड़ा कदम
जनवरी 2026 में भारतीय रेलवे ने पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हावड़ा-कामाख्या रूट पर शुरू किया था। इस ट्रेन ने यात्रा समय में लगभग 6 घंटे की बचत की और यात्रियों से शानदार प्रतिक्रिया मिली।
इसी सफलता को देखते हुए अब दूसरी ट्रेन मुंबई-बेंगलुरु कॉरिडोर के लिए तैयार की गई है। रेलवे का लक्ष्य मार्च 2027 तक देशभर में 12 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू करना है।
16 कोच और 823 यात्रियों की क्षमता
नई ट्रेन में कुल 16 कोच लगाए गए हैं, जिनकी क्षमता 823 आरक्षित यात्रियों की होगी।
कोच कंपोजिशन
- 11 एसी थ्री टियर कोच – 611 यात्री
- 4 एसी टू टियर कोच – 188 यात्री
- 1 फर्स्ट एसी कोच – 24 यात्री
कुछ सीटें दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित रहेंगी, जबकि रेलवे स्टाफ के लिए अलग व्यवस्था होगी।
फर्स्ट एसी कोच होगा होटल जैसा शानदार
इस ट्रेन का फर्स्ट एसी कोच पूरी तरह प्रीमियम अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है।
प्रमुख सुविधाएं
- चौड़ी और आरामदायक बर्थ
- बेहतर कुशनिंग
- USB एवं Type-C चार्जिंग
- स्मार्ट एलईडी लाइटिंग
- फ्रॉस्टेड ग्लास डोर
- बेहतर वेंटिलेशन
- शांत और प्रीमियम इंटीरियर
इसी वजह से इसे “होटल ऑन व्हील्स” जैसा अनुभव देने वाली ट्रेन माना जा रहा है।
मुंबई-बेंगलुरु रूट पर कम होगा यात्रा समय
नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन KSR बेंगलुरु से CSMT मुंबई के बीच संचालित होगी।
संभावित स्टेशन
- बेंगलुरु
- हुबली-धारवाड़
- बेलगावी
- सोलापुर
- पुणे
- मुंबई
वर्तमान में इस रूट पर यात्रा में लगभग 24 घंटे लगते हैं। नई ट्रेन शुरू होने के बाद यह समय घटकर लगभग 16 से 18 घंटे रह सकता है।
180 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड
इस ट्रेन की अधिकतम डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा रखी गई है।
हालांकि वास्तविक परिचालन गति रेलवे ट्रैक, सिग्नलिंग और सुरक्षा मानकों पर निर्भर करेगी।
यात्रियों को मिलेंगी ये हाईटेक सुविधाएं
नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है।
प्रमुख फीचर्स
- आरामदायक एर्गोनॉमिक बर्थ
- आधुनिक एसी सिस्टम
- Wi-Fi सुविधा
- USB और Type-C चार्जिंग
- ऑटोमैटिक दरवाजे
- बायो-वैक्यूम टॉयलेट
- सेंसर आधारित वॉटर टैप
- रोलर ब्लाइंड
- इंफोटेनमेंट सिस्टम
- बड़ी विंडो
- LED रीडिंग लाइट
- CCTV कैमरे
- स्मोक अलार्म
- इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम
- कवच (Kavach) सुरक्षा प्रणाली
- बेहतर सस्पेंशन
उद्योग, पर्यटन और व्यापार को मिलेगा फायदा
मुंबई और बेंगलुरु देश के दो सबसे बड़े आर्थिक केंद्र हैं।
इन दोनों शहरों के बीच हर दिन हजारों आईटी प्रोफेशनल्स, उद्योगपति, छात्र और पर्यटक यात्रा करते हैं।
नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होने से—
- व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
- पर्यटन में वृद्धि होगी।
- समय की बचत होगी।
- लंबी दूरी का सफर अधिक आरामदायक बनेगा।
- अन्य ट्रेनों पर दबाव कम होगा।
अभी टेस्टिंग जारी, जल्द होगी लॉन्चिंग
फिलहाल ट्रेन अंतिम परीक्षण चरण में है। स्पीड ट्रायल, ट्रैक क्लीयरेंस और रेलवे सेफ्टी कमिश्नर की मंजूरी मिलने के बाद इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग की जाएगी।
रेलवे जल्द ही अंतिम टाइम टेबल, किराया और बुकिंग की जानकारी जारी करेगा।
निष्कर्ष
देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है। 16 कोच, 823 यात्रियों की क्षमता, 180 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस यह ट्रेन मुंबई और बेंगलुरु के बीच रेल यात्रा को नया आयाम देगी। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं, तो आने वाले समय में यह ट्रेन लंबी दूरी की रेल यात्रा का नया मानक बन सकती है।

