दतिया उपचुनाव 2026: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटते ही BJP में बगावत, NH-44 पर 12 घंटे जाम
दतिया उपचुनाव में बीजेपी के फैसले से शुरू हुआ सियासी घमासान
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। पार्टी नेतृत्व ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
टिकट बदलने के फैसले के बाद दतिया में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया और मामला सड़क से लेकर संगठन तक पहुंच गया। कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर असंतोष जताया।
कौन हैं आशुतोष तिवारी, जिन्हें मिला बीजेपी का टिकट?
बीजेपी ने इस बार दतिया उपचुनाव में लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे नेता आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। उन्हें संगठन का अनुभवी चेहरा माना जाता है और वे लंबे समय तक पार्टी के विभिन्न संगठनात्मक दायित्व निभा चुके हैं।
हालांकि स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता नरोत्तम मिश्रा को ही उम्मीदवार बनाए जाने की उम्मीद कर रहे थे। इसी कारण टिकट घोषित होते ही विरोध तेज हो गया।
नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक सफर
डॉ. नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं।
उनकी प्रमुख राजनीतिक उपलब्धियां:
- छह बार दतिया से विधायक रहे।
- मध्य प्रदेश सरकार में गृह मंत्री सहित कई अहम विभाग संभाले।
- बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल रहे।
- 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा।
उपचुनाव की घोषणा के बाद उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था, जिससे माना जा रहा था कि पार्टी उन्हें फिर मौका देगी। लेकिन अंतिम समय में टिकट बदलने का फैसला लिया गया।
NH-44 पर 12 घंटे जाम, पुलिस से झड़प
टिकट कटने की खबर सामने आते ही नरोत्तम मिश्रा के समर्थक बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए।
प्रदर्शन के दौरान:
- झांसी-ग्वालियर नेशनल हाईवे-44 को जाम कर दिया गया।
- लगभग 12 घंटे तक यातायात बाधित रहा।
- करीब 15 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।
- हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हो गया।
पुलिस पर पथराव, कई अधिकारी घायल
विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किए जाने की भी खबर सामने आई।
इस दौरान:
- पुलिस अधीक्षक (SP) घायल हुए।
- अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) सहित कई पुलिसकर्मी चोटिल हुए।
- पुलिस ने हालात नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
- अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर हाईवे खाली कराया गया।
बीजेपी संगठन में इस्तीफों की लहर
राजनीतिक विरोध केवल सड़क तक सीमित नहीं रहा।
सूत्रों के अनुसार:
- बीजेपी जिला अध्यक्ष ने पद से इस्तीफा दिया।
- कई मंडल अध्यक्षों ने भी इस्तीफा सौंपा।
- जिला कार्यकारिणी के कई पदाधिकारियों ने विरोध दर्ज कराया।
- स्थानीय नेताओं ने टिकट वितरण प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
इस घटनाक्रम ने बीजेपी संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष को उजागर कर दिया है।
नरोत्तम मिश्रा ने समर्थकों से की शांति बनाए रखने की अपील
हिंसक घटनाओं के बीच डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपने समर्थकों से संयम बरतने की अपील की।
उन्होंने कहा कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि होता है और किसी भी कार्यकर्ता को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की सलाह दी।
प्रशासन अलर्ट, लागू हुई BNSS की धारा 163
स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
प्रशासन द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम:
- BNSS की धारा 163 लागू।
- बिना अनुमति रैली और प्रदर्शन पर रोक।
- संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात।
- लगातार पुलिस गश्त जारी।
प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
क्या बीजेपी की मुश्किल बढ़ाएगी यह बगावत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी जल्द ही असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को नहीं मना पाती है तो इसका असर उपचुनाव के नतीजों पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और इसे अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति तैयार कर रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी समय रहते डैमेज कंट्रोल कर पाएगी या दतिया उपचुनाव में यह नाराजगी चुनावी परिणामों को प्रभावित करेगी।
निष्कर्ष
दतिया उपचुनाव 2026 केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह बीजेपी के भीतर संगठनात्मक एकजुटता की भी परीक्षा बन गया है। नरोत्तम मिश्रा जैसे वरिष्ठ नेता का टिकट कटना, उसके बाद कार्यकर्ताओं का उग्र विरोध, सामूहिक इस्तीफे और प्रशासनिक सख्ती इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की रणनीति और बागी नेताओं का रुख चुनाव की दिशा तय करेगा।

