भूस्खलन से मुंबई-पुणे रेल सेवा ठप, 30 ट्रेनें 17 जुलाई तक रद्द; हजारों यात्री प्रभावित
मुंबई, 11 जुलाई 2026
महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल मुंबई-पुणे रेल कॉरिडोर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। करजट-लोनावला के भोर घाट सेक्शन में हुए भूस्खलन के कारण रेल संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। ट्रैक पर बड़े पैमाने पर मलबा और चट्टानें गिरने से मध्य रेलवे को कई ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ा।
रेलवे प्रशासन ने मरम्मत कार्य को देखते हुए 10 जुलाई से 17 जुलाई तक कुल 30 ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है। इसके अलावा कई ट्रेनों का मार्ग बदला गया है और कुछ को आंशिक रूप से संचालित किया जा रहा है। इस फैसले से रोजाना यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कैसे हुआ भूस्खलन?
6 जुलाई को लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद भोर घाट (करजट-लोनावला) क्षेत्र में कई स्थानों पर पहाड़ी से चट्टानें और मलबा रेलवे ट्रैक पर आ गिरा। विशेष रूप से ठाकुरवाड़ी-मंकी हिल सेक्शन और टनल नंबर-40 के आसपास तीनों रेल लाइनों पर असर पड़ा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रैक को तत्काल बंद किया गया और युद्धस्तर पर मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। हालांकि लगातार बारिश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मरम्मत कार्य अपेक्षा से अधिक समय ले रहा है।
30 ट्रेनें रद्द, कई का बदला गया रूट
मध्य रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द किया है।
प्रमुख रद्द ट्रेनें
- डेक्कन क्वीन एक्सप्रेस
- डेक्कन एक्सप्रेस
- इंद्रायणी एक्सप्रेस
- सीएसएमटी-पुणे इंटरसिटी एक्सप्रेस
- प्रगति एक्सप्रेस
- सिंहगढ़ एक्सप्रेस
- सीएसएमटी-हैदराबाद एक्सप्रेस
- चेन्नई एग्मोर सुपरफास्ट
- हुबली-दादर एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनें
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर अवश्य जांच लें।
यात्रियों पर पड़ा बड़ा असर
मुंबई-पुणे रेल मार्ग रोजाना हजारों यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और व्यापारियों के लिए जीवनरेखा माना जाता है। ट्रेनें रद्द होने के कारण कई यात्री स्टेशनों पर फंस गए, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने बस और निजी वाहनों का सहारा लिया।
इसका असर सड़क यातायात पर भी दिखाई दिया। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुरानी हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। बसों का किराया भी कई जगह सामान्य से अधिक हो गया।
रेलवे युद्धस्तर पर कर रहा मरम्मत कार्य
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक मलबा हटाने और ट्रैक की मरम्मत का कार्य लगातार जारी है। एक रेल लाइन पर आवश्यक कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष लाइनों पर तेजी से काम चल रहा है।
मरम्मत पूरी होने के बाद ट्रैक की विस्तृत सुरक्षा जांच भी की जाएगी, जिसके बाद ही सामान्य रेल संचालन बहाल किया जाएगा।
भोर घाट क्यों है सबसे संवेदनशील इलाका?
भोर घाट पश्चिमी घाट का अत्यंत संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र है। मानसून के दौरान यहां अक्सर भूस्खलन की घटनाएं होती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और अत्यधिक वर्षा के कारण ऐसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है।
दीर्घकालिक समाधान के रूप में विशेषज्ञ निम्न सुझाव दे रहे हैं—
- बेहतर ड्रेनेज सिस्टम
- ढलानों को मजबूत बनाने की व्यवस्था
- रियल टाइम लैंडस्लाइड मॉनिटरिंग सिस्टम
- वैकल्पिक रेल मार्गों का विकास
सड़क मार्ग भी हुआ प्रभावित
भूस्खलन का असर केवल रेल सेवा तक सीमित नहीं रहा। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट के पास भी मलबा गिरने से कुछ समय के लिए यातायात रोकना पड़ा।
बाद में मलबा हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया, लेकिन पूरे क्षेत्र में कई घंटों तक लंबा जाम लगा रहा।
यात्रियों के लिए रेलवे की सलाह
रेलवे ने यात्रियों से कहा है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस अवश्य जांचें। जिन ट्रेनों को रद्द या डायवर्ट किया गया है, उनके संबंध में लगातार अपडेट जारी किए जा रहे हैं। स्टेशनों पर अतिरिक्त सहायता काउंटर और हेल्पलाइन भी उपलब्ध कराई गई हैं।
निष्कर्ष
मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर हुआ यह भूस्खलन एक बार फिर यह साबित करता है कि मानसून के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में रेलवे संचालन कितना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। फिलहाल रेलवे का लक्ष्य 17 जुलाई तक ट्रैक की मरम्मत और सुरक्षा जांच पूरी कर सामान्य संचालन बहाल करना है।
यात्रियों को सलाह है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति अवश्य जांच लें।

