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माया राजेश्वरन का कमाल, 17 साल की उम्र में WTA क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं

सानिया मिर्जा के बाद 17 साल की उम्र में डब्ल्यूटीए क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली युवा टेनिस खिलाड़ी माया — न्यूज़ क्रिटिक

भारतीय टेनिस को एक नई उम्मीद मिल गई है। 17 वर्षीय माया राजेश्वरन रेवती ने चेन्नई ओपन में शानदार प्रदर्शन करते हुए WTA क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। उन्होंने दूसरे दौर के मुकाबले में पोलैंड की खिलाड़ी वेरोनिका फाल्कोव्स्का को सीधे सेटों में हराया।

इस जीत के साथ माया ने भारतीय महिला टेनिस में खास उपलब्धि हासिल की है। वह सानिया मिर्जा के बाद WTA टूर स्तर के एकल मुकाबले के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उनकी इस सफलता से देश में महिला टेनिस को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

माया राजेश्वरन ने सीधे सेटों में दर्ज की जीत

चेन्नई ओपन के दूसरे दौर में माया राजेश्वरन का सामना पोलैंड की वेरोनिका फाल्कोव्स्का से हुआ। फाल्कोव्स्का की विश्व रैंकिंग 277 थी, जबकि माया उस समय 669वें स्थान पर थीं। रैंकिंग के अंतर के बावजूद भारतीय खिलाड़ी ने दबाव में शानदार खेल दिखाया।

माया ने मुकाबला 6-4 और 6-3 से अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने टूर्नामेंट के अंतिम आठ खिलाड़ियों में जगह बना ली। मुकाबले के दौरान दोनों खिलाड़ियों ने कई बार एक-दूसरे की सर्विस तोड़ी।

शुरुआत में माया को अपनी सर्विस संभालने में परेशानी हुई। हालांकि, उन्होंने जल्द ही खेल में वापसी की। पहले सेट में फाल्कोव्स्का ने 4-2 की बढ़त बना ली थी।

इसके बाद माया ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने जरूरी मौकों पर अंक हासिल किए और पहला सेट 6-4 से जीत लिया। दूसरे सेट में भी उन्होंने आक्रामक खेल जारी रखा। आखिरकार 6-3 से जीत दर्ज करके क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल किया।

सानिया मिर्जा के बाद हासिल की बड़ी उपलब्धि

माया की इस जीत को भारतीय महिला टेनिस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। WTA टूर स्तर के एकल मुकाबले में सानिया मिर्जा के बाद किसी भारतीय महिला ने लंबे समय तक क्वार्टर फाइनल में जगह नहीं बनाई थी।

सानिया मिर्जा ने फरवरी 2012 में पटाया ओपन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर यह उपलब्धि हासिल की थी। अब माया ने चेन्नई ओपन में शानदार प्रदर्शन करके इस उपलब्धि को दोहराया है।

सानिया भारतीय टेनिस इतिहास की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने एकल और युगल दोनों वर्गों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वह महिला युगल में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी भी रह चुकी हैं।

ऐसे में माया की उपलब्धि को सानिया के बाद भारतीय महिला टेनिस में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हालांकि, दोनों खिलाड़ियों के करियर और उपलब्धियों की तुलना करना अभी जल्दबाजी होगी। माया के सामने अभी लंबा सफर है।

पहले भी बड़े खिलाड़ियों को दे चुकी हैं चुनौती

चेन्नई ओपन में माया का प्रदर्शन केवल एक जीत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने इससे पहले भी मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ शानदार खेल दिखाया था।

दूसरे दौर से पहले उनका मुकाबला पोलैंड की कातार्जिना कावा से हुआ। कावा की विश्व रैंकिंग 115 थी। माया ने इस मुकाबले में भी अपनी क्षमता दिखाई और 6-4, 2-6, 7-6(5) से जीत दर्ज की।

यह मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण रहा। माया ने पहला सेट जीतने के बाद दूसरा सेट गंवा दिया। इसके बाद निर्णायक सेट में उन्हें कड़ी टक्कर मिली।

एक समय माया तीसरे सेट में 2-5 से पीछे चल रही थीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार अंक हासिल किए और मुकाबले को टाईब्रेक तक पहुंचाया। अंत में 7-6(5) से जीतकर उन्होंने टूर्नामेंट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

इस जीत ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। इसके बाद फाल्कोव्स्का के खिलाफ भी उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया।

17 साल की उम्र में पेशेवर टेनिस में बढ़ाया कदम

माया राजेश्वरन रेवती का जन्म 2009 में हुआ है। वह तमिलनाडु के कोयंबटूर से आती हैं। कम उम्र में ही उन्होंने जूनियर और पेशेवर टेनिस में अपनी प्रतिभा दिखाई है।

माया ने पिछले कुछ समय में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार हिस्सा लिया है। उन्होंने जूनियर स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही वह धीरे-धीरे पेशेवर टेनिस में अपनी जगह मजबूत कर रही हैं।

इस साल उन्होंने पुर्तगाल के लागोस में आयोजित ITF W35 प्रतियोगिता में अपना पहला पेशेवर एकल खिताब जीता था। खास बात यह रही कि उन्होंने क्वालीफायर के रूप में टूर्नामेंट में प्रवेश किया था।

माया ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी सेट गंवाए बिना खिताब अपने नाम किया। उन्होंने यूक्रेन की येलिजावेता कोटलीयर के साथ युगल खिताब भी जीता।

इस प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय टेनिस जगत का ध्यान उनकी ओर खींचा। अब चेन्नई ओपन में उनका प्रदर्शन उसी प्रगति का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

कोचिंग में बदलाव से भी मिली मदद

माया की प्रगति के पीछे उनकी मेहनत और प्रशिक्षण की अहम भूमिका रही है। उन्होंने स्पेन की राफा नडाल अकादमी में भी प्रशिक्षण लिया है। हाल ही में उन्होंने फ्रांस के कान क्षेत्र में स्थित एलीट टेनिस सेंटर में प्रशिक्षण शुरू किया।

प्रशिक्षण में बदलाव के साथ उनके खेल में भी सुधार देखने को मिला है। वह अब पेशेवर स्तर पर ज्यादा मुकाबले खेल रही हैं। इससे उन्हें अनुभवी खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का मौका मिल रहा है।

चेन्नई ओपन में लगातार दो मुकाबले जीतना उनके लिए अनुभव बढ़ाने वाला रहा। खासकर कड़े मुकाबले में वापसी करने से उनके मानसिक मजबूत होने का संकेत मिला।

हालांकि, उनकी सर्विस में अभी सुधार की गुंजाइश दिखाई देती है। फाल्कोव्स्का के खिलाफ मुकाबले में भी उन्हें सर्विस पर दबाव का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अहम मौकों पर बेहतर निर्णय लिए।

क्वार्टर फाइनल में अमेरिकी खिलाड़ी से मुकाबला

चेन्नई ओपन के क्वार्टर फाइनल में माया राजेश्वरन का सामना अमेरिका की रॉबिन मोंटगोमरी से होना है। मोंटगोमरी भी टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।

माया के लिए यह मुकाबला एक और बड़ी चुनौती होगा। उन्हें अपनी सर्विस और बेसलाइन खेल पर विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही, प्रतिद्वंद्वी को लगातार दबाव में रखने की रणनीति अपनानी होगी।

क्वार्टर फाइनल में जीत हासिल करने पर माया सेमीफाइनल में पहुंच जाएंगी। इससे उनका चेन्नई ओपन अभियान और भी यादगार बन सकता है।

हालांकि, इस स्तर पर हर मुकाबला कठिन होता है। सामने अनुभवी खिलाड़ी होने के कारण माया को धैर्य और निरंतरता बनाए रखनी होगी।

भारतीय महिला टेनिस के लिए क्यों अहम है यह सफलता?

भारतीय महिला टेनिस को पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय एकल मुकाबलों में लगातार सफलता की जरूरत महसूस हुई है। सानिया मिर्जा के बाद कई खिलाड़ियों ने पेशेवर सर्किट पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश की है।

माया की सफलता इस दिशा में सकारात्मक संकेत देती है। उनकी उम्र अभी केवल 17 साल है। ऐसे में उनके पास अपने खेल को बेहतर बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव हासिल करने का पर्याप्त समय है।

इस उपलब्धि से युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिल सकती है। खासकर उन खिलाड़ियों को, जो सीमित संसाधनों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सपना देखते हैं।

हालांकि, एक टूर्नामेंट का प्रदर्शन किसी खिलाड़ी के पूरे करियर का आकलन नहीं करता। माया को लगातार अच्छे परिणाम देने होंगे। उन्हें फिटनेस, तकनीक और मानसिक मजबूती पर भी काम जारी रखना होगा।

निष्कर्ष

माया राजेश्वरन ने 17 साल की उम्र में चेन्नई ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर भारतीय महिला टेनिस में नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने पोलैंड की वेरोनिका फाल्कोव्स्का को 6-4, 6-3 से हराकर यह उपलब्धि हासिल की। सानिया मिर्जा के बाद WTA टूर स्तर के एकल क्वार्टर फाइनल में पहुंचना उनके करियर का बड़ा पड़ाव है।

अब सभी की नजरें माया के अगले मुकाबले पर रहेंगी। यदि वह इसी आत्मविश्वास और प्रदर्शन को जारी रखती हैं, तो भारतीय टेनिस को भविष्य में एक मजबूत खिलाड़ी मिल सकती है। फिलहाल, चेन्नई में उनकी यह उपलब्धि देश के खेल प्रेमियों के लिए गर्व का विषय बन गई है।

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