बेंगलुरु कैपजेमिनी डे-केयर हॉरर: मासूम बच्चों से क्रूरता का आरोप, 5 केयरगिवर्स पर FIR; कंपनी ने सेंटर बंद किया
क्या है बेंगलुरु कैपजेमिनी डे-केयर मामला?
बेंगलुरु स्थित कैपजेमिनी के कैंपस में संचालित डे-केयर सेंटर में छोटे बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में कुछ केयरगिवर्स पर बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार करने के आरोप लगे हैं।
आरोप है कि दो से तीन साल की उम्र के बच्चों को डराया गया, परेशान किया गया और उनके साथ ऐसी हरकतें की गईं, जिनसे अभिभावकों और आम लोगों में भारी नाराजगी है।
यह मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है और डे-केयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
वायरल वीडियो से सामने आया मामला
यह पूरा मामला जून के अंत में सामने आया, जब डे-केयर सेंटर से जुड़े एक कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर कुछ वीडियो रिकॉर्ड किए गए।
वीडियो में बच्चों के साथ कथित रूप से गलत व्यवहार दिखाई देने के बाद इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। इसके बाद अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने जांच शुरू की।
वीडियो में बच्चों को डराने, बाथरूम में बंद करने और उनके साथ अनुचित तरीके से पेश आने के आरोप लगाए गए हैं।
पांच केयरगिवर्स के खिलाफ FIR दर्ज
पुलिस ने इस मामले में पांच महिला केयरगिवर्स के खिलाफ केस दर्ज किया है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
वीडियो शेयर करने वाली महिला पर भी कार्रवाई
मामले में वीडियो रिकॉर्ड करने वाली महिला कर्मचारी की भूमिका भी जांच में शामिल है।
पुलिस का कहना है कि संवेदनशील वीडियो को सार्वजनिक करने और बच्चों की पहचान से जुड़ी जानकारी साझा करने के मामले में भी कार्रवाई की गई है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर कई लोग उन्हें मामले का खुलासा करने वाली व्हिसलब्लोअर बता रहे हैं।
कैपजेमिनी ने बंद किया डे-केयर सेंटर
मामला सामने आने के बाद कैपजेमिनी ने अपने बेंगलुरु कैंपस स्थित डे-केयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
कंपनी ने कहा है कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है। कंपनी ने जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है।
इसके अलावा कंपनी ने अपने अन्य डे-केयर पार्टनर्स की समीक्षा भी शुरू कर दी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
बाल अधिकार आयोग ने शुरू की जांच
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।
बाल अधिकार अधिकारियों की टीम ने सेंटर का निरीक्षण किया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
इसके अलावा राज्य स्तर पर भी विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है, जिसमें बाल मनोविज्ञान, कानून और चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं।
माता-पिता में गुस्सा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद कई अभिभावकों ने डे-केयर सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
कामकाजी माता-पिता अक्सर कंपनियों के क्रेच पर भरोसा करते हैं, लेकिन इस मामले ने कॉर्पोरेट डे-केयर सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोग मांग कर रहे हैं कि:
बच्चों पर पड़ सकता है मानसिक असर
बाल विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र के बच्चों के साथ होने वाला डर या हिंसक व्यवहार उनके मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।
ऐसी घटनाओं के बाद बच्चों में डर, चिंता, आत्मविश्वास की कमी और व्यवहार में बदलाव जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।
विशेषज्ञ प्रभावित बच्चों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की सलाह देते हैं।
कॉर्पोरेट डे-केयर सिस्टम के लिए बड़ी चेतावनी
भारत में कई बड़ी कंपनियां कर्मचारियों की सुविधा के लिए ऑन-कैंपस क्रेच और डे-केयर सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं।
लेकिन इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आउटसोर्स किए गए डे-केयर सेंटरों की पर्याप्त निगरानी हो रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को केवल सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी और जांच जरूरी है।

