अमित शाह का पलटवार: बीजेपी का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू, राहुल पर साधा निशाना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। सोमवार, 2 नवंबर को उन्होंने हैदराबाद में बीजेपी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत पदयात्रा का नेतृत्व किया। इसके बाद आयोजित जनसभा में उन्होंने विपक्ष के आरोपों और राहुल गांधी की मॉक पार्लियामेंट पर सवाल उठाए।
अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी असली संसद में कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। उनके मुताबिक, राहुल को कम से कम मॉक पार्लियामेंट में प्रधानमंत्री बन जाना चाहिए था। शाह का यह बयान विपक्ष की हालिया गतिविधियों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है।
हैदराबाद से बीजेपी ने अभियान को दी नई धार
बीजेपी ने विपक्ष के SIR विरोध और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों के जवाब में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है। पार्टी इस अभियान के जरिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपना पक्ष जनता तक पहुंचाना चाहती है।
2 नवंबर को हैदराबाद में अमित शाह ने इस अभियान के तहत पदयात्रा निकाली। इसमें बीजेपी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। पदयात्रा के बाद आयोजित जनसभा में शाह ने कांग्रेस की राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा।
बीजेपी का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। पार्टी के अनुसार, इस प्रक्रिया से मृत, स्थानांतरित और अपात्र मतदाताओं के नामों की जांच हो सकेगी। वहीं, विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है।
राहुल गांधी की मॉक पार्लियामेंट पर अमित शाह का तंज
अमित शाह ने अपने भाषण में राहुल गांधी की मॉक पार्लियामेंट का भी जिक्र किया। विपक्ष ने हाल ही में दिल्ली में प्रतीकात्मक संसद का आयोजन किया था। इस आयोजन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की मांग से जुड़ा प्रस्ताव भी चर्चा में रहा।
इसी को लेकर शाह ने राहुल गांधी पर व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इस नकली संसद में प्रधानमंत्री बन जाना चाहिए था। शाह के मुताबिक, असली संसद में राहुल कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे।
उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि मॉक पार्लियामेंट में प्रधानमंत्री बनने से सोनिया गांधी को कुछ संतोष मिल सकता था। शाह के इस बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी पर उनके राजनीतिक हमले के रूप में देखा जा रहा है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब संसद और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच टकराव बढ़ा हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
SIR को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR इस समय राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं, बीजेपी SIR को जरूरी प्रक्रिया बता रही है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम होने चाहिए। इसी आधार पर बीजेपी विपक्ष के विरोध को गलत बता रही है।
अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस SIR का विरोध करके घुसपैठियों को बचाना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग मतदाता सूची में गलत तरीके से शामिल हैं। शाह ने कहा कि बीजेपी ऐसे नामों को हटाने के लिए अपना अभियान जारी रखेगी।
हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा भी महत्वपूर्ण है। किसी भी नाम को हटाने से पहले संबंधित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
राहुल गांधी को संसद का विशेष सत्र बुलाने की चुनौती
अमित शाह ने अपने भाषण में राहुल गांधी को संसद में चर्चा करने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार SIR, EVM और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है।
शाह ने राहुल गांधी से कहा कि वे इन मुद्दों पर संसद में बहस करें। उनके मुताबिक, विपक्ष संसद में चर्चा करने के बजाय विरोध और प्रदर्शन का रास्ता अपना रहा है।
गृह मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने नहीं देते। उन्होंने कहा कि विपक्ष को आरोप लगाने के बजाय सदन में अपनी बात रखनी चाहिए।
शाह ने दावा किया कि संसद में चर्चा होने पर सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर बहस के लिए तैयार है।
इस बयान के जरिए बीजेपी ने विपक्ष को संसद के भीतर चर्चा की चुनौती दी है। अब देखना होगा कि SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों के बीच आगे किस तरह की राजनीतिक बातचीत होती है।
EVM को लेकर भी कांग्रेस पर साधा निशाना
अमित शाह ने अपने संबोधन में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर भी जवाब दिया। विपक्षी नेता कई चुनावों में मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
शाह ने सवाल किया कि अगर EVM में गड़बड़ी है, तो कांग्रेस तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में चुनाव कैसे जीत पाई? उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर राजनीतिक दल जनता के समर्थन का श्रेय लेते हैं। लेकिन हारने पर EVM को जिम्मेदार ठहराते हैं।
गृह मंत्री ने कांग्रेस के इस रुख की आलोचना की। उनका कहना था कि चुनावी नतीजों को लेकर अलग-अलग तर्क देना उचित नहीं है।
दूसरी ओर, विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है। इसलिए EVM और SIR दोनों मुद्दों पर राजनीतिक बहस जारी है।
राहुल गांधी की राजनीतिक कार्यशैली पर भी टिप्पणी
अमित शाह ने राहुल गांधी की चुनावी गतिविधियों और राजनीतिक कार्यशैली पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लंबे समय तक जनता के बीच सक्रिय नहीं रहते।
शाह ने कहा कि केवल कुछ महीने देश में रहकर और फिर विदेश जाकर चुनाव नहीं जीते जा सकते। उनके अनुसार, किसी भी राजनीतिक नेता को जनता के बीच लगातार काम करना चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे लोगों की समस्याओं को समझें और उनके समाधान के लिए काम करें। शाह ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए जनता के साथ जुड़ना जरूरी है।
इसके अलावा, उन्होंने राहुल गांधी के संविधान संबंधी बयानों पर भी सवाल उठाए। शाह ने आरोप लगाया कि राहुल हाथ में संविधान लेकर चलते हैं, लेकिन संसद की कार्यवाही में बाधा डालते हैं।
ये सभी टिप्पणियां अमित शाह के राजनीतिक भाषण का हिस्सा थीं। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर जवाब दिया जाता रहा है।
बीजेपी का अभियान 5 नवंबर तक जारी रहेगा
बीजेपी का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान देशभर में चलाया जा रहा है। इस अभियान का पहला चरण 22 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक निर्धारित किया गया है।
पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रमों के जरिए SIR और चुनावी प्रक्रिया पर बीजेपी का पक्ष रख रहे हैं। हैदराबाद की पदयात्रा भी इसी अभियान का हिस्सा थी।
बीजेपी इस मुहिम के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और मतदाता सूची के पुनरीक्षण के समर्थन में जनसंपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सही मतदाता सूची का होना जरूरी है।
वहीं, विपक्ष इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रह सकता है।
निष्कर्ष
अमित शाह ने हैदराबाद में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मॉक पार्लियामेंट को लेकर राहुल गांधी पर तंज कसा और कहा कि वे असली संसद में कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे।
इसके साथ ही शाह ने SIR, EVM और घुसपैठ के मुद्दों पर विपक्ष को घेरा। उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलाकर इन विषयों पर चर्चा करने की चुनौती भी दी। दूसरी ओर, विपक्ष मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहा है।
फिलहाल SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर बीजेपी तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।

