NEET UG 2026 पेपर लीक का बड़ा खुलासा: कोचिंग संचालक बोला- ‘सपने में मिले थे सवाल’, CBI जांच में सामने आए 5 मास्टरमाइंड
नई दिल्ली/लातूर/पुणे
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 से जुड़ा पेपर लीक मामला लगातार नए खुलासे कर रहा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में अब ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिन्होंने पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों छात्रों के भनीट पेपर लीक 2026: सीबीआई जांचविष्य को प्रभावित करने वाले इस घोटाले में कोचिंग संस्थानों, शिक्षकों और कथित अंदरूनी लोगों के गठजोड़ का खुलासा हुआ है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक कोचिंग संचालक ने छात्रों को कथित तौर पर यह विश्वास दिलाया कि परीक्षा के प्रश्न उन्हें “सपने में” मिले थे। जांच एजेंसियों के अनुसार यह बयान केवल शक से बचने का एक तरीका हो सकता है, जबकि वास्तविकता में पूरा मामला संगठित पेपर लीक सिंडिकेट से जुड़ा दिखाई दे रहा है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा में लगभग 22.7 लाख छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा के कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर एक कथित “गेस पेपर” वायरल हुआ। हैरानी की बात यह रही कि उसमें शामिल बड़ी संख्या में प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए।
मामले ने तूल पकड़ा तो राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर सवाल उठने लगे। बढ़ते विवाद और जांच के बीच परीक्षा को रद्द करना पड़ा तथा दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। इसके बाद CBI ने मामले की जांच अपने हाथ में ली और कई राज्यों में छापेमारी शुरू की।
‘सपने में मिले थे सवाल’ वाला दावा क्यों बना चर्चा का विषय?
महाराष्ट्र के लातूर स्थित रेनुकाई करियर सेंटर (RCC) के संचालक शिवराज मोटेगांवकर का नाम जांच में प्रमुख रूप से सामने आया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार उनके बेटे ने परीक्षा में 704 अंक हासिल किए थे, जिसने संदेह को और गहरा कर दिया।
पूछताछ के दौरान यह दावा सामने आया कि छात्रों और सहयोगियों को बताया गया था कि प्रश्न भगवान ने सपने में बताए थे। कई छात्रों ने भी जांच एजेंसियों को बताया कि परीक्षा से पहले विशेष बैच चलाए गए थे, जहां कुछ चुनिंदा विद्यार्थियों को ऐसे नोट्स और गेस पेपर दिए गए थे जिनसे वास्तविक प्रश्नपत्र का काफी हिस्सा मिलता-जुलता था।
इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है। छात्र और अभिभावक सवाल उठा रहे हैं कि यदि यह केवल संयोग था तो इतने अधिक प्रश्न वास्तविक पेपर से कैसे मेल खा गए।
जांच में सामने आए 5 अहम किरदार
CBI जांच के दौरान जिन पांच लोगों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है, उनमें शामिल हैं:
1. पी.वी. कुलकर्णी
पुणे से जुड़े एक केमिस्ट्री प्रोफेसर, जिन पर प्रश्नपत्र की गोपनीय जानकारी हासिल कर उसे आगे पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसियों के मुताबिक उनके घर पर विशेष सत्र आयोजित किए जाते थे। उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है।
2. मनीषा मंडहारे
बॉटनी विषय की शिक्षिका, जिन पर बायोलॉजी सेक्शन के प्रश्नों को छात्रों तक पहुंचाने का आरोप है। जांच में दावा किया गया है कि उन्होंने कई छात्रों को लीक सामग्री उपलब्ध कराई।
3. शिवराज मोटेगांवकर
लातूर स्थित कोचिंग संस्थान RCC के संचालक। उनका “सपने में प्रश्न मिलने” वाला बयान पूरे मामले का सबसे चर्चित हिस्सा बन चुका है।
4. डॉ. मनोज शिरुरे
लातूर के डॉक्टर, जिन पर छात्रों तक केमिस्ट्री के प्रश्न पहुंचाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आरोप है।
5. तेजस हर्षदकुमार शाह
फिजिक्स फैकल्टी के रूप में कार्यरत शाह पर फिजिक्स सेक्शन से जुड़े प्रश्नों को नेटवर्क के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और आगे भी कार्रवाई जारी है।
कैसे काम करता था पूरा नेटवर्क?
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार प्रश्नपत्र लीक करने के लिए एक संगठित चैन तैयार की गई थी। कथित तौर पर प्रश्नों को हाथ से लिखकर स्कैन किया जाता था और फिर PDF के रूप में व्हाट्सएप तथा टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए प्रसारित किया जाता था।
महाराष्ट्र, राजस्थान और अन्य राज्यों के कुछ कोचिंग हब इस नेटवर्क के केंद्र के रूप में सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ मामलों में लाखों रुपये लेकर छात्रों को कथित लीक सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी।
छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी
पेपर लीक के खुलासे के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा बढ़ गया है। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। छात्रों का कहना है कि वे वर्षों तक मेहनत करते हैं, महंगी कोचिंग लेते हैं और फिर भी कुछ लोग गलत तरीकों से परीक्षा में बढ़त हासिल कर लेते हैं।
अभिभावकों का सवाल है कि इतनी बड़ी परीक्षा की सुरक्षा में बार-बार चूक क्यों हो रही है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई कब होगी।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। उनका सुझाव है कि:
- परीक्षा को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित बनाया जाए।
- प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनल की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाई जाए।
- कोचिंग संस्थानों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।
- पेपर लीक से जुड़े मामलों में त्वरित और कठोर दंड सुनिश्चित किया जाए।
- तकनीकी निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग को मजबूत किया जाए।
आगे क्या होगा?
केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों ने दोबारा परीक्षा को सुरक्षित तरीके से आयोजित कराने का भरोसा दिया है। हालांकि लाखों छात्रों का विश्वास दोबारा हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
CBI की जांच अभी जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
निष्कर्ष
NEET केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के सपनों का आधार है। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं न सिर्फ छात्रों की मेहनत को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की साख पर भी असर डालती हैं।
“सपने में प्रश्न मिलने” जैसा दावा भले ही चर्चा का विषय बन गया हो, लेकिन असली मुद्दा यह है कि परीक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों को दूर किया जाए और दोषियों को सख्त सजा मिले। तभी छात्रों का भरोसा दोबारा बहाल हो सकेगा।
NEET UG 2026 परीक्षा के बाद कथित गेस पेपर और वास्तविक प्रश्नपत्र में समानता मिलने पर पेपर लीक की आशंका सामने आई, जिसकी जांच CBI कर रही है।
जांच में सामने आए दावों के अनुसार लातूर के एक कोचिंग संचालक ने छात्रों से कहा था कि उन्हें प्रश्न सपने में मिले थे।
विवाद और जांच के बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया था।
सुरक्षा बढ़ाने, डिजिटल निगरानी मजबूत करने, CBT परीक्षा प्रणाली लागू करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जैसे कदमों पर जोर दिया जा रहा है।

