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बदरीनाथ धाम चढ़ावा हेराफेरी: जांच के पहले दिन प्रमोद नौटियाल निलंबित, FIR दर्ज करने की तैयारी

बद्रीनाथ धाम चढ़ावा हेराफेरी मामले में प्रमोद नौटियाल के निलंबन की खबर दर्शाता ग्राफ़िक, जिसमें बद्रीनाथ मंदिर, आरोपी की तस्वीर, 'SUSPENDED' की मुहर, हथकड़ी और हथौड़ा (Gavel) शामिल है। (News Critic)
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देहरादून/बदरीनाथ

उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के पहले ही दिन श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अध्यक्ष कार्यालय में तैनात कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

यह मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष ने पूरे चढ़ावा प्रबंधन की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है, जबकि सरकार ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

जांच के पहले दिन ही हुई बड़ी कार्रवाई

मंगलवार को बदरीनाथ पहुंची जांच टीम ने प्रारंभिक जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड का परीक्षण किया। शुरुआती जांच में प्रमोद नौटियाल की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद बीकेटीसी ने उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया।

समिति की ओर से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया था। प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर अब उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

CCTV फुटेज में क्या मिला?

2 जुलाई की घटना बनी जांच का आधार

सूत्रों के अनुसार 2 जुलाई 2026 को चढ़ावे की गिनती के दौरान हुई गतिविधियां सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई थीं।

प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर फुटेज में प्रमोद नौटियाल को निर्धारित प्रक्रिया से अलग तरीके से कुछ सामग्री या राशि अपने पास रखते हुए देखा गया। इसी के बाद मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच शुरू की गई।

हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

हाई लेवल जांच समिति का गठन

मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन सदस्यीय समिति

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई गई है।

समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच में इन बिंदुओं की भी पड़ताल होगी—

  • चढ़ावे की पूरी गणना प्रक्रिया
  • लेखा-जोखा और रिकॉर्ड
  • कर्मचारियों की भूमिका
  • सुरक्षा व्यवस्था
  • संभावित बड़े नेटवर्क की जांच

प्रमोद नौटियाल कौन हैं?

प्रमोद नौटियाल लंबे समय से बीकेटीसी से जुड़े कर्मचारी हैं।

  • वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में नियुक्ति
  • बाद में व्यक्तिगत सहायक (PA) के पद पर समायोजन
  • कई अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुके हैं
  • वर्तमान में बीकेटीसी अध्यक्ष कार्यालय में तैनात थे

उनकी संवेदनशील चढ़ावा गणना प्रक्रिया में भूमिका भी अब जांच के दायरे में है।

FIR दर्ज करने की तैयारी

बीकेटीसी के अनुसार प्रथम दृष्टया मिले तथ्यों के आधार पर प्रमोद नौटियाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी और यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेताओं ने पूरे प्रकरण की SIT जांच और सभी सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल एक कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा।

वहीं अन्य विपक्षी दलों ने भी पूरे चढ़ावा प्रबंधन की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

बीकेटीसी का क्या कहना है?

बीकेटीसी अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि मंदिर समिति इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है।

उन्होंने कहा कि—

  • दोषी किसी भी स्तर का हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
  • जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी।
  • श्रद्धालुओं की आस्था से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की बढ़ी चिंता

बदरीनाथ धाम देश के सबसे प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु नकद राशि, सोना-चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएं चढ़ाते हैं।

ऐसे में इस घटना के बाद कई सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—

  • चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया डिजिटल बनाई जाए।
  • हर चरण की CCTV निगरानी हो।
  • नियमित स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
  • सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए।

निष्कर्ष

बदरीनाथ धाम चढ़ावा हेराफेरी मामले में प्रमोद नौटियाल का निलंबन शुरुआती कार्रवाई माना जा रहा है। अब सभी की नजर उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट पर है। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो मामला और बड़ा हो सकता है।

सरकार और मंदिर समिति दोनों ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और श्रद्धालुओं की आस्था बनाए रखने के लिए पूरी पारदर्शिता अपनाई जाएगी।

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