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अमेरिका की अस्थायी छूट से भारत को राहत, रूस से तेल आयात जारी

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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बावजूद भारत लगातार रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। इसी बीच अमेरिका ने रूसी तेल शिपमेंट से जुड़ी एक अहम अस्थायी छूट को आगे बढ़ा दिया है। अब यह छूट 17 जून तक लागू रहेगी। इस फैसले से भारत समेत उन देशों को बड़ी राहत मिली है जो समुद्र में मौजूद रूसी कच्चे तेल की खरीद कर रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर इस समय तेल बाजार कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ईरान से जुड़े तनाव, मध्य पूर्व में बढ़ती अनिश्चितता और सप्लाई में रुकावट की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में अमेरिका की ओर से दी गई राहत ने तेल आयात करने वाले देशों को कुछ समय के लिए स्थिरता प्रदान की है।

रूस बना भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर

साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले भारत बहुत कम मात्रा में रूस से तेल खरीदता था। उस समय भारत के कुल तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी केवल 0.2% से 1% के आसपास थी। लेकिन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते रूस ने अपने तेल पर भारी छूट देना शुरू कर दिया। इसका फायदा भारत जैसे बड़े आयातक देशों ने उठाया।

आज स्थिति यह है कि भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 35% से 40% तक पहुंच चुकी है। इसी के साथ रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है। वर्तमान में भारत रोजाना करीब 1.8 से 1.9 मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है।

भारत की ऊर्जा जरूरतें काफी बड़ी हैं और देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 80% से 85% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है। ऐसे में सस्ता रूसी तेल भारत के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो रहा है। इससे देश को ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल रही है।

रूस से तेल खरीदने पर भारत ने खर्च किए अरबों रुपये

ऊर्जा क्षेत्र पर नजर रखने वाली संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में भारत ने रूस से लगभग 5.3 बिलियन यूरो का कच्चा तेल खरीदा। यह हाल के महीनों में सबसे बड़े मासिक आयात आंकड़ों में से एक माना गया।

हालांकि अप्रैल 2026 में रूसी तेल के आयात में करीब 15% की कमी दर्ज की गई। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट किसी राजनीतिक दबाव या नई नीति की वजह से नहीं हुई।

अप्रैल में आयात क्यों घटा?

अप्रैल में तेल आयात कम होने का मुख्य कारण गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी में रखरखाव का काम था। यह रिफाइनरी नायरा एनर्जी द्वारा संचालित की जाती है। जानकारी के मुताबिक, रिफाइनरी में 9 अप्रैल से मेंटेनेंस का काम शुरू हुआ, जिसके कारण वहां कच्चे तेल की मांग अस्थायी रूप से घट गई।

इस वजह से रूस से आने वाले तेल की कुल खरीद में भी कमी देखने को मिली। हालांकि माना जा रहा है कि रिफाइनरी का काम पूरा होने के बाद आयात फिर से सामान्य स्तर पर पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक रूस रियायती दरों पर तेल उपलब्ध कराता रहेगा, तब तक भारत उसके साथ तेल व्यापार जारी रख सकता है। इसके साथ ही भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए अलग-अलग देशों से आयात के विकल्प भी खुला रखे हुए है।

 

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