कांग्रेस नेता सचिन पायलट का बयान: अमेरिका के सीजफायर बयान पर संसद में विशेष सत्र बुलाने की मांग
डोनाल्ड ट्रंप के कश्मीर मुद्दे पर दिए गए बयानों को बताया दुर्भाग्यपूर्ण, आतंकी घटनाओं पर चुप्पी पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर पर दिए गए बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से बार-बार इस तरह के बयान सामने आना चिंताजनक है, लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से अब तक इस पर कोई ठोस और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सचिन पायलट ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कई बार भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) की बात की है, लेकिन इन बयानों में उन्होंने न तो “आतंकवाद” शब्द का इस्तेमाल किया और न ही पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों का कोई उल्लेख किया।
आतंकी घटनाओं पर ट्रंप की चुप्पी पर उठाए सवाल
सचिन पायलट ने सवाल उठाया कि डोनाल्ड ट्रंप ने मुंबई, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकी हमलों में पाकिस्तान की संलिप्तता पर एक भी शब्द नहीं कहा, जबकि यह साबित हो चुका है कि इन हमलों में पाकिस्तान का हाथ रहा है। इसके बजाय, उन्होंने अनावश्यक रूप से कश्मीर मुद्दे को उठाकर पाकिस्तान की मंशा को बल दिया है, जो इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाना चाहता है।
उन्होंने कहा कि यह प्रयास भारत की संप्रभुता और सुरक्षा नीति के खिलाफ है। जब पूरी दुनिया को पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क और उसकी भूमिका की जानकारी है, तब ऐसे बयानों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग
सचिन पायलट ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि अब वक्त आ गया है कि इस विषय पर संसद का एक विशेष सत्र बुलाया जाए। उन्होंने कहा कि 1994 में संसद ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को भारत का अभिन्न हिस्सा माना गया था और उसे वापस लेने की बात कही गई थी। अब आवश्यकता है कि उस प्रस्ताव को दोहराया जाए और उसे नए सिरे से पारित किया जाए, ताकि भारत की स्थिति दुनिया के सामने और अधिक स्पष्ट हो सके।
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति सीजफायर की घोषणा करते हैं, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उन्होंने पाकिस्तान से कौन-से आश्वासन लिए। पाकिस्तान एक विफल राष्ट्र है, जिसे सेना और आईएसआई जैसे संगठनों द्वारा चलाया जा रहा है। ऐसे में उनके शब्दों पर विश्वास करना मुश्किल है।
भारतीय सेना की प्रशंसा
सचिन पायलट ने भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए कहा कि एक बार फिर सेना ने यह साबित किया है कि वे किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सेना ने हर मोर्चे पर मजबूती से देश का बचाव किया है और दुश्मन को करारा जवाब दिया है।
उन्होंने कहा कि ट्रंप द्वारा दिया गया युद्धविराम का बयान पूरी तरह से अप्रत्याशित था। यह पहली बार है कि किसी विदेशी नेता ने इस तरह सोशल मीडिया पर संघर्षविराम की घोषणा की हो। यह प्रयास कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय रूप देने की कोशिश है, जो भारत के लिए स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस की स्पष्ट मांग
कांग्रेस पार्टी की ओर से लंबे समय से यह मांग की जा रही है कि एक बार फिर से 1994 के प्रस्ताव को संसद में लाया जाए। सचिन पायलट ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर यह संदेश देना चाहिए कि पीओके भारत का हिस्सा है और रहेगा।
उन्होंने अंत में कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय बयानों के पीछे छिपी मंशा को पहचानना जरूरी है और भारत को सशक्त तरीके से अपना पक्ष दुनिया के सामने रखना चाहिए। अब समय है कि भारत अपनी कूटनीतिक रणनीति को और मजबूत करे और पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को बेनकाब करे।

