ब्रिटेन में रोचडेल ग्रूमिंग गैंग का दोषी शबीर अहमद रिहा, पाकिस्तान डिपोर्टेशन पर कानूनी अड़चन
लंदन:
ब्रिटेन के चर्चित रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले का मुख्य दोषी शबीर अहमद एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्ष 2012 में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण, मानव तस्करी और गैंगरेप जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए शबीर अहमद जेल से रिहा हो गए हैं। हालांकि ब्रिटिश सरकार उनकी नागरिकता पहले ही समाप्त कर चुकी है, लेकिन पुराने इमिग्रेशन कानून के कारण फिलहाल उन्हें पाकिस्तान डिपोर्ट नहीं किया जा सकता।
इस घटनाक्रम ने ब्रिटेन में इमिग्रेशन कानून, न्याय व्यवस्था और पीड़ितों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
कौन है शबीर अहमद?
73 वर्षीय शबीर अहमद रोचडेल ग्रूमिंग गैंग का कथित सरगना माना जाता है। वर्ष 2012 में अदालत ने उन्हें और अन्य आरोपियों को कई नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण, रेप, ट्रैफिकिंग और संगठित अपराधों का दोषी ठहराया था।
सजा के बाद उनकी ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी गई थी और सरकार उन्हें पाकिस्तान भेजने की तैयारी कर रही थी।
रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामला क्या है?
कैसे बनाया जाता था लड़कियों को निशाना?
रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामला ब्रिटेन के सबसे चर्चित बाल यौन शोषण मामलों में शामिल है। जांच के अनुसार गैंग के सदस्य कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों की किशोर लड़कियों को अपने जाल में फंसाते थे।
उन्हें शराब, ड्रग्स और अन्य लालच देकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाया जाता था, जहां उनके साथ यौन शोषण और गैंगरेप जैसी घटनाएं होती थीं।
पुलिस का मानना है कि आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक पीड़ित इस गैंग का शिकार हुई हो सकती हैं।
पाकिस्तान डिपोर्ट क्यों नहीं हो सकता?
Immigration Act 1971 बना सबसे बड़ी बाधा
ब्रिटेन सरकार शबीर अहमद को पाकिस्तान भेजना चाहती है, लेकिन Immigration Act 1971 की एक धारा इसमें कानूनी अड़चन बन रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार जो व्यक्ति 1973 से पहले ब्रिटेन आया हो और वहां लंबे समय तक वैध रूप से रह चुका हो, उसे कुछ परिस्थितियों में डिपोर्ट नहीं किया जा सकता।
शबीर अहमद 1970 के दशक में ब्रिटेन पहुंचे थे। इसी वजह से सरकार फिलहाल उन्हें निर्वासित नहीं कर पा रही है।
इसके अलावा पाकिस्तान की ओर से भी उन्हें स्वीकार करने को लेकर कानूनी जटिलताएं बनी हुई हैं।
रिहाई के बाद शबीर अहमद पर कौन-कौन सी पाबंदियां हैं?
जेल से रिहा होने के बावजूद शबीर अहमद पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं। उन पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
- आजीवन सेक्स ऑफेंडर रजिस्टर में नाम रहेगा।
- इलेक्ट्रॉनिक टैगिंग के जरिए निगरानी होगी।
- बच्चों के संपर्क में आने पर प्रतिबंध रहेगा।
- तय क्षेत्र के बाहर जाने पर रोक होगी।
- नियम तोड़ने पर दोबारा जेल भेजा जा सकता है।
पीड़ित परिवारों में नाराजगी क्यों?
पीड़ितों और उनके परिवारों का कहना है कि इतने गंभीर अपराधों में दोषी व्यक्ति की रिहाई न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
कई पीड़ित आज भी मानसिक आघात से जूझ रहे हैं और उन्हें डर है कि आरोपी की मौजूदगी उनकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
ब्रिटेन की राजनीति में क्यों गरमाया मामला?
इस मामले के बाद कई नेताओं ने पुराने इमिग्रेशन कानून में बदलाव की मांग की है।
उनका कहना है कि जघन्य अपराधों में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कानून और सख्त होना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में डिपोर्टेशन आसान हो सके।
केवल रोचडेल ही नहीं, कई शहरों में सामने आए ऐसे मामले
ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड, रोदरहम, न्यूकैसल और टेलफोर्ड जैसे शहरों में भी अतीत में इसी तरह के संगठित बाल यौन शोषण के मामले सामने आ चुके हैं।
इन मामलों के बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे थे।
आगे क्या होगा?
ब्रिटिश सरकार इस मामले में कानूनी विकल्पों की समीक्षा कर रही है। साथ ही पाकिस्तान के साथ बातचीत की संभावनाएं भी तलाश रही है।
यदि भविष्य में कानून में बदलाव होता है तो ऐसे मामलों में डिपोर्टेशन प्रक्रिया आसान हो सकती है।
निष्कर्ष
रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामला ब्रिटेन की न्याय व्यवस्था, इमिग्रेशन कानून और पीड़ितों की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला बन चुका है। शबीर अहमद की रिहाई ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या दशकों पुराने कानून आज के गंभीर अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं।

