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एमपी फोर्टिफाइड चावल घोटाला: एथेनॉल प्लांट के लिए भेजा गया सरकारी चावल कैसे हुआ गायब? जानिए पूरा मामला

मध्य प्रदेश (एमपी) में एथेनॉल प्लांट के लिए भेजे गए 2000 करोड़ रुपये के चावल के रास्ते में गायब होने के बड़े घोटाले का समाचार बैनर – News Critic
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भोपाल/बालाघाट: मध्य प्रदेश में सरकारी फोर्टिफाइड चावल के कथित दुरुपयोग को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित सब्सिडी वाले फोर्टिफाइड चावल की सप्लाई में अनियमितताओं के आरोपों ने प्रशासन और राजनीति दोनों में हलचल मचा दी है। मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रही है और शुरुआती कार्रवाई में कई लोगों से पूछताछ, गिरफ्तारियां तथा ट्रकों की जब्ती की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कथित घोटाले की राशि अलग-अलग रिपोर्टों में 1,160 करोड़ रुपये से लेकर करीब 2,000 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। हालांकि अंतिम नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

कैसे सामने आया पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, 3 जून को बालाघाट जिले के नवेगांव स्थित एफसीआई गोदाम से छिंदवाड़ा के बोरगांव स्थित एक एथेनॉल प्लांट के लिए तीन ट्रकों में फोर्टिफाइड चावल भेजा गया था। आरोप है कि यह चावल निर्धारित प्लांट तक पहुंचने के बजाय रास्ते में ही दूसरी जगह पहुंचा दिया गया।

बाद में पुलिस ने जांच के दौरान एक निजी राइस मिल से सरकारी चावल बरामद किया। इसी घटना के बाद पूरे मामले की जांच तेज हुई और संभावित बड़े नेटवर्क की आशंका जताई गई

फोर्टिफाइड चावल क्या होता है?

फोर्टिफाइड चावल वह चावल होता है जिसमें आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 समेत आवश्यक पोषक तत्व मिलाए जाते हैं।

इसका उपयोग मुख्य रूप से—

  • कुपोषण कम करने
  • एनीमिया रोकने
  • गर्भवती महिलाओं के पोषण
  • बच्चों एवं किशोरियों के स्वास्थ्य सुधार

जैसी सरकारी योजनाओं में किया जाता है।

सरकार ने अतिरिक्त चावल के उपयोग के लिए इसे एथेनॉल उत्पादन कार्यक्रम के तहत भी उपलब्ध कराना शुरू किया था।

आरोप क्या हैं?

जांच एजेंसियों के सामने आए शुरुआती तथ्यों के आधार पर आरोप है कि—

1. एफसीआई से निकासी

सरकारी गोदाम से सब्सिडी वाले चावल की निकासी एथेनॉल प्लांट के नाम पर की गई।

2. रास्ते में डायवर्जन

कुछ मामलों में ट्रकों को कथित रूप से निर्धारित स्थान के बजाय निजी राइस मिलों की ओर मोड़ दिया गया।

3. निजी मिलों में बिक्री

आरोप है कि सब्सिडी वाले फोर्टिफाइड चावल को बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर निजी मिल संचालकों को बेच दिया गया।

4. एथेनॉल उत्पादन में दूसरे चावल का उपयोग

जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए अपेक्षाकृत सस्ते ब्रोकन राइस का इस्तेमाल किया गया।

नोट: इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

कितने जिलों में जांच का दायरा?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, SIT की जांच का दायरा मध्य प्रदेश के 17 जिलों के 22 एथेनॉल प्लांट्स तक पहुंच चुका है।

अब तक—

  • 40 से अधिक लोगों से पूछताछ
  • 4 गिरफ्तारियां
  • 12 ट्रक जब्त
  • कई राइस मिलों की जांच

जैसी कार्रवाई की गई है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं और केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

दूसरी ओर राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) गठित कर जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

क्यों गंभीर माना जा रहा है यह मामला?

यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं माना जा रहा।

यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो—

  • सरकारी सब्सिडी का दुरुपयोग
  • गरीबों के पोषण कार्यक्रम पर असर
  • एथेनॉल नीति की विश्वसनीयता पर सवाल
  • सरकारी राजस्व को नुकसान

जैसे गंभीर पहलू सामने आ सकते हैं।

विशेषज्ञों ने क्या सुझाव दिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए—

  • GPS आधारित ट्रैकिंग
  • डिजिटल ट्रक लॉक सिस्टम
  • रियल टाइम मॉनिटरिंग
  • थर्ड पार्टी ऑडिट
  • ऑनलाइन स्टॉक वेरिफिकेशन

जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है

फिलहाल जांच जारी

बालाघाट पुलिस, एफसीआई और SIT इस पूरे मामले की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रहे हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। यदि बड़े स्तर पर अनियमितता साबित होती है तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा कार्रवाई संभव है।

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