संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, आखिरी दिन लोकसभा करीब 1 मिनट चली; मोदी-शाह और राहुल सदन में मौजूद
संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद समाप्त हो गई, जबकि राज्यसभा में करीब एक घंटे तक कामकाज हुआ। दोनों सदनों में विपक्षी विरोध और हंगामे का असर आखिरी दिन भी दिखाई दिया।
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे। राष्ट्रगीत के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को अगले सत्र तक के लिए स्थगित कर दिया।
संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, आखिरी दिन भी हंगामा
संसद का मानसून सत्र राजनीतिक टकराव और लगातार विरोध के बीच समाप्त हुआ। आखिरी दिन भी विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी की, जिसके कारण लोकसभा में सामान्य कामकाज नहीं हो सका।
लोकसभा में कार्यवाही शुरू होने के बाद राष्ट्रगीत और अन्य औपचारिकताओं के बाद सदन को स्थगित कर दिया गया। अलग-अलग रिपोर्टों में लोकसभा की अवधि करीब एक मिनट से चार मिनट से कम तक बताई गई है, लेकिन सभी रिपोर्ट इस बात पर सहमत हैं कि सदन में वास्तविक कामकाज बेहद कम हुआ।
पीएम मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी रहे मौजूद
मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में मौजूद रहे। विपक्ष की ओर से राहुल गांधी भी सदन में मौजूद थे।
इन प्रमुख नेताओं की मौजूदगी के बीच सदन की कार्यवाही का इतने कम समय में समाप्त होना राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है। पूरे सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
राज्यसभा में करीब एक घंटे चला कामकाज
लोकसभा के मुकाबले राज्यसभा में आखिरी दिन कुछ ज्यादा कामकाज हुआ। राज्यसभा करीब एक घंटे चली और इस दौरान एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्यसभा में खनन से जुड़े कानून में संशोधन करने वाला विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ। इसके बाद सदन को भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
राज्यसभा में खड़गे ने उठाया हल्द्वानी का मुद्दा
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी से जुड़े एक विवाद का मुद्दा उठाया। यह मामला एक कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण से जुड़ा था।
खड़गे ने सवाल उठाया कि उनके कार्यक्रम के बाद उस स्थान पर हवन या शुद्धिकरण की जरूरत क्यों पड़ी। सरकार की ओर से जेपी नड्डा ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
पूरे मानसून सत्र में हंगामा रहा हावी
इस बार संसद का मानसून सत्र कई मुद्दों को लेकर लगातार चर्चा में रहा। विपक्ष ने अलग-अलग मामलों पर चर्चा की मांग की, जबकि सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण कई बार दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इसका सीधा असर संसद की उत्पादकता पर पड़ा।
लोकसभा की उत्पादकता सिर्फ 16 प्रतिशत
पीआरएस के आंकड़ों के अनुसार, मानसून सत्र 2026 में लोकसभा की उत्पादकता करीब 16 प्रतिशत रही। लोकसभा पूरे सत्र में लगभग 17.4 घंटे ही काम कर सकी।
यह आंकड़ा बताता है कि सदन के निर्धारित समय का बड़ा हिस्सा हंगामे और बार-बार होने वाले स्थगन की वजह से उपयोग नहीं हो सका।
राज्यसभा की उत्पादकता भी रही कम
राज्यसभा में भी स्थिति बेहतर नहीं रही। पीआरएस के अनुसार, राज्यसभा की उत्पादकता करीब 39.17 प्रतिशत रही और सदन लगभग 37 घंटे 49 मिनट ही काम कर सका।
इस तरह दोनों सदनों में निर्धारित समय की तुलना में वास्तविक कामकाज काफी कम रहा। हालांकि, सरकार कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफल रही।
सरकार ने 11 विधेयक कराए पारित
हंगामे के बावजूद सरकार ने मानसून सत्र के दौरान विधायी कामकाज को आगे बढ़ाया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सत्र के दौरान 11 विधेयक पारित किए गए।
सरकार के लिए यह महत्वपूर्ण उपलब्धि रही, क्योंकि विपक्ष के लगातार विरोध के बीच भी कई विधायी प्रस्तावों को सदन की मंजूरी मिली।
वहीं विपक्ष का आरोप रहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने दी गई। इसको लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा।
NEET समेत कई मुद्दों पर रहा टकराव
मानसून सत्र के दौरान NEET-UG से जुड़े विवाद और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर भी संसद में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष इन मामलों पर चर्चा और सरकार से जवाब की मांग करता रहा।
राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने कई मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। सरकार की ओर से भी चर्चा के प्रस्ताव और जवाब देने की पेशकश की गई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
अमित शाह के जवाब को लेकर भी रहा विवाद
सत्र के अंतिम दिनों में गृह मंत्री अमित शाह की ओर से विपक्ष के सवालों का जवाब देने को लेकर भी राजनीतिक विवाद रहा। सरकार ने चर्चा के लिए समय देने की बात कही, लेकिन विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हो सका।
आखिरी दिन भी सदन का माहौल सामान्य नहीं हो सका और लोकसभा में औपचारिक कार्यवाही के बाद ही सत्र समाप्त हो गया।
वंदे मातरम् के साथ हुआ लोकसभा का समापन
मानसून सत्र के अंतिम दिन लोकसभा में वंदे मातरम् का गायन भी हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी समेत कई नेता उस समय सदन में मौजूद थे।
इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। इस तरह राजनीतिक टकराव और कम उत्पादकता के बीच मानसून सत्र का औपचारिक समापन हो गया।
संसद में हंगामे का मुद्दा फिर चर्चा में
संसद की कार्यवाही का बार-बार बाधित होना लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। सरकार का तर्क रहता है कि विपक्ष को सदन चलने देना चाहिए, जबकि विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय और जवाब की मांग करता है।
मानसून सत्र में भी यही स्थिति देखने को मिली। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने से सदन का काफी समय विरोध और स्थगन में चला गया।
कामकाज कम होने से क्या असर पड़ता है?
संसद में निर्धारित समय के मुकाबले कम कामकाज होने का असर विधायी और संसदीय निगरानी दोनों पर पड़ता है। प्रश्नकाल, चर्चा, विधेयकों पर बहस और अन्य संसदीय प्रक्रियाओं के लिए उपलब्ध समय कम हो जाता है।
संसदीय लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और फैसलों पर चर्चा तथा विपक्ष के सवालों का जवाब महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए सदन की उत्पादकता संसद के कामकाज का अहम संकेतक होती है।
अब अगले सत्र पर रहेगी नजर
मानसून सत्र समाप्त होने के बाद अब संसद के अगले सत्र की तैयारियां होंगी। इस सत्र में हुए राजनीतिक टकराव के बाद आने वाले सत्र में भी कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच बहस जारी रहने की संभावना है।
संसद के अगले सत्र में किन मुद्दों पर चर्चा होगी और सरकार किन विधेयकों को आगे बढ़ाएगी, इस पर अब राजनीतिक नजरें रहेंगी।
निष्कर्ष
संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ ही मानसून सत्र 2026 समाप्त हो गया। आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही बेहद कम समय तक चली, जबकि राज्यसभा करीब एक घंटे तक चली और वहां एक विधेयक पारित किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राहुल गांधी की मौजूदगी के बीच लोकसभा में वंदे मातरम् के बाद सदन स्थगित हुआ। पूरे सत्र में विपक्ष के विरोध और लगातार हंगामे का असर कामकाज पर साफ दिखाई दिया। पीआरएस के अनुसार लोकसभा की उत्पादकता करीब 16 प्रतिशत और राज्यसभा की करीब 39.17 प्रतिशत रही।
अब इस सत्र की सबसे बड़ी चर्चा यही रहेगी कि राजनीतिक टकराव के बीच संसद का कामकाज कितना प्रभावित हुआ और अगले सत्र में सरकार तथा विपक्ष के बीच संवाद किस तरह आगे बढ़ता है।

