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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन बने अंतरिम महासचिव

राम मंदिर की भव्य पृष्ठभूमि के साथ एक समाचार बैनर, जिसमें बाईं ओर चंपत राय, अनिल मिश्रा और एक अन्य व्यक्ति की तस्वीरें (इन्सर्ट) हैं। दाईं ओर ऊपर 'News Critic' का लोगो है और काले अक्षरों में 'राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन अंतरिम महामंत्री बने। SIT रिपोर्ट और विवाद जारी' की हेडलाइन लिखी है।
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अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। वहीं, सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह फैसला उस समय आया है जब चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट को लेकर देशभर में चर्चा तेज है।

ट्रस्ट की बैठक में क्या हुआ?

राम जन्मभूमि परिसर में आयोजित ट्रस्ट की बैठक पहले 11 जुलाई को प्रस्तावित थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे पहले बुलाया गया। बैठक में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि और अन्य वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे।

बैठक के बाद प्रेस वार्ता में ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि भक्तों द्वारा चढ़ाया गया धन और बहुमूल्य सामान सुरक्षित हैं तथा जांच पूरी पारदर्शिता के साथ जारी रहेगी।

चंपत राय और अनिल मिश्रा ने क्यों दिया इस्तीफा?

महासचिव चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना पद छोड़ दिया। ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी होने और दोषियों को सजा मिलने तक उनका पद पर बने रहना उचित नहीं था।

इसी क्रम में ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी स्वीकार किया गया। ट्रस्ट ने दोनों के योगदान की सराहना करते हुए उनके लंबे कार्यकाल को सम्मानजनक बताया।

कृष्ण मोहन कौन हैं?

प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी

कृष्ण मोहन महाराष्ट्र कैडर के सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी हैं। वर्ष 2025 में उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाया गया था।

अंतरिम महासचिव के रूप में प्राथमिकताएं

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाना तथा प्रशासनिक कमियों को दूर करना होगी। उन्होंने भक्तों का विश्वास मजबूत करने का भी भरोसा दिया।

SIT जांच में क्या सामने आया?

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार चढ़ावे की गिनती, नकदी प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियां सामने आई हैं।

जांच में कथित तौर पर—

  • नकदी प्रबंधन में लापरवाही
  • गणना कक्ष की सुरक्षा में कमियां
  • सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां
  • कई कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर
  • कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी
  • करोड़ों रुपये की रिकवरी

जांच एजेंसी ने ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं।

ट्रस्ट ने क्या दिया जवाब?

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि अब तक प्राप्त हजारों करोड़ रुपये के चढ़ावे का ऑडिट कराया जा चुका है। अधिकांश राशि मंदिर निर्माण और फिक्स्ड डिपॉजिट में सुरक्षित रखी गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का अलग से रिकॉर्ड रखा गया है तथा सभी की नियमित निगरानी की जाती है।

आगे क्या होगा?

ट्रस्ट ने प्रशासनिक सुधारों के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है। आगामी बैठक में—

  • एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर चर्चा होगी।
  • नए पदाधिकारियों की नियुक्ति पर फैसला लिया जाएगा।
  • सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की योजना बनेगी।
  • सीईओ नियुक्ति और आधुनिक निगरानी प्रणाली पर विचार होगा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

विपक्षी दलों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अधिक पारदर्शिता की मांग की है, जबकि भाजपा ने इसे ट्रस्ट द्वारा उठाया गया सुधारात्मक कदम बताते हुए जांच प्रक्रिया पर भरोसा जताया है।

राम मंदिर ट्रस्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती

राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े विवाद ने कई सवाल खड़े किए हैं। ट्रस्ट के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत एवं पारदर्शी व्यवस्था लागू करना है।

निष्कर्ष

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला केवल वित्तीय अनियमितता का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मुद्दा है। ट्रस्ट द्वारा इस्तीफे स्वीकार करना, नई जिम्मेदारी सौंपना और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम उठाना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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