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छत्तीसगढ़ कोरिया हिंसा: रेत माफिया विवाद में भाजपा नेता समेत 3 की हत्या, राजनीतिक घमासान तेज

छत्तीसगढ़ के कोरिया में हुई हिंसा और रेत माफिया के आरोपों पर घिरी सरकार से जुड़ा न्यूज़ ग्राफिक - News Critic
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कोरिया हिंसा ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में मचाई हलचल

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सोनहत क्षेत्र स्थित नौगई (नवगई) गांव में हुई हिंसक घटना ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रेत खनन और उसके कथित अवैध कारोबार को लेकर दो पक्षों के बीच हुए विवाद में भाजपा नेता एवं सोनहत जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह सहित तीन लोगों की मौत हो गई।

घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। कई आरोपियों को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। इस बीच विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, नौगई गांव में रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर लंबे समय से दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि घटना से पहले दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई थी, जिससे तनाव और बढ़ गया।

देर रात विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। आरोप है कि हमलावरों ने एक फॉर्च्यूनर कार को टिपर वाहन से घेर लिया और उसमें आग लगा दी। इस दर्दनाक घटना में भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।

इस घटना में वीरेंद्र सिंह और नागेंद्र सिंह की भी जान चली गई, जबकि अन्य कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।

पुलिस की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

क्षेत्र में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।

कौन थे भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह?

भरत सिंह गहरवार, जिन्हें स्थानीय लोग लल्ला सिंह के नाम से जानते थे, सोनहत जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके थे। वे क्षेत्र की राजनीति और ठेकेदारी से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों में गिने जाते थे।

स्थानीय स्तर पर उनका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव माना जाता था। हाल के वर्षों में वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे।

घटना के बाद सियासत गरमाई

इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अवैध रेत कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है और इसी वजह से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

रेत खनन को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। विभिन्न जिलों में अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई भी होती रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अवैध खनन पर प्रभावी निगरानी नहीं रखी गई, तो ऐसे विवाद भविष्य में भी गंभीर रूप ले सकते हैं।

परिवार और स्थानीय लोगों की मांग

मृतकों के परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और सभी दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है। कुछ लोगों ने उच्च स्तरीय जांच की भी मांग उठाई है।

घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थानीय लोग सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।

आगे क्या?

पुलिस जांच अभी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले में नए खुलासे हो सकते हैं।

राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हैं, इसलिए आने वाले समय में यह मामला विधानसभा और प्रदेश की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन सकता है।

निष्कर्ष

कोरिया जिले की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था, अवैध खनन और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा विषय बन चुकी है। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना जरूरी है।

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