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इंडिया गठबंधन की चौथी बैठक दिल्ली में, अखिलेश यादव दे सकते हैं गठबंधन को झटका

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पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद इंडिया गठबंधन की चौथी बैठक कल 6 दिसंबर को दिल्ली में होगी। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के चलते पिछले दो महीने से इंडिया गठबंधन की कोई भी बैठक नहीं हुयी थी। इस बैठक में इंडिया गठबंधन के सभी शीर्ष नेता शामिल होंगे। लेकिन सूत्रों से मिली खबर के अनुसार इस बैठक में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव शामिल नहीं होंगे। हालाँकि अखिलेश यादव अपने प्रतिनिधि के तौर पर सपा सांसद और महासचिव रामगोपाल यादव को इस बैठक में शामिल होने के लिए भेज सकते हैं।

कांग्रेस ने बुलायी इंडिया गठबंधन की बैठक

इस बार कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इंडिया गठबंधन के सभी 28 घटक दलों की बैठक 6 दिसंबर को दिल्ली में बुलायी है। इस बैठक में इंडिया गठबंधन के सभी घटक दलों के शीर्ष नेताओं को शामिल होना है। अभी तक इंडिया गठबंधन की जितनी भी बैठकें हुयी हैं उन सभी बैठकों में समाजवादी पार्टी की तरफ से अखिलेश यादव ने हिस्सा लिया है। लेकिन इस बार खबर आ रही है कि 6 दिसंबर को दिल्ली में होने जा रही बैठक में अखिलेश यादव ने न शामिल होने का मन बना लिया है। हालाँकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने प्रतिनिधि के तौर पर अपने चाचा और सपा के महासचिव रामगोपाल यादव को बैठक में शामिल होने भेज सकते हैं।

दरअसल मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच तल्खियां काफी बढ़ गयी थी। उस दौरान दोनों ही पार्टिओं की तरफ से एक दूसरे पर वार-प्रतिवार हुए। जिसके बाद अखिलेश यादव ने मध्यप्रदेश की 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतार दिए। चुनावी सभाओं के दौरान अखिलेश यादव ने बीजेपी के साथ साथ कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस को धोकेबाज पार्टी तक बता दिया था।

बैठक में होगी एनडीए के खिलाफ नई रणनीति की तलाश

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र एक राज्य में ही जीत मिली है। वहीँ बीजेपी को तीन राज्यों में भारी बहुमत से जीत हासिल हुयी है। विधानसभा चुनाव के इन नतीजों के बाद से कांग्रेस पार्टी बैकफुट पर है। इस पूरे माहौल के बाद देखना होगा कि विपक्षी गठबंधन इंडिया क्या रणनीति बनाता है और कैसे 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए को घेरने की तैयारी करता है। तीन राज्यों में मिली जीत के बाद बीजेपी का विश्वाश बढ़ा हुआ है। वहीं इंडिया गठबंधन से जुड़े हुए दल नई रणनीति की तलाश में हैं।

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