कांवड़ पर कविता सुनाने वाले शिक्षक पर एफआईआर, अखिलेश यादव ने यूपी सरकार को घेरा
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक शिक्षक द्वारा स्कूल की प्रार्थना सभा में कांवड़ यात्रा पर कविता सुनाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में शिक्षक रजनीश गंगवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लेकर योगी सरकार पर तंज कसा है और इसे “अमृतकाल” की एक दुखद तस्वीर बताया है।
क्या है पूरा मामला?
बरेली के बहेड़ी कस्बे के एक इंटर कॉलेज में कार्यरत शिक्षक रजनीश गंगवार ने स्कूल की मॉर्निंग असेंबली के दौरान छात्रों को एक कविता सुनाई। कविता का मुख्य भाव था कि बच्चे कांवड़ यात्रा की बजाय शिक्षा पर ध्यान दें और ज्ञान का दीप जलाएं। कविता कुछ इस प्रकार थी:
“तुम कांवड़ लेने मत जाना,
तुम ज्ञान का दीप जलाना…”
यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद कुछ हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कविता हिंदू धर्म के धार्मिक अनुष्ठानों का अपमान है और इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है।
शिकायत मिलने पर पुलिस ने शिक्षक रजनीश गंगवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। आरोप है कि उनकी कविता से धार्मिक भावना आहत हुई है।
सियासी बयानबाजी तेज
शिक्षक पर एफआईआर दर्ज होने के बाद विपक्षी पार्टियों ने योगी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“शिक्षक पर एफआईआर और शिक्षालय बंद हो रहे हैं… भाजपा के लिए क्या यही अमृतकाल है?”
साथ ही उन्होंने यूपी सरकार के उस फैसले को भी जोड़ा, जिसमें राज्य में 5000 से अधिक स्कूलों को बंद करने की बात कही जा रही है।
अखिलेश यादव का कहना है कि एक ओर सरकार धार्मिक यात्राओं के नाम पर व्यवस्थाएं कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा और शिक्षकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे शिक्षा विरोधी रवैया करार दिया।
शिक्षक के समर्थन में उठी आवाजें
इस पूरे मामले पर मानवाधिकार संगठन पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने भी प्रतिक्रिया दी है। पीयूसीएल ने कहा कि शिक्षक की कविता में किसी भी धर्म, समुदाय या संप्रदाय के खिलाफ कोई आपत्तिजनक बात नहीं कही गई है। उनका उद्देश्य केवल शिक्षा का महत्व बताना था।
संस्था ने मांग की है कि रजनीश गंगवार पर दर्ज एफआईआर को तुरंत रद्द किया जाए और उन्हें बेवजह निशाना न बनाया जाए। कई शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने भी सोशल मीडिया पर शिक्षक के समर्थन में पोस्ट किए हैं।
प्रशासन का रुख
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है और जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में पाया गया कि शिक्षक की मंशा गलत नहीं थी, तो कार्रवाई भी उसी अनुसार की जाएगी।
हालांकि, इस मुद्दे ने राज्य में शिक्षा बनाम धार्मिक भावना की बहस को जन्म दे दिया है। एक वर्ग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे धार्मिक आस्था के अपमान के तौर पर देख रहा है।
कांवड़ यात्रा को लेकर सुनाई गई एक कविता ने राज्य में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शिक्षक पर एफआईआर, स्कूलों को बंद करने की योजना, और राजनीतिक बयानबाजी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा और धर्म के मुद्दों को लेकर समाज में संवेदनशीलता बहुत अधिक है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या शिक्षक रजनीश गंगवार को राहत मिलती है या नहीं। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर योगी सरकार पर लगातार दबाव बनाता नजर आ रहा है।

