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दिल्ली-एनसीआर में ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 4 संदिग्ध गिरफ्तार, बड़ा हमला टला

न्यूज़ क्रिटिक (News Critic) का न्यूज़ ग्राफिक जिसमें 'दिल्ली-एनसीआर में ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़' और '4 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार' लिखा हुआ है। ग्राफिक में स्पेशल सेल के अधिकारियों की हिरासत में बैठे चार नकाबपोश संदिग्ध आतंकी दिखाई दे रहे हैं। मुख्य टेक्स्ट के नीचे हथियार बरामदगी और देश की सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे को टालने का जिक्र किया गया है।
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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने राष्ट्रीय राजधानी में एक बड़े आतंकी खतरे को समय रहते नाकाम करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक कथित अंतरराज्यीय आतंकी और हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई में चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर दिल्ली-एनसीआर में आतंकी हमले की साजिश रचने और संवेदनशील स्थानों की रेकी करने का आरोप है।

पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में आरोपियों के तार पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलर शाहजाद भट्टी से जुड़े मिले हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?

स्पेशल सेल के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद हुआ है—

  • 2 विदेशी पिस्तौल (जिनमें एक तुर्की निर्मित जिगाना पिस्टल शामिल)
  • 9 जिंदा कारतूस
  • 5 मोबाइल फोन
  • डिजिटल साक्ष्य

पुलिस का दावा है कि आरोपी ड्रोन के जरिए सीमा पार से भेजे गए हथियार और नशीले पदार्थों की खेप प्राप्त करते थे। इसके अलावा दिल्ली के संवेदनशील इलाकों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर विदेश में बैठे कथित हैंडलर्स तक पहुंचाने का भी आरोप है।

गिरफ्तार चारों आरोपियों की पहचान

दिल्ली पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं—

शुभदीप सिंह उर्फ विशाल (23 वर्ष)

  • निवासी: तरन तारन, पंजाब
  • कथित तौर पर नेटवर्क का प्रमुख संपर्क
  • सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और कारतूस बरामद
  • पहले भी NDPS मामले में आरोपी रह चुका है।

गुरजंत सिंह उर्फ ऋषि (22 वर्ष)

  • निवासी: तरन तारन
  • ड्रोन के जरिए भेजी गई खेप प्राप्त करने में कथित भूमिका।

साजन सिंह उर्फ हनी (28 वर्ष)

  • निवासी: अमृतसर
  • हथियार सप्लाई नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़ा।
  • पूर्व में NDPS मामले में नाम सामने आ चुका है।

गगनप्रीत (24 वर्ष)

  • निवासी: फतेहगढ़ साहिब
  • दिल्ली से गिरफ्तार।
  • पुलिस के अनुसार इसे संवेदनशील स्थानों की रेकी और वीडियो भेजने का काम सौंपा गया था।

ISI नेटवर्क की कथित कार्यप्रणाली

जांच एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर्स सोशल मीडिया और विदेशी मोबाइल नंबरों के माध्यम से भारतीय युवाओं से संपर्क करते थे।

पुलिस का दावा है कि यह नेटवर्क—

  • ड्रोन के जरिए हथियार मंगवाता था।
  • नशीले पदार्थों की तस्करी से धन जुटाता था।
  • संवेदनशील सरकारी और धार्मिक स्थानों की रेकी कराता था।
  • स्थानीय युवाओं को कथित तौर पर अपने नेटवर्क में शामिल करता था।

हालांकि इन सभी आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही होगी।

कैसे हुई पूरी कार्रवाई?

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को तकनीकी और खुफिया इनपुट प्राप्त हुए थे। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

सबसे पहले पंजाब के अमृतसर से शुभदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर गुरजंत सिंह, साजन सिंह और गगनप्रीत को भी गिरफ्तार किया गया।

बरामद हथियारों और डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

पुलिस क्या जांच कर रही है?

जांच एजेंसियां फिलहाल कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं—

  • मोबाइल फोन का डेटा
  • चैट हिस्ट्री
  • कॉल रिकॉर्ड
  • विदेशी संपर्क
  • फंडिंग नेटवर्क
  • ड्रोन सप्लाई चैन
  • अन्य सहयोगियों की पहचान

पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए क्यों अहम है यह मामला?

विशेषज्ञों के अनुसार सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से हथियारों की तस्करी और सोशल मीडिया के जरिए स्थानीय युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाएगा।

नागरिकों से क्या अपील की गई?

दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, ड्रोन संचालन या संदिग्ध व्यक्तियों की जानकारी मिले तो तुरंत स्थानीय पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को सूचित करें।

निष्कर्ष

दिल्ली पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई को राजधानी की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपियों पर लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं। आने वाले दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल जांच के आधार पर इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

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