गुरुग्राम एनकाउंटर: नाबालिगों के परिजनों ने उठाए सवाल, पुलिस कार्रवाई पर जांच की मांग
गुरुग्राम एनकाउंटर पर नया विवाद, परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल
दिल्ली-एनसीआर से सटे गुरुग्राम में हाल ही में हुए चर्चित पुलिस एनकाउंटर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मुठभेड़ में मारे गए चार युवकों में से दो के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका दावा है कि दोनों नाबालिग थे और उनका कोई बड़ा आपराधिक इतिहास नहीं था। परिवारों का कहना है कि उनके बच्चों को संगठित अपराध गिरोह ने बहला-फुसलाकर अपने नेटवर्क में शामिल किया और वे पूरी साजिश से अनजान थे।
दूसरी ओर, गुरुग्राम पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ आत्मरक्षा में हुई और आरोपी एक कारोबारी से रंगदारी वसूलने पहुंचे थे। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और पुलिस सभी तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
क्या है गुरुग्राम एनकाउंटर का पूरा मामला?
गुरुग्राम के सुशांत लोक फेज-2 इलाके में देर रात पुलिस और कथित बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, विदेश में बैठे गैंगस्टर दीपक नांदल के निर्देश पर कुछ हथियारबंद युवक एक कारोबारी के घर पहुंचे थे। आरोप है कि उनका उद्देश्य रंगदारी वसूलना और दबाव बनाने के लिए फायरिंग करना था।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की। पुलिस का दावा है कि आरोपियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में चार युवकों की मौत हो गई, जबकि एक घायल हुआ। घटना में तीन पुलिसकर्मी भी घायल बताए गए।
परिजनों का दावा- बच्चे अपराधी नहीं थे
मारे गए दो युवकों के परिवारों का कहना है कि उनके बेटे नाबालिग थे और किसी बड़े आपराधिक मामले में शामिल नहीं थे।
1. नाबालिग होने का दावा
परिजनों का कहना है कि दोनों की उम्र 18 वर्ष से कम थी और वे पढ़ाई तथा खेल गतिविधियों से जुड़े हुए थे। परिवार का आरोप है कि उन्हें गलत संगत के कारण अपराधियों के संपर्क में लाया गया।
2. राष्ट्रीय खिलाड़ी होने का दावा
एक मृतक के पिता ने दावा किया कि उनका बेटा जेवलिन थ्रो का उभरता हुआ खिलाड़ी था और राज्य स्तर पर पदक भी जीत चुका था। उनका कहना है कि वह पेशेवर अपराधी नहीं था।
3. जिंदा पकड़ने की मांग
परिजनों का सवाल है कि यदि पुलिस को पहले से जानकारी थी तो आरोपियों को गिरफ्तार करने की कोशिश क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि उन्हें जिंदा पकड़कर पूछताछ की जा सकती थी।
पुलिस का पक्ष क्या है?
गुरुग्राम पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह आत्मरक्षा में की गई। पुलिस के अनुसार,
- आरोपियों के पास आधुनिक हथियार थे।
- पुलिस टीम पर पहले फायरिंग की गई।
- जवाबी कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ हुई।
- घटना में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि नाबालिग बताए जा रहे युवक गैंगस्टर के संपर्क में कैसे आए और उन्हें अपराध में किसने शामिल किया।
गैंगस्टर नेटवर्क में युवाओं की भूमिका पर उठे सवाल
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि विदेश में बैठे गैंगस्टर किस तरह सोशल मीडिया और स्थानीय नेटवर्क के जरिए युवाओं को अपने गिरोह से जोड़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आसान कमाई का लालच, सोशल मीडिया का प्रभाव और गलत संगत कई युवाओं को अपराध की ओर धकेल रही है। यदि जांच में यह पहलू सामने आता है तो यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
घटना के बाद स्थानीय लोगों, ग्रामीणों और कुछ सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
उनका कहना है कि—
- पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच हो।
- सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- यदि प्रक्रिया में कोई चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जाए।
हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
आगे क्या होगा?
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
एक ओर पुलिस इसे आत्मरक्षा में हुई कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। ऐसे में इस मामले की वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

