बिहार में डिजिटल शिक्षा की नई पहल, CM सम्राट चौधरी ने लॉन्च किया ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को विद्यार्थियों के लिए डिजिटल शिक्षा की दिशा में बड़ी पहल करते हुए ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप लॉन्च किया। इस प्लेटफॉर्म के जरिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को 24 घंटे पढ़ाई से जुड़ी सहायता और शिक्षक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की योजना है।
सरकार के मुताबिक, शुरुआती चरण में यह सुविधा राज्य के 38 जिलों के 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 3 लाख विद्यार्थियों को मिलेगी। ऐप में लाइव शिक्षक सहायता के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए डिजिटल और AI आधारित सुविधाएं भी शामिल की गई हैं।
CM सम्राट चौधरी ने लॉन्च किया बिहार विद्या साथी ऐप
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना स्थित लोक सेवक आवास के ‘संकल्प’ सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘बिहार विद्या साथी’ का शुभारंभ किया। यह 24×7 और 1:1 इंटरैक्टिव डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्याओं का तुरंत समाधान उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने इस पहल को बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक की मदद से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता मिल सके।
इस प्लेटफॉर्म की खासियत यह है कि विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे और ऑनलाइन शिक्षक से सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
3 लाख विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ
‘बिहार विद्या साथी’ ऐप के पहले चरण में करीब 3 लाख विद्यार्थियों को जोड़े जाने की योजना है। ये विद्यार्थी बिहार के 38 जिलों में संचालित 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों से जुड़े हैं।
शुरुआत में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को इस डिजिटल सुविधा का लाभ मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ-साथ उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता मिल सकेगी।
सरकार का कहना है कि भविष्य में इस तरह की डिजिटल सुविधा का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
24 घंटे उपलब्ध रहेंगे ऑनलाइन शिक्षक
ऐप की सबसे महत्वपूर्ण सुविधा 24×7 लाइव शिक्षक सहायता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान किसी विषय या अध्याय को समझने में परेशानी आती है तो वे ऑनलाइन शिक्षक से सीधे सहायता ले सकेंगे।
रिपोर्टों के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म से करीब 75 हजार शिक्षकों को जोड़े जाने की योजना है। इससे विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों में जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
खास बात यह है कि सहायता केवल निर्धारित स्कूल समय तक सीमित नहीं रहेगी। विद्यार्थी अपनी जरूरत के अनुसार दिन या रात में भी शैक्षणिक मदद लेने में सक्षम होंगे।
वन-टू-वन ट्यूटर सपोर्ट से क्या बदलेगा?
पारंपरिक ऑनलाइन कक्षाओं में शिक्षक एक साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। ऐसे में हर विद्यार्थी के व्यक्तिगत सवाल का जवाब देना हमेशा संभव नहीं होता।
‘बिहार विद्या साथी’ में 1:1 इंटरैक्टिव सहायता का मॉडल विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन देने पर केंद्रित है। इससे किसी खास प्रश्न, अध्याय या अवधारणा को समझने में छात्र सीधे शिक्षक की मदद ले सकता है।
यह सुविधा खास तौर पर उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकती है जिन्हें कक्षा में किसी विषय को समझने में अतिरिक्त समय या व्यक्तिगत सहायता की जरूरत होती है।
JEE और NEET की तैयारी में भी मदद
‘बिहार विद्या साथी’ को केवल स्कूली पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा गया है। ऐप में JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराने की भी जानकारी सामने आई है।
इससे कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी अतिरिक्त सामग्री मिल सकती है।
बिहार में पहले से मॉडल स्कूलों के जरिए मुफ्त JEE और NEET कोचिंग की पहल चल रही है। राज्य के 155 मॉडल स्कूलों में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए इस तरह की कोचिंग का विस्तार किया गया है।
AI तकनीक भी बनेगी पढ़ाई का हिस्सा
डिजिटल शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए ऐप में AI आधारित सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। इसका इस्तेमाल विद्यार्थियों को सवालों के जवाब और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने में किया जा सकता है।
AI आधारित टूल विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान तुरंत जानकारी हासिल करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, जटिल विषयों और व्यक्तिगत शैक्षणिक जरूरतों के लिए शिक्षक मार्गदर्शन की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
इस तरह ऐप में तकनीक और मानवीय शिक्षक सहायता को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।
ग्रामीण और दूरदराज के छात्रों को फायदा
बिहार जैसे बड़े राज्य में सभी विद्यार्थियों के लिए समान स्तर की अतिरिक्त कोचिंग या व्यक्तिगत शिक्षक सहायता उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है। डिजिटल प्लेटफॉर्म इस अंतर को कम करने का माध्यम बन सकता है।
मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को ऐप के जरिए विशेषज्ञों और शिक्षकों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे ऐसे छात्रों को भी मदद मिल सकती है जो निजी कोचिंग या अतिरिक्त ट्यूशन का खर्च नहीं उठा सकते।
हालांकि, डिजिटल शिक्षा की सफलता के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्मार्टफोन या अन्य डिवाइस की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी।
700 मॉडल स्कूलों से हुई शुरुआत
‘बिहार विद्या साथी’ की शुरुआत राज्य के 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों से की गई है। इन स्कूलों का नेटवर्क बिहार के सभी 38 जिलों तक फैला हुआ है।
सरकार के मुताबिक, इन स्कूलों से जुड़े करीब 3 लाख विद्यार्थियों को इस प्लेटफॉर्म का सीधा लाभ मिलेगा। इससे राज्य में डिजिटल शिक्षा के लिए एक बड़ा आधार तैयार हो सकता है।
भविष्य में यदि इस मॉडल को सरकारी और संबद्ध स्कूलों तक विस्तार दिया जाता है तो इसका लाभ और अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच सकता है।
विद्यार्थियों के लिए आसान होगी पढ़ाई
स्कूल में पढ़ाई के दौरान कई बार विद्यार्थियों को किसी विषय या प्रश्न को समझने में परेशानी होती है। ऐसी स्थिति में अगले दिन शिक्षक से सवाल पूछने तक इंतजार करना पड़ सकता है।
बिहार विद्या साथी ऐप इसी समस्या को कम करने की कोशिश करता है। विद्यार्थी जब चाहें, जहां से चाहें, पढ़ाई से संबंधित सहायता लेने के लिए प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकेंगे।
इससे पढ़ाई में आने वाली छोटी-छोटी दिक्कतों का समाधान उसी समय मिलने की संभावना बढ़ेगी।
बिहार में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा
बिहार सरकार पिछले कुछ समय से शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दे रही है। ‘बिहार विद्या साथी’ इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
इससे पहले राज्य में ‘बिहार स्कूल लाइव क्लासेज’ जैसी पहल भी शुरू की गई है, जिसके जरिए विद्यार्थियों तक ऑनलाइन शिक्षण सामग्री और कक्षाएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
अब विद्या साथी ऐप के जरिए लाइव शिक्षक सहायता, डिजिटल सामग्री और AI आधारित सुविधाओं को एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
छात्रों को मिलेंगे ये प्रमुख फायदे
‘बिहार विद्या साथी’ ऐप की प्रमुख सुविधाओं को इस तरह समझा जा सकता है:
- 24×7 ऑनलाइन शैक्षणिक सहायता।
- 1:1 लाइव शिक्षक से मार्गदर्शन।
- कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के लिए सहायता।
- पढ़ाई से जुड़े सवालों का समाधान।
- करीब 75 हजार शिक्षकों से जुड़ने की सुविधा।
- JEE और NEET की तैयारी के लिए डिजिटल सामग्री।
- AI आधारित शैक्षणिक सहायता।
- 38 जिलों के 700 मॉडल स्कूलों के विद्यार्थियों को शुरुआती लाभ।
- करीब 3 लाख छात्रों को सीधा फायदा।
सरकार का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऐप के लॉन्च के दौरान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सही मार्गदर्शन को इस पहल का प्रमुख उद्देश्य बताया। सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई में बेहतर सहायता दी जा सकती है।
खास तौर पर उन छात्रों के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है जिन्हें स्कूल के बाद किसी विषय में अतिरिक्त मदद की आवश्यकता होती है। ऑनलाइन शिक्षक और डिजिटल संसाधन उन्हें अपनी गति से पढ़ने में मदद कर सकते हैं।
आगे पूरे बिहार में विस्तार की तैयारी
फिलहाल ‘बिहार विद्या साथी’ को 700 मॉडल स्कूलों में लागू किया गया है। सरकार की योजना भविष्य में इसे राज्य के अन्य सरकारी और संबद्ध स्कूलों तक विस्तारित करने की बताई गई है।
यदि इसका विस्तार बड़े स्तर पर होता है तो बिहार के लाखों विद्यार्थियों को एक समान डिजिटल शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
हालांकि, इसके लिए तकनीकी ढांचे, इंटरनेट सुविधा और शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।
डिजिटल शिक्षा के साथ चुनौतियां भी
ऐप की शुरुआत के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि विद्यार्थियों को इसका वास्तविक और नियमित लाभ कितना मिलता है। केवल ऐप उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों और शिक्षकों दोनों को इसका प्रभावी इस्तेमाल भी करना होगा।
ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिवाइस की उपलब्धता जैसी समस्याओं को दूर करना भी जरूरी होगा। इसके अलावा ऑनलाइन शिक्षक सहायता की गुणवत्ता और समय पर जवाब मिलने की व्यवस्था पर भी लगातार निगरानी करनी होगी।
अगर इन चुनौतियों का समाधान किया जाता है तो यह पहल बिहार की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
विद्यार्थियों के लिए नई उम्मीद
बिहार विद्या साथी ऐप की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब देशभर में शिक्षा तेजी से डिजिटल माध्यमों की ओर बढ़ रही है। ऑनलाइन क्लास, डिजिटल कंटेंट, AI और व्यक्तिगत ट्यूटर जैसी सुविधाएं विद्यार्थियों की पढ़ाई का हिस्सा बनती जा रही हैं।
बिहार में इस मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने की कोशिश राज्य के छात्रों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को इससे अतिरिक्त संसाधन मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 24 अगस्त 2026 को ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप लॉन्च कर राज्य में डिजिटल शिक्षा को नई दिशा देने की पहल की है। शुरुआती चरण में 38 जिलों के 700 मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 3 लाख विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।
ऐप के जरिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को 24 घंटे ऑनलाइन शिक्षक सहायता, 1:1 ट्यूटर सपोर्ट, डिजिटल अध्ययन सामग्री और AI आधारित सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
बिहार विद्या साथी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह सुविधा विद्यार्थियों तक कितनी आसानी से पहुंचती है और शिक्षक सहायता कितनी प्रभावी रहती है। अगर तकनीकी और कनेक्टिविटी से जुड़ी चुनौतियों को दूर किया जाता है, तो यह पहल बिहार में डिजिटल और व्यक्तिगत शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

