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Meta ने Instagram Photos से AI Image बनाने वाला विवादित फीचर हटाया, विरोध के बाद लिया बड़ा फैसला

मेटा (Meta) द्वारा इंस्टाग्राम की तस्वीरों से AI इमेज बनाने वाले विवादित फीचर को वापस लेने की खबर का समाचार बैनर – News Critic
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नई दिल्ली, 12 जुलाई 2026: सोशल मीडिया कंपनी Meta ने अपने नए AI टूल Muse Image का वह फीचर वापस ले लिया है, जिसके जरिए यूजर्स पब्लिक Instagram अकाउंट्स की तस्वीरों को रेफरेंस बनाकर नई AI इमेज तैयार कर सकते थे। फीचर लॉन्च होने के कुछ ही दिनों में इसे लेकर प्राइवेसी, सहमति (Consent) और डीपफेक जैसे गंभीर सवाल उठने लगे। यूजर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और हॉलीवुड की कई संस्थाओं के विरोध के बाद कंपनी ने आखिरकार यह फीचर हटा दिया।

Meta ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह फीचर यूजर्स की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, इसलिए इसे फिलहाल बंद किया जा रहा है।

Muse Image फीचर क्या था?

Meta Superintelligence Labs द्वारा विकसित Muse Image एक AI इमेज जनरेशन टूल है, जिसे इस सप्ताह लॉन्च किया गया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यूजर Meta AI चैटबॉट में किसी भी पब्लिक Instagram अकाउंट को @mention करके उसकी तस्वीरों या स्टाइल को रेफरेंस बनाकर नई AI इमेज तैयार कर सकता था।

फीचर में स्केच एडिटिंग जैसी सुविधाएं भी दी गई थीं, जिससे यूजर अपनी जरूरत के अनुसार AI इमेज को कस्टमाइज कर सकते थे।

विवाद की सबसे बड़ी वजह क्या थी?

बिना स्पष्ट अनुमति इस्तेमाल हो रही थीं तस्वीरें

सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर हुआ कि यह फीचर डिफॉल्ट रूप से ऑन था। यानी जिन लोगों का Instagram अकाउंट पब्लिक था और जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक थी, उनकी तस्वीरें AI इमेज बनाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती थीं।

अगर कोई यूजर ऐसा नहीं चाहता था तो उसे खुद सेटिंग्स में जाकर ऑप्शन बंद करना पड़ता था। Meta की ओर से इसके बारे में अलग से कोई नोटिफिकेशन भी नहीं भेजा गया था।

प्राइवेसी और डीपफेक का बढ़ा डर

आलोचकों का कहना था कि इस फीचर का दुरुपयोग करके किसी भी व्यक्ति की AI इमेज बनाई जा सकती है।

मुख्य चिंताएं थीं:

  • यूजर्स की निजी तस्वीरों का बिना स्पष्ट सहमति उपयोग
  • डीपफेक और फर्जी कंटेंट बनने का खतरा
  • महिलाओं और सार्वजनिक हस्तियों की तस्वीरों के दुरुपयोग की आशंका
  • कलाकारों और क्रिएटर्स की स्टाइल कॉपी होने का डर

हॉलीवुड और क्रिएटर्स ने भी जताई नाराजगी

फीचर लॉन्च होने के बाद कई हॉलीवुड कलाकारों, टैलेंट एजेंसियों और एंटरटेनमेंट यूनियनों ने इसका विरोध किया।

Creative Artists Agency (CAA), SAG-AFTRA और कई प्रमुख कलाकारों ने Meta से इस फीचर को हटाने की मांग की। अभिनेत्री हन्ना आइनबाइंडर ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोगों से AI उपयोग सेटिंग्स की जांच करने की अपील की।

सोशल मीडिया पर #MetaAI और #InstagramPrivacy जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे।

Meta ने क्या कहा?

कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उसका उद्देश्य लोगों को एक उपयोगी AI क्रिएटिव टूल देना था, लेकिन यूजर्स की प्रतिक्रिया उम्मीद के मुताबिक नहीं रही।

Meta ने कहा कि यूजर फीडबैक को ध्यान में रखते हुए Instagram रेफरेंसिंग वाला फीचर तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।

हालांकि Muse Image का सामान्य AI इमेज जनरेशन टूल आगे भी उपलब्ध रह सकता है।

AI और प्राइवेसी पर फिर शुरू हुई नई बहस

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि AI तकनीक के विकास के साथ यूजर्स की प्राइवेसी और सहमति कितनी महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित फीचर्स लॉन्च करने से पहले कंपनियों को:

स्पष्ट Opt-in सिस्टम लागू करना चाहिए

यूजर की तस्वीर या कंटेंट इस्तेमाल करने से पहले उसकी स्पष्ट अनुमति ली जानी चाहिए।

पूरी पारदर्शिता जरूरी

यूजर को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उसकी तस्वीर कब, कैसे और किस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की जा रही है।

मजबूत सुरक्षा व्यवस्था

AI टूल्स के जरिए डीपफेक और गलत उपयोग रोकने के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

भारत के यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

भारत दुनिया के सबसे बड़े Instagram बाजारों में शामिल है। ऐसे में यह फैसला भारतीय यूजर्स के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि AI तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच यूजर्स को अपनी Privacy Settings नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए।

साथ ही भारत में डिजिटल डेटा सुरक्षा और डीपफेक को लेकर सरकार भी लगातार नए नियमों पर काम कर रही है।

निष्कर्ष

Meta का यह फैसला दिखाता है कि AI तकनीक के साथ यूजर्स की गोपनीयता और सहमति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारी विरोध के बाद कंपनी का विवादित फीचर वापस लेना यह संकेत देता है कि भविष्य में AI टूल्स को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना कंपनियों की प्राथमिकता होगी।

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