May 25, 2026

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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से जनता परेशान, टैक्स कम करने की उठी मांग

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर साफ दिखाई देने लगा है। देशभर में लगातार ईंधन के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों की चिंता भी बढ़ गई है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। पिछले 10 दिनों के भीतर यह चौथी बार है जब तेल कंपनियों ने दोनों ईंधनों के दाम बढ़ाए हैं। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी से लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव सीधे घरेलू कीमतों को प्रभावित करता है। इसका असर सिर्फ वाहन चलाने वालों पर ही नहीं, बल्कि परिवहन, खेती, व्यापार और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है।

सीटीआई ने सरकार से मांगी राहत

ईंधन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने केंद्र और राज्य सरकारों से तुरंत राहत देने की मांग की है। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की आपात बैठक बुलाने की अपील की है।

उन्होंने सुझाव दिया है कि अगले तीन महीनों तक पूरे देश में पेट्रोल और डीजल पर केवल 5 प्रतिशत फ्लैट वैट लागू किया जाए। उनका कहना है कि अगर ऐसा किया जाता है तो आम जनता को प्रति लीटर 10 से 15 रुपये तक की राहत मिल सकती है। इससे महंगाई पर भी कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।

बृजेश गोयल ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि वैट राज्य सरकारें तय करती हैं। इसलिए केवल केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में राज्यों को भी आगे आकर जनता को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए।

अलग-अलग राज्यों में टैक्स का बड़ा अंतर

सीटीआई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले वैट में काफी अंतर है। तेलंगाना में पेट्रोल पर लगभग 35.20 प्रतिशत वैट लगाया जा रहा है, जबकि आंध्र प्रदेश में 31 प्रतिशत वैट के साथ अतिरिक्त टैक्स भी वसूला जाता है। दूसरी ओर दिल्ली में पेट्रोल पर लगभग 19.40 प्रतिशत वैट लागू है।

वहीं अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रों में वैट केवल 1 प्रतिशत होने के कारण वहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी कम हैं। इससे यह साफ होता है कि टैक्स की दरें ईंधन की अंतिम कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।

सीटीआई ने यह भी बताया कि दिल्ली में कुछ दिन पहले पेट्रोल की बेस कीमत लगभग 66.29 रुपये प्रति लीटर और डीजल की 67.36 रुपये प्रति लीटर थी। लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स के बाद उपभोक्ताओं को काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। पेट्रोल पर कुल टैक्स करीब 40 से 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, जबकि डीजल पर यह 30 से 35 प्रतिशत के बीच है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। परिवहन खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजों, सब्जियों और रोजमर्रा के सामान के दाम भी ऊपर जा सकते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा।

व्यापार संगठनों का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे जनता को राहत मिल सके और आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर न पड़े। फिलहाल लोगों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

 

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