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राजनांदगांव ओवरब्रिज पहली बारिश में टूटा: 22 करोड़ का रेलवे ओवरब्रिज बना सवालों के घेरे में

कंक्रीट और डामर की सड़क पर आई एक गहरी और लंबी दरार का क्लोज-अप दृश्य, जिस पर 'न्यूज क्रिटिक' (News Critic) का लोगो और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में पहली बारिश में टूटे 22 करोड़ के ओवरब्रिज की हेडलाइन लिखी है।
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पहली ही बारिश में खुली करोड़ों के ओवरब्रिज की पोल

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में हाल ही में बनाए गए दो रेलवे ओवरब्रिज पहली ही भारी बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए। लगभग 20 से 22 करोड़ रुपये की लागत से तैयार बरगा और आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज का उद्घाटन जून 2026 में किया गया था, लेकिन महज दो सप्ताह बाद हुई बारिश ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

बरगा रेलवे ओवरब्रिज के बीचों-बीच करीब 60 से 70 फीट लंबी दरारें पड़ गईं, जबकि आलीवारा ओवरब्रिज की सड़क उखड़ गई, किनारों की बाउंड्री टूट गई और कई हिस्सों में बेस धंसने की खबर सामने आई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है और निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

बरगा रेलवे ओवरब्रिज में आई 70 फीट लंबी दरार

रविवार सुबह हुई तेज बारिश के बाद डोंगरगढ़-राजनांदगांव मार्ग पर स्थित बरगा रेलवे ओवरब्रिज के बीच में बड़ी दरार दिखाई दी। स्थानीय लोगों के अनुसार दरार लगभग 60 से 70 फीट लंबी और 10 से 12 सेंटीमीटर चौड़ी है। कुछ स्थानों पर सड़क धंसने से करीब चार फीट चौड़ा गड्ढा भी बन गया।

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने क्षतिग्रस्त हिस्से पर बैरिकेडिंग कर दी है ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

आलीवारा ओवरब्रिज की सड़क भी हुई क्षतिग्रस्त

बरगा पुल के अलावा आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज भी बारिश की मार नहीं झेल सका। यहां सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई, किनारों की सुरक्षा दीवार टूट गई और कई स्थानों पर पुल का आधार कमजोर दिखाई दिया। इससे स्थानीय लोगों में हादसे की आशंका बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने लगाए घटिया निर्माण सामग्री के आरोप

घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि पुल निर्माण में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया। उनका दावा है कि सड़क की गिट्टी और डामर आसानी से उखड़ रहे हैं और सीमेंट भी मानकों के अनुरूप नहीं दिख रहा।

ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पुल पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो जाना निर्माण में लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

विरोध प्रदर्शन, अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी

बारिश के बीच बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षतिग्रस्त पुल स्थल पर पहुंचे और रेलवे प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोगों का कहना है कि रोजाना हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं और यदि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद लंबे समय तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

रेलवे और निर्माण कंपनी ने क्या कहा?

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी टीम जल्द मौके का निरीक्षण करेगी और आवश्यक मरम्मत कार्य कराया जाएगा।

निर्माण एजेंसी ने पुल के पूरी तरह धंसने से इनकार करते हुए कहा कि शुरुआती बारिश के बाद मिट्टी के बैठने की प्रक्रिया सामान्य होती है और स्थिति को तकनीकी रूप से ठीक किया जाएगा।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए ओवरब्रिज में इतनी जल्दी बड़ी दरारें आना सामान्य नहीं माना जाता। इससे निर्माण गुणवत्ता, डिजाइन और ड्रेनेज सिस्टम की जांच आवश्यक हो जाती है।

कोरबा में भी पहली बारिश में टूटी करोड़ों की पुलिया

राजनांदगांव की घटना के बीच कोरबा जिले से भी ऐसी ही खबर सामने आई है। करतला विकासखंड के भैसामुड़ा गांव में जोगीनाला पर लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से बनी पुलिया तेज बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हो गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके कारण पहली ही बारिश में पुलिया टूट गई और आवागमन बाधित हो गया।

इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल

राजनांदगांव और कोरबा की घटनाओं ने सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण, नियमित निगरानी और तकनीकी मानकों का सख्ती से पालन न किया जाए तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ऐसे प्रोजेक्ट लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह पाते।

आगे क्या हो सकता है?

स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार, इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

साथ ही, क्षतिग्रस्त पुलों की जल्द मरम्मत कर वैकल्पिक यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की जा रही है ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

निष्कर्ष

राजनांदगांव में करोड़ों रुपये की लागत से बने रेलवे ओवरब्रिज का पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होना केवल एक स्थानीय घटना नहीं बल्कि सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तो भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति की आशंका बनी रहेगी। विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब निर्माण कार्य सुरक्षित, टिकाऊ और गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें।

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