नेपाल में बाढ़ के बाद अज्ञात शवों का सामूहिक दफन शुरू, 900 से ज्यादा मौतें; हजारों लोग लापता
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ और मलबे में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने के बाद अब प्रशासन के सामने शवों की पहचान और सुरक्षित तरीके से अंतिम प्रबंधन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
कई शव बाढ़ के तेज बहाव में बहकर घटनास्थल से काफी दूर पहुंच गए हैं। कुछ शवों की हालत इतनी खराब है कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में नेपाल के चितवन जिले में अज्ञात शवों के अस्थायी सामूहिक दफन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
नेपाल में कितनी हुई मौतें?
26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 31 अगस्त की Reuters रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में कम से कम 903 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,247 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। चीन की ओर भी 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है।
इससे पहले रविवार तक नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों की संख्या करीब 804 बताई गई थी। राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है।
अज्ञात शवों को क्यों दफनाया जा रहा है?
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद होने से नेपाल के अस्पतालों और शवगृहों पर दबाव बढ़ गया है। कई शवों को काफी दूर से बरामद किया गया है और कुछ शव लंबे समय तक पानी और मलबे में दबे रहने के कारण तेजी से खराब हो रहे हैं।
ऐसे में अधिकारियों ने पहले DNA सैंपल और अन्य पहचान संबंधी जानकारी सुरक्षित करने के बाद अज्ञात शवों को अस्थायी रूप से दफनाने का फैसला लिया है। इसका उद्देश्य शवों को सुरक्षित तरीके से संभालना और भविष्य में पहचान होने पर परिवारों को उन्हें सौंपने की संभावना बनाए रखना है।
चितवन में बनाए गए अस्थायी दफन स्थल
नेपाल के चितवन जिले का देवघाट क्षेत्र इस समय अज्ञात शवों के अस्थायी दफन का प्रमुख स्थान बना हुआ है। यहां बाढ़ में बहकर आए कई शव बरामद किए गए हैं।
रेडियो नेपाल की 31 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार चितवन में अब तक 272 शव बरामद किए गए थे। इनमें 12 की पहचान हो चुकी थी, जबकि 199 अज्ञात शवों को DNA और अन्य पहचान संबंधी जानकारी सुरक्षित करने के बाद दफनाया गया।
DNA सैंपल से बाद में हो सकेगी पहचान
अज्ञात शवों को दफनाने से पहले फॉरेंसिक टीमों द्वारा DNA सैंपल और पहचान से जुड़ी अन्य जानकारी रिकॉर्ड की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि अगर भविष्य में किसी परिवार को अपने लापता रिश्तेदार की जानकारी मिलती है और DNA मिलान से पहचान की पुष्टि होती है, तो संबंधित शव या अवशेष को बाहर निकालकर परिवार को अंतिम संस्कार के लिए सौंपा जा सकता है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य आपदा के बीच शवों को सम्मानजनक तरीके से संभालने के साथ-साथ भविष्य में पहचान की संभावना को बनाए रखना है।
परिवार अभी भी अपनों की तलाश में
बाढ़ के बाद हजारों लोग अब भी लापता हैं। कई परिवार अस्पतालों, अस्थायी शव केंद्रों और राहत शिविरों में अपने रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं।
कई शवों के घटनास्थल से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक बह जाने की वजह से पहचान का काम और मुश्किल हो गया है। कुछ शवों की हालत भी बेहद खराब है, जिससे परिवारों के लिए पहचान करना आसान नहीं है।
सामूहिक दफन को लेकर उठे सवाल
अज्ञात शवों के अस्थायी दफन को लेकर नेपाल में कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए हैं। कुछ परिवारों और सामाजिक नेताओं का कहना है कि हिंदू अंतिम संस्कार की परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
वहीं, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम स्थायी अंतिम संस्कार के तौर पर नहीं, बल्कि अस्थायी व्यवस्था के रूप में उठाया गया है। शवों से DNA और अन्य पहचान संबंधी जानकारी सुरक्षित की जा रही है, ताकि भविष्य में परिवारों की पहचान होने पर उन्हें उचित अंतिम संस्कार का अवसर दिया जा सके।
राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। कई जगहों पर मलबा, भूस्खलन और खराब मौसम के कारण बचाव दलों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
Reuters के मुताबिक नेपाल में हजारों बचावकर्मी अभियान में जुटे हैं और कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। करीब 933 श्रमिकों के सुरंगों में फंसे होने की जानकारी भी सामने आई है।
आगे भी बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा
बचाव दल अभी कई प्रभावित क्षेत्रों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाए हैं। कुछ इलाकों में मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश का काम जारी है।
ऐसे में प्रशासन को आशंका है कि आने वाले दिनों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में और बदलाव हो सकता है। कई शवों के अब तक नहीं मिलने के कारण परिवारों की चिंता भी लगातार बनी हुई है।
निष्कर्ष
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों लोगों के लापता होने के बाद अब प्रशासन के सामने अज्ञात शवों की पहचान और अंतिम प्रबंधन की गंभीर चुनौती है।
चितवन में DNA सैंपल और अन्य पहचान संबंधी जानकारी सुरक्षित करने के बाद अज्ञात शवों को अस्थायी रूप से दफनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य शवों को सम्मानजनक तरीके से संभालना और भविष्य में पहचान होने पर परिवारों को उन्हें सौंपने की संभावना बनाए रखना है।
वहीं, राहत और बचाव अभियान अभी जारी है और हजारों लापता लोगों की तलाश की जा रही है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों तक बचाव दल पहुंचेंगे, इस आपदा की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

