ट्रम्प की नेतन्याहू को दो टूक चेतावनी: “ईरान पर बड़े हमले रोको, नहीं तो इजरायल अकेला पड़ जाएगा”
वाशिंगटन/तेल अवीव, 9 जून 2026। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कड़ा संदेश देते हुए ईरान पर बड़े सैन्य हमलों से बचने की सलाह दी है। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और ऐसे समय में इजरायली सैन्य कार्रवाई पूरे प्रयास को पटरी से उतार सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ट्रम्प का यह बयान अमेरिका-इजरायल संबंधों में बढ़ती असहमति का संकेत माना जा रहा है। साथ ही इससे मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
ट्रम्प ने नेतन्याहू को क्या कहा?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प ने हाल ही में नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इजरायल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले जारी रखे तो उसे अमेरिकी समर्थन की गारंटी नहीं मिलेगी।
सूत्रों का दावा है कि ट्रम्प ने नेतन्याहू को चेतावनी देते हुए कहा कि जल्दबाजी में उठाया गया कोई भी सैन्य कदम अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है।
परमाणु समझौते पर अमेरिका की नजर
ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि ईरान के साथ एक नया परमाणु समझौता संभव है। इस समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण के बदले कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जा सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है। उनका मानना है कि यदि समझौता सफल होता है तो क्षेत्र में सैन्य तनाव स्वतः कम हो जाएगा।
कैसे बढ़ा ईरान-इजरायल तनाव?
हाल के दिनों में इजरायल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई देखने को मिली। लेबनान और अन्य क्षेत्रों में हुए हमलों के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
हालांकि दोनों पक्षों ने फिलहाल संघर्ष विराम का संकेत दिया है, लेकिन स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी समय तनाव दोबारा भड़क सकता है।
नेतन्याहू का रुख अब भी सख्त
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई केवल अस्थायी रूप से रोकी गई है। यदि राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो इजरायल दोबारा सैन्य कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा बताता रहा है। तेल अवीव का मानना है कि केवल कूटनीतिक समझौतों के भरोसे क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
मध्य पूर्व में बढ़ सकती है अस्थिरता
ईरान-इजरायल तनाव का असर पूरे मध्य पूर्व पर दिखाई दे रहा है। क्षेत्र के कई देशों ने अमेरिका से हस्तक्षेप कर हालात को नियंत्रित करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परमाणु समझौता सफल रहा तो क्षेत्र में शांति की नई उम्मीद पैदा हो सकती है। लेकिन बातचीत विफल होने की स्थिति में बड़े सैन्य संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अमेरिका-इजरायल रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?
ट्रम्प के हालिया बयानों ने यह संकेत दिया है कि वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच रणनीतिक मतभेद बढ़ रहे हैं। हालांकि दोनों देश लंबे समय से करीबी सहयोगी रहे हैं, लेकिन ईरान को लेकर उनकी प्राथमिकताओं में अंतर साफ दिखाई दे रहा है।
अमेरिका फिलहाल कूटनीति को प्राथमिकता देना चाहता है, जबकि इजरायल सुरक्षा चिंताओं के आधार पर कठोर रुख अपनाए हुए है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी ने मध्य पूर्व की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ अमेरिका ईरान के साथ समझौते के जरिए स्थिरता लाने की कोशिश कर रहा है, वहीं इजरायल सुरक्षा कारणों से सैन्य विकल्प खुला रखना चाहता है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता सफल होती है या फिर क्षेत्र एक नए बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।
ट्रम्प ने कहा कि यदि इजरायल ईरान पर बड़े हमले जारी रखता है तो उसे भविष्य में अमेरिकी समर्थन कम मिल सकता है।
दोनों देशों के बीच नए परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है।
इजरायल का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
फिलहाल दोनों पक्षों ने हमले रोकने के संकेत दिए हैं, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
यदि समझौता सफल रहा तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है और स्थिरता बढ़ सकती है।

