MP में आज से 23,000 सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, शहरों में कचरा संकट
मध्य प्रदेश में सफाई व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश के 23 हजार से अधिक सफाई कर्मचारियों ने बुधवार, 4 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। MP सफाई कर्मचारी हड़ताल का असर राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में दिखाई देने लगा है।
कर्मचारियों ने नियमितीकरण, 25 हजार रुपये मासिक वेतन और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि लंबे समय से काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी नौकरी का लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं, दीपावली से ठीक पहले शुरू हुए इस आंदोलन ने नगर निगम और नगरीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
23 हजार से ज्यादा सफाई कर्मचारी हड़ताल पर
मध्य प्रदेश के अलग-अलग नगरीय निकायों में काम करने वाले 23 हजार से अधिक सफाई कर्मचारियों ने काम बंद करने का फैसला लिया है। इस आंदोलन में नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस ट्रेड यूनियन (7262) ने इस प्रदेशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मगन झांझोट ने सरकार को पहले ही आंदोलन की चेतावनी दी थी।
कर्मचारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों और सरकार के सामने आवाज उठा रहे हैं। हालांकि, अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
इस बार कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुना है। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस फैसला नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।
भोपाल में सबसे ज्यादा दिख सकता है असर
इस हड़ताल का सबसे बड़ा असर राजधानी भोपाल में देखने को मिल सकता है। भोपाल नगर निगम में करीब 13 हजार सफाई मित्र कार्यरत हैं। इनमें से बड़ी संख्या में कर्मचारी आंदोलन में शामिल हैं।
मंगलवार को ही लगभग 5 हजार सफाई कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे थे। इसके बाद शहर की सफाई व्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा।
बुधवार को हड़ताल शुरू होने के बाद कई इलाकों में कचरा उठाने और सड़कों की सफाई का काम प्रभावित हुआ। न्यू मार्केट और चौक बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में कचरा जमा होने की खबरें सामने आईं।
दीपावली के कारण बाजारों में पहले से भीड़ बढ़ रही है। दुकानदार और ग्राहक बड़ी संख्या में खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में कचरा नहीं उठने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
क्या हैं सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
सफाई कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवा शर्तों और वेतन में सुधार की मांग कर रहे हैं। इस बार आंदोलन के दौरान भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- संविदा और अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
- सभी सफाई कर्मचारियों का मासिक वेतन 25 हजार रुपये किया जाए।
- सफाई कार्य में ठेका प्रथा समाप्त की जाए।
- समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए।
- पुरानी पेंशन योजना या सुरक्षित पेंशन व्यवस्था लागू की जाए।
- कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
- नियमित स्वास्थ्य जांच और जोखिम संबंधी सुविधाएं दी जाएं।
- मृत कर्मचारियों के परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति मिले।
- कर्मचारियों को समय पर हर महीने वेतन दिया जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि सफाई का काम स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद उन्हें कई जरूरी सुविधाएं नहीं मिलतीं।
25 हजार रुपये वेतन की मांग क्यों उठी?
सफाई कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग मासिक वेतन बढ़ाकर 25 हजार रुपये करना है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि मौजूदा आमदनी में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
संगठन अध्यक्ष मगन झांझोट के अनुसार, कई कर्मचारी लंबे समय से काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त वेतन और नौकरी की सुरक्षा नहीं मिल रही है।
उनका कहना है कि कई कर्मचारी 10 से 15 साल तक सेवा देने के बाद भी स्थायी कर्मचारी नहीं बन पाए हैं। कुछ कर्मचारियों को सीमित कार्य अवधि के आधार पर भुगतान मिलता है।
ऐसे में बच्चों की पढ़ाई, राशन, मकान और स्वास्थ्य संबंधी खर्च पूरे करना चुनौती बन जाता है। त्योहारों के दौरान भी परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव रहता है।
इसी वजह से कर्मचारी वेतन बढ़ाने के साथ स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
शाहजहांनी पार्क में 57 जिलों के कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
हड़ताल से एक दिन पहले यानी 3 नवंबर को भोपाल के शाहजहांनी पार्क में प्रदेशव्यापी प्रदर्शन हुआ था। इसमें मध्य प्रदेश के 57 जिलों से सफाई कर्मचारी और संगठन के पदाधिकारी पहुंचे थे।
अखिल भारत सफाई मजदूर कांग्रेस ट्रेड यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर धरना दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मगन झांझोट ने इसे सरकार के लिए अंतिम ज्ञापन बताया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को उठा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। सरकार को उनकी समस्याओं पर ठोस निर्णय लेना होगा।
इससे पहले भी कर्मचारी नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। हालांकि, इस बार आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया गया है।
दीपावली से पहले बढ़ी सफाई व्यवस्था की चिंता
मध्य प्रदेश में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ऐसे समय शुरू हुई है, जब दीपावली की तैयारियां चल रही हैं। बाजारों और रिहायशी इलाकों में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा कचरा निकलता है।
भोपाल के न्यू मार्केट, चौक बाजार और अन्य प्रमुख बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ रही है। ऐसे में नियमित सफाई और कचरा संग्रहण जरूरी है।
अगर हड़ताल लंबी चलती है तो कई इलाकों में कचरा जमा होने की समस्या बढ़ सकती है। इससे बदबू, गंदगी और मच्छरों के पनपने का खतरा भी बढ़ सकता है।
हालांकि, इसका वास्तविक असर अलग-अलग नगर निकायों में कर्मचारियों की भागीदारी और प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
इस बीच नागरिकों को भी कचरा निर्धारित स्थानों पर डालने और सार्वजनिक जगहों पर गंदगी नहीं फैलाने की जरूरत है।
सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होगी बातचीत
हड़ताल के बीच अब सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर है। कर्मचारियों की मांगों को लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विभाग के प्रमुख सचिव मनोज दुबे के साथ वार्ता प्रस्तावित है।
कर्मचारी प्रतिनिधियों को उम्मीद है कि बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। वहीं, संगठन ने स्पष्ट किया है कि केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
सरकार के सामने फिलहाल दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती कर्मचारियों की लंबित मांगों पर निर्णय लेने की है। दूसरी चुनौती प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था बनाए रखने की है।
अगर बातचीत में कोई समाधान निकलता है तो हड़ताल समाप्त होने का रास्ता खुल सकता है। अन्यथा कर्मचारियों के आंदोलन को आगे जारी रखने की संभावना है।
भोपाल नगर निगम ने बनाई वैकल्पिक सफाई व्यवस्था
हड़ताल की आशंका को देखते हुए भोपाल नगर निगम ने सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष अभियान की तैयारी की थी।
इसके तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग वार्डों में सफाई कार्य की निगरानी करने के निर्देश दिए गए। कचरा और मलबा हटाने के लिए डंपर, जेसीबी और उपलब्ध मशीनों के इस्तेमाल की योजना बनाई गई।
इसके अलावा, शहर में शाम के समय फॉगिंग अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए। इसका उद्देश्य मच्छरों और उनसे फैलने वाली बीमारियों के खतरे को कम करना है।
डोर-टू-डोर कचरा वाहनों के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने की भी योजना बनाई गई है। लोगों को घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी जा रही है।
हालांकि, नियमित सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति में इन व्यवस्थाओं से पूरे शहर को कितनी राहत मिलेगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
आम नागरिकों पर क्या पड़ेगा असर?
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। खासतौर पर उन इलाकों में परेशानी बढ़ सकती है, जहां नियमित कचरा संग्रहण और सफाई नहीं हो पाएगी।
इस स्थिति में नागरिकों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।
- घर का कचरा खुले स्थानों पर नहीं फेंकें।
- गीले और सूखे कचरे को अलग रखें।
- सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा नहीं होने दें।
- घरों और आसपास पानी जमा न होने दें।
- नगर निगम की ओर से जारी सफाई संबंधी सूचनाओं पर ध्यान दें।
इसके अलावा, दुकानदारों को भी अपने प्रतिष्ठानों के आसपास सफाई बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में MP सफाई कर्मचारी हड़ताल शुरू होने से प्रदेश के नगरीय निकायों के सामने सफाई व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। 23 हजार से अधिक कर्मचारी नियमितीकरण, 25 हजार रुपये मासिक वेतन और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
दीपावली से पहले शुरू हुए इस आंदोलन का असर भोपाल समेत दूसरे शहरों में भी दिखाई दे सकता है। अब सबकी नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि कर्मचारियों की मांगों पर सहमति बनती है या हड़ताल आगे भी जारी रहती है।

