नेपाल बाढ़ में 10 सेकेंड ने बचाई कई जानें:चेतावनी मिलते ही ऊंचाई की तरफ भागे लोग; अब तक 919 मौतें, 4200 से ज्यादा लापता
काठमांडू। नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल में अब तक 903 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, 4,247 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। इस तरह नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों की संख्या 919 हो गई है।
इस भीषण आपदा के बीच कुछ लोगों की जान समय पर मिली चेतावनी के कारण बच गई। कई लोगों ने खतरे का संकेत मिलते ही ऊंचाई वाले इलाकों की तरफ भागकर अपनी जान बचाई। कुछ लोगों के पास सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए केवल कुछ सेकेंड का समय था।
चेतावनी मिलते ही ऊंचाई की तरफ भागे लोग
नेपाल में बाढ़ का पानी कई इलाकों में बेहद तेजी से बढ़ा। अचानक आए पानी और मलबे ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। कई जगहों पर लोगों ने खतरा देखते ही ऊंचे स्थानों की ओर भागना शुरू कर दिया।
कुछ इलाकों में लोगों को पहले ही खतरे की सूचना मिल गई थी। इसके बाद परिवारों ने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित जगहों का रुख किया। यही समय पर लिया गया फैसला कई लोगों के लिए जीवन बचाने वाला साबित हुआ।
स्कूल के 1600 से ज्यादा बच्चों की बची जान
नुवाकोट जिले में एक स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने भी समय रहते बड़ा फैसला लिया। उन्हें बाढ़ के खतरे की जानकारी मिली तो उन्होंने स्कूल में मौजूद 1,600 से ज्यादा छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
छात्रों को स्कूल से निकालकर पास की पहाड़ी पर ले जाया गया। इसके कुछ ही समय बाद तेज बाढ़ ने स्कूल की इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। स्कूल पूरी तरह मलबे और पानी में घिर गया।
इस घटना ने दिखाया कि प्राकृतिक आपदा के समय कुछ मिनट भी कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अगर समय पर छात्रों को बाहर नहीं निकाला जाता, तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था।
नेपाल में 903 लोगों की मौत
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, देश में अब तक 903 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 4,247 लोग लापता हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिक और सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं।
बाढ़ से नेपाल के कई जिलों में भारी नुकसान हुआ है। घर, सड़कें और पुल तबाह हो गए हैं। कई जगहों पर बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
900 से ज्यादा कर्मचारी सुरंगों में फंसे
बाढ़ का सबसे गंभीर असर नेपाल के जलविद्युत प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ा है। रासुवा और नुवाकोट जिलों में कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 933 कर्मचारी सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। उन्हें बाहर निकालने के लिए नेपाली बचाव दल के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी मदद कर रहे हैं। राहत टीमों के लिए मलबा और खराब मौसम बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ग्लेशियर टूटने के बाद आई तबाही
इस आपदा की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक बड़े ग्लेशियर या बर्फ और चट्टानों के ढहने से हुई। इसके बाद अचानक पानी का बहाव बढ़ गया। तेज पानी अपने साथ मलबा लेकर नीचे की ओर आया और रास्ते में आने वाली कई संरचनाओं को तबाह कर दिया।
बाढ़ के कारण कई गांवों का संपर्क टूट गया। कुछ इलाकों में सड़कें और पुल बह गए। राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भी परेशानी हो रही है।
राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हजारों सुरक्षाकर्मी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। हेलीकॉप्टर और दूसरे संसाधनों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
अब प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश करना है। साथ ही सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को जल्द बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।
नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर दिखाया है कि समय पर चेतावनी और तुरंत कार्रवाई कितनी जरूरी है। कई लोगों के लिए कुछ सेकेंड का फैसला जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन गया।

