बरेली में जेपी नड्डा का कांग्रेस पर हमला, चुनाव आयोग को लेकर कही बड़ी बात
उत्तर प्रदेश के बरेली में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी की पदयात्रा से पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में हार मिलने के बाद कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग पर सवाल उठाती है। नड्डा ने राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की ओर से उठाए जा रहे वोट चोरी और एसआईआर के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी।
बरेली में भाजपा की ओर से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत पदयात्रा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। पदयात्रा से पहले हुई जनसभा में नड्डा ने विपक्ष की चुनावी रणनीति और निर्वाचन आयोग को लेकर दिए जा रहे बयानों पर सवाल उठाए।
चुनाव में हार के बाद EC पर सवाल उठाने का आरोप
जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल चुनाव में हारने के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगते हैं। उनके मुताबिक, जब विपक्ष चुनाव जीतता है तो उसे ईवीएम और निर्वाचन आयोग से कोई परेशानी नहीं होती। हालांकि, चुनाव में हार मिलने पर यही संस्थाएं उसके निशाने पर आ जाती हैं।
नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी राजनीतिक हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव परिणाम स्वीकार करना जरूरी है। यदि किसी राजनीतिक दल को चुनाव प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी दिखाई देती है, तो उसे उचित मंच पर अपनी शिकायत और सबूत रखने चाहिए।
उन्होंने विपक्ष के रवैये पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आयोग को बेईमान बताने से चुनावी हार की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। नड्डा ने इस मुद्दे को संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए विपक्ष की आलोचना की।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर साधा निशाना
जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एसआईआर और वोट चोरी के मुद्दे को उठाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता निर्वाचन आयोग के प्रति लोगों का भरोसा कमजोर करने में लगे हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाने से पहले अपने आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण सामने रखने चाहिए। नड्डा के मुताबिक, केवल बयान देने से किसी चुनावी प्रक्रिया को गलत साबित नहीं किया जा सकता।
नड्डा ने कांग्रेस के पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में निर्वाचन आयोग से जुड़े पदों पर नियुक्तियों को लेकर अलग व्यवस्था रही है। इसके बावजूद आज कांग्रेस मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रही है।
SIR और मतदाता सूची का मुद्दा बना राजनीतिक बहस का केंद्र
इन दिनों विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की जांच और संशोधन किया जाता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद गलतियों को ठीक करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है।
भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची में मौजूद डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान जरूरी है। पार्टी के नेताओं का आरोप है कि विपक्ष इस प्रक्रिया का विरोध राजनीतिक कारणों से कर रहा है। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि एसआईआर के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम भी हट सकते हैं।
इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है। विपक्ष चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, भाजपा एसआईआर को मतदाता सूची को दुरुस्त करने की जरूरी प्रक्रिया बता रही है।
नड्डा ने अपने भाषण में इसी विवाद का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि एसआईआर का मुद्दा उठाकर राहुल गांधी ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की चुनावी व्यवस्था में घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं के नाम नहीं रहने चाहिए।
बांग्लादेशी घुसपैठियों और फर्जी वोटों को लेकर लगाए आरोप
अपने संबोधन में जेपी नड्डा ने बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाते रहे हैं। अब जब मतदाता सूची की जांच के दौरान ऐसे नामों को हटाने की बात हो रही है, तो विपक्ष इसका विरोध कर रहा है।
नड्डा ने कहा कि देश की मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम होने चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहा है। हालांकि, उनके भाषण में लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं। इन दावों की पुष्टि संबंधित मामलों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही की जा सकती है।
उन्होंने गुरुग्राम और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का जिक्र किया। नड्डा ने दावा किया कि जांच के दौरान कुछ ऐसे नाम सामने आए, जिनकी पात्रता पर सवाल थे। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की जांच का उद्देश्य ऐसी प्रविष्टियों को ठीक करना है।
भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा
बरेली में भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत पदयात्रा आयोजित की। इस कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने किया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत पार्टी के कई नेता भी इसमें शामिल हुए।
पार्टी की ओर से इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने का दावा किया गया। कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं ने विपक्ष के चुनाव आयोग संबंधी आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
यह अभियान केवल बरेली तक सीमित नहीं है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। पार्टी इन कार्यक्रमों के जरिए विपक्ष के वोट चोरी संबंधी आरोपों का राजनीतिक जवाब दे रही है।
विपक्ष और भाजपा के बीच बढ़ी बयानबाजी
चुनाव आयोग, ईवीएम और मतदाता सूची का मुद्दा अब भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेता चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, भाजपा इन आरोपों को निराधार बताते हुए विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगा रही है।
इससे पहले भी राहुल गांधी कई मौकों पर वोट चोरी और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा चुके हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों का जवाब पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, भाजपा नेताओं का तर्क है कि आरोप लगाने के बजाय संबंधित पक्षों को प्रमाण और शिकायतें निर्वाचन आयोग के सामने रखनी चाहिए।
इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर आयोग के आधिकारिक जवाब तथा उपलब्ध दस्तावेज ही तथ्यों की स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
आगे क्या होगा?
बरेली में जेपी नड्डा के बयान के बाद चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इन मुद्दों पर अपनी आपत्तियां उठाते रह सकते हैं। वहीं, भाजपा अपनी पदयात्राओं और जनसभाओं के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश करेगी।
आने वाले दिनों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक दलों के बयान महत्वपूर्ण रहेंगे। इस दौरान यह देखना भी जरूरी होगा कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में कौन से दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करता है। साथ ही, निर्वाचन आयोग इन शिकायतों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है।
निष्कर्ष
बरेली में जेपी नड्डा का कांग्रेस पर हमला चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक विवाद का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव में हार के बाद निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है। साथ ही, उन्होंने राहुल गांधी और विपक्ष की एसआईआर संबंधी आपत्तियों पर भी निशाना साधा।
दूसरी ओर, विपक्ष मतदाता सूची की जांच में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर रहा है। ऐसे में इस विवाद का निष्पक्ष आकलन आरोपों के बजाय आधिकारिक तथ्यों, दस्तावेजों और निर्वाचन आयोग के जवाब के आधार पर होना चाहिए।

