Headlines

IIT बॉम्बे ने लॉन्च किया न्यूक्लियर इंजीनियरिंग प्रोग्राम, 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगा नया बल

आईआईटी बॉम्बे के परिसर की तस्वीर, संस्थान द्वारा नए परमाणु इंजीनियरिंग प्रोग्राम (Nuclear Engineering Programme) के लॉन्च और 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा लक्ष्य की घोषणा - News Critic.
Spread the love

भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) ने नया न्यूक्लियर इंजीनियरिंग प्रोग्राम शुरू किया है। यह कार्यक्रम देश के महत्वाकांक्षी 2047 तक 100 गीगावॉट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विशेषज्ञ इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को तैयार करेगा।

यह नया कोर्स Green Energy and Sustainability Hub (GESH) के तहत संचालित होगा और इसका उद्देश्य न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, रिसर्च, इनोवेशन तथा इंडस्ट्री सहयोग को मजबूत करना है। इस पहल को भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

भारत के 100 GW न्यूक्लियर पावर लक्ष्य को मिलेगा समर्थन

भारत सरकार ने विकसित भारत @2047 के विजन के तहत वर्ष 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा लगभग 8.8 GW से बढ़ाकर 100 GW तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार बड़े परमाणु संयंत्रों के साथ-साथ Small Modular Reactors (SMRs), नई ईंधन तकनीक और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा दे रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए लाखों करोड़ रुपये के निवेश, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होगी।

IIT बॉम्बे का नया न्यूक्लियर इंजीनियरिंग प्रोग्राम क्या है?

आईआईटी बॉम्बे का यह विशेष कार्यक्रम छात्रों और शोधकर्ताओं को आधुनिक परमाणु तकनीक की शिक्षा देगा।

इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य हैं—

  • न्यूक्लियर इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा
  • रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा
  • इंडस्ट्री-एकेडमिक सहयोग
  • कुशल वैज्ञानिक और इंजीनियर तैयार करना
  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना

किन विषयों पर होगा फोकस?

इस कार्यक्रम में छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों की पढ़ाई कराई जाएगी, जिनमें शामिल हैं—

न्यूक्लियर रिएक्टर डिजाइन

नई पीढ़ी के सुरक्षित और अधिक दक्ष परमाणु रिएक्टरों का डिजाइन एवं सिमुलेशन।

थोरियम फ्यूल टेक्नोलॉजी

भारत के विशाल थोरियम भंडार को देखते हुए थोरियम आधारित ईंधन चक्र पर विशेष रिसर्च।

रेडिएशन सेफ्टी

परमाणु संयंत्रों में सुरक्षा मानकों, विकिरण नियंत्रण और वेस्ट मैनेजमेंट की पढ़ाई।

Small Modular Reactors (SMRs)

भविष्य की कम लागत वाली और सुरक्षित न्यूक्लियर तकनीक पर विशेष प्रशिक्षण।

न्यूक्लियर पॉलिसी और इकोनॉमिक्स

परमाणु ऊर्जा से जुड़ी नीतियों, निवेश और आर्थिक मॉडल का अध्ययन।

किन कोर्सों में मिलेगा प्रवेश?

आईआईटी बॉम्बे इस कार्यक्रम के तहत कई शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध कराएगा।

  • M.Tech
  • Ph.D
  • Short-Term Certificate Courses
  • Research Programmes
  • Industry Training Modules

भारत के लिए थोरियम क्यों है महत्वपूर्ण?

भारत दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार वाले देशों में शामिल है।

यदि थोरियम आधारित रिएक्टर सफलतापूर्वक विकसित होते हैं, तो—

  • यूरेनियम पर निर्भरता कम होगी।
  • ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी।
  • बिजली उत्पादन की लागत घट सकती है।
  • लंबे समय तक ईंधन उपलब्ध रहेगा।
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

इसी वजह से IIT बॉम्बे का यह कार्यक्रम भारत की भविष्य की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

SHANTI Act, 2025 से क्या बदलेगा?

सरकार द्वारा लागू SHANTI Act, 2025 का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और MSMEs की भागीदारी बढ़ाना है।

इससे—

  • नई तकनीकों का विकास तेज होगा।
  • रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
  • रिसर्च एवं डेवलपमेंट को गति मिलेगी।
  • घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी।

इस प्रोग्राम से छात्रों को क्या फायदा होगा?

नई पीढ़ी के इंजीनियरों के लिए यह कार्यक्रम कई नए अवसर लेकर आएगा।

बेहतर करियर विकल्प

  • न्यूक्लियर पावर प्लांट
  • रिसर्च संस्थान
  • सरकारी एजेंसियां
  • अंतरराष्ट्रीय न्यूक्लियर संगठन
  • निजी ऊर्जा कंपनियां

रिसर्च के अवसर

छात्र अत्याधुनिक परमाणु तकनीक पर शोध कर सकेंगे और वैश्विक परियोजनाओं में भी भाग ले सकेंगे।

100 GW लक्ष्य हासिल करने में क्या चुनौतियां हैं?

हालांकि लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं।

  • भारी निवेश की आवश्यकता
  • भूमि अधिग्रहण
  • पर्यावरणीय मंजूरी
  • परमाणु सुरक्षा संबंधी चिंताएं
  • कुशल इंजीनियरों की कमी
  • आधुनिक सप्लाई चेन का विकास

इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए IIT बॉम्बे का यह कार्यक्रम मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।

IIT बॉम्बे की यह पहल क्यों है महत्वपूर्ण?

भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है। सौर और पवन ऊर्जा के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा भी भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का मजबूत विकल्प मानी जा रही है।

IIT बॉम्बे का नया कार्यक्रम—

  • न्यूक्लियर सेक्टर के लिए विशेषज्ञ तैयार करेगा।
  • थोरियम आधारित तकनीक को बढ़ावा देगा।
  • रिसर्च एवं इनोवेशन को नई दिशा देगा।
  • भारत के 2047 ऊर्जा लक्ष्य को गति देगा।
  • देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

निष्कर्ष

आईआईटी बॉम्बे द्वारा शुरू किया गया न्यूक्लियर इंजीनियरिंग प्रोग्राम केवल एक नया शैक्षणिक कोर्स नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि इस पहल के साथ रिसर्च, निवेश और उद्योग सहयोग लगातार बढ़ता है, तो 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।

यह कार्यक्रम देश के युवाओं के लिए नए करियर अवसर पैदा करेगा और भारत को स्वच्छ, सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर ऊर्जा प्रणाली की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *