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बद्रीनाथ चढ़ावा विवाद: गिरफ्तारी से बचने हाईकोर्ट पहुंचा आरोपी प्रमोद नौटियाल, BKTC से मांगा जवाब

बद्रीनाथ मंदिर चढ़ावा विवाद में करोड़ों के गबन के मुख्य आरोपी द्वारा गिरफ्तारी से बचने के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की खबर दिखाता न्यूज़ क्रिटिक (News Critic) का न्यूज़ ग्राफ़िक।
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपने निलंबन आदेश और बद्रीनाथ थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है।

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए BKTC से जवाब मांगा है। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को होगी।

क्या है बद्रीनाथ चढ़ावा विवाद?

पूरा मामला 2 जुलाई 2026 को सामने आया, जब बद्रीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की गणना के दौरान कथित अनियमितताओं की शिकायत मिली।

बताया गया कि मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज में प्रमोद नौटियाल मोबाइल फोन के नीचे कथित रूप से नोटों की गड्डी दबाकर ले जाते हुए दिखाई दिए। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति ने तत्काल जांच शुरू कर दी।

जांच रिपोर्ट के बाद निलंबन और FIR

BKTC अध्यक्ष के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने प्रारंभिक जांच में प्रमोद नौटियाल के खिलाफ प्रथम दृष्टया अनियमितता की पुष्टि की।

इसके बाद—

  • प्रमोद नौटियाल को तत्काल निलंबित किया गया।
  • 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया।
  • बद्रीनाथ कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई।
  • उन्हें जोशीमठ कार्यालय में संबद्ध किया गया, लेकिन उन्होंने वहां उपस्थिति दर्ज नहीं कराई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, उनका मोबाइल फोन भी लंबे समय तक बंद मिला।

प्रमोद नौटियाल ने अपने बचाव में क्या कहा?

प्रमोद नौटियाल ने अपने जवाब में सभी आरोपों को खारिज किया है।

नोटों की गड्डी नहीं, नोटबुक थी

उन्होंने दावा किया कि CCTV में मोबाइल के नीचे दिखाई देने वाली वस्तु नोटों की गड्डी नहीं बल्कि उनकी व्यक्तिगत नोटबुक थी, जिसे वह हमेशा अपने साथ रखते हैं।

हालांकि जांच समिति ने कर्मचारियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले को गंभीर माना है।

तीन स्तर पर हो रही है जांच

इस पूरे मामले की जांच फिलहाल तीन अलग-अलग स्तरों पर जारी है।

1. पुलिस SIT जांच

एफआईआर के आधार पर पुलिस विशेष जांच दल पूरे मामले की जांच कर रहा है।

2. BKTC विभागीय जांच

मंदिर समिति अपनी आंतरिक जांच के जरिए नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय कर रही है।

3. उच्चस्तरीय समिति की जांच

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर रही है। समिति को निर्धारित समय में रिपोर्ट सौंपनी है।

40 दिन की CCTV फुटेज खंगाली जाएगी

मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर परिसर में लगे 32 CCTV कैमरों की लगभग 40 दिनों की रिकॉर्डिंग की जांच की जाएगी।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि कहीं पहले भी इसी तरह की कोई अनियमितता तो नहीं हुई।

चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया में किए गए बड़े बदलाव

विवाद के बाद BKTC ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई नए नियम लागू किए हैं।

  • बिना जेब वाली ड्रेस अनिवार्य।
  • निजी सामान ले जाने पर रोक।
  • अतिरिक्त CCTV निगरानी।
  • कम से कम पांच कर्मचारियों की मौजूदगी।
  • प्रवेश से पहले तलाशी।
  • कंट्रोल रूम से लाइव मॉनिटरिंग।

इन बदलावों का उद्देश्य श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

मामले को लेकर कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

  • बदरीश संयुक्त संघर्ष समिति ने विशेष बोर्ड बैठक बुलाने की मांग की।
  • कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
  • विभिन्न संगठनों ने मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग उठाई।

प्रमोद नौटियाल कौन हैं?

प्रमोद नौटियाल लंबे समय से बदरी-केदार मंदिर समिति से जुड़े हुए हैं और अध्यक्ष के व्यक्तिगत सहायक के रूप में कार्य कर चुके हैं।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में उन पर वीआईपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली के भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर 16 जुलाई को होने वाली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है।

इसके अलावा—

  • पुलिस SIT की रिपोर्ट
  • उच्चस्तरीय समिति की जांच
  • BKTC की विभागीय कार्रवाई

इन तीनों की रिपोर्ट के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

निष्कर्ष

बद्रीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद का असर केवल मंदिर प्रशासन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास पर भी पड़ता है। इसलिए इस मामले में निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई बेहद जरूरी मानी जा रही है।

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