MP में 351 बसों से सुगम परिवहन सेवा शुरू, 7 शहरों को मिलेगी कनेक्टिविटी
मध्य प्रदेश में 21 साल के लंबे अंतराल के बाद सार्वजनिक बस परिवहन व्यवस्था को नए स्वरूप में शुरू किया जा रहा है। MP में 351 बसें पहले चरण में सात शहरों से संचालित होंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 25 सितंबर को भोपाल के भेल दशहरा मैदान से इन बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। इसे ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के पहले चरण के रूप में शुरू किया जा रहा है।
MP में 351 बसें किन शहरों से चलेंगी?
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के पहले चरण में सात शहरों को शामिल किया गया है। इन शहरों में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बस सेवाएं शुरू की जा रही हैं।
शहरवार बसों का विवरण इस प्रकार है:
- इंदौर: 145 बसें, 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी
- भोपाल: 106 बसें, 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी
- जबलपुर: 67 बसें, 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी
- रीवा: 18 इंटरसिटी बसें
- देवास: 10 इंटरसिटी बसें
- कटनी: 3 इंटरसिटी बसें
- भिंड: 2 इंटरसिटी बसें
इस तरह पहले चरण में कुल 351 बसें संचालित की जाएंगी। इनमें शहर के भीतर और शहरों के बीच चलने वाली बसें शामिल हैं।
MP में 351 बसें किन रूटों पर चलेंगी?
नई परिवहन सेवा का उद्देश्य केवल बड़े शहरों को जोड़ना नहीं है। इसके तहत प्रमुख शहरों के साथ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना है।
उपलब्ध रूट विवरण के अनुसार इंदौर से भोपाल, अशोकनगर, जबलपुर, उज्जैन, सिवनी और रतलाम जैसे शहरों के लिए बसें प्रस्तावित हैं। वहीं भोपाल से बालाघाट, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, गुना, जबलपुर, छिंदवाड़ा और बैतूल जैसे रूट शामिल हैं।
जबलपुर क्षेत्र में छिंदवाड़ा, बालाघाट और सागर के अलावा कटनी से जबलपुर और रीवा जैसे रूट भी शामिल किए गए हैं। रीवा से सतना, जबलपुर, सीधी और छतरपुर के लिए भी बस सेवा का प्रावधान है।
गांवों और छोटे शहरों पर भी फोकस
सरकार के अनुसार इस योजना के जरिए शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों की परिवहन कनेक्टिविटी मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। सेवा का विस्तार आगे प्रदेश के अधिक हिस्सों तक करने की योजना है।
2005 में बंद हुआ था परिवहन निगम
मध्य प्रदेश में सरकारी बस परिवहन का इतिहास काफी पुराना है। राज्य में सड़क परिवहन निगम के बंद होने के बाद सरकारी बस सेवा का नियमित ढांचा समाप्त हो गया था।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के कार्यकाल में सड़क परिवहन निगम बंद हुआ था। इसके बाद प्रदेश में सार्वजनिक बस परिवहन मुख्य रूप से निजी ऑपरेटरों पर निर्भर रहा। अब करीब 21 साल बाद सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को नए मॉडल के साथ फिर विस्तार देने की पहल की है।
हालांकि नई व्यवस्था को पुराने अर्थों में पूरी तरह सरकारी बस संचालन कहना सही नहीं होगा। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
पहले साल 1,500 बसों का लक्ष्य
351 बसों से शुरुआत के बाद योजना को बड़े स्तर पर विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार पहले वर्ष में करीब 1,500 बसें संचालित करने की योजना है।
इसके बाद हर साल लगभग 2,500 से 3,000 बसें जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2031 तक प्रदेश में कुल 15 हजार बसों का संचालन करने की योजना बताई गई है।
इस विस्तार से भविष्य में अधिक जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों को बस नेटवर्क से जोड़ने की संभावना है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में बसों की संख्या और रूट चरणबद्ध तरीके से बढ़ाए जाएंगे।
बसों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बसों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी की गई है। इसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा और बस संचालन की निगरानी को बेहतर बनाना है।
बसों में कई तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
- CCTV कैमरे
- पैनिक बटन
- व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस
- पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम
- रियल टाइम लोकेशन मॉनिटरिंग
- कमांड-कंट्रोल सेंटर से निगरानी
इन सुविधाओं के जरिए बसों की लोकेशन और संचालन पर नजर रखी जाएगी। आपात स्थिति में पैनिक बटन के माध्यम से सहायता मांगने की सुविधा भी दी गई है।
ITMS से होगी बसों की रियल टाइम निगरानी
नई बस सेवा में इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम यानी ITMS का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके माध्यम से बसों की लोकेशन, संचालन और समयबद्धता की निगरानी की जाएगी।
बसों की निगरानी के लिए यात्री परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी सात सहायक कंपनियों में कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इससे परिवहन व्यवस्था की मॉनिटरिंग को केंद्रीकृत करने में मदद मिलेगी।
चालकों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
नई व्यवस्था में बस चालकों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्हें आधुनिक तकनीक और सुरक्षित यातायात व्यवस्था के अनुसार प्रशिक्षण देने की योजना है।
इंदौर और छिंदवाड़ा में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में क्षेत्रीय ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर तैयार किए जा रहे हैं। जिला स्तर पर भी 22 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई है।
PPP मॉडल से होगा बसों का संचालन
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इसमें निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी होगी।
सरकार के अनुसार निजी ऑपरेटरों के लिए पारदर्शी अनुबंध व्यवस्था और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी। विज्ञापन और कार्गो जैसी गैर-किराया आय के विकल्प भी इस मॉडल का हिस्सा होंगे।
इस मॉडल का उद्देश्य बस सेवा का विस्तार और संचालन दोनों को व्यवस्थित करना है। साथ ही आधुनिक डिपो और टर्मिनल सुविधाओं के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
नई बस सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को शहरों के बीच अतिरिक्त परिवहन विकल्प मिलेंगे। खास तौर पर उन रूटों पर कनेक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद है, जहां नियमित सार्वजनिक परिवहन की जरूरत अधिक है।
इंट्रासिटी बसें शहर के भीतर आवागमन को आसान बनाएंगी। वहीं इंटरसिटी बसें अलग-अलग शहरों के बीच यात्रा सुविधा उपलब्ध कराएंगी।
सरकार ने सेवा को सुरक्षित, आधुनिक और समयबद्ध बनाने के लिए तकनीकी निगरानी को योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। आने वाले चरणों में बसों और रूट की संख्या बढ़ने के साथ इसका दायरा भी बढ़ाया जाना है।
निष्कर्ष
MP में 351 बसें शुरू होने के साथ मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नए चरण में प्रवेश कर रही है। 25 सितंबर से सात शहरों में शुरू होने वाली मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में इंटरसिटी और इंट्रासिटी दोनों तरह की बसें शामिल हैं।
सरकार ने पहले चरण के बाद बसों की संख्या बढ़ाने और 2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य रखा है। ऐसे में इस योजना की आगे की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि नए रूट, संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

