Headlines

महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की रायपुर CBI कोर्ट में पेशी, कस्टोडियल रिमांड मांगेगी एजेंसी

महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की रायपुर सीबीआई विशेष न्यायालय में पेशी - न्यूज़ क्रिटिक

महादेव ऐप केस में आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को बुधवार, 4 नवंबर 2026 को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा। ओमान से भारत लाए जाने के बाद सीबीआई उसे अपनी सुरक्षा में रायपुर लेकर पहुंची है। अब जांच एजेंसी उससे पूछताछ के लिए कस्टोडियल रिमांड मांग सकती है। इस पेशी पर जांच एजेंसियों के साथ-साथ मामले से जुड़े लोगों की भी नजर है।

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप से जुड़े मामले में सौरभ चंद्राकर प्रमुख आरोपियों में शामिल है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए बड़े स्तर पर ऑनलाइन सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके अलावा, सट्टे से मिलने वाली रकम को अलग-अलग बैंक खातों और अन्य माध्यमों से विदेश भेजा जाता था। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।

रायपुर की विशेष CBI अदालत में आज होगी पेशी

सौरभ चंद्राकर को मंगलवार शाम सीबीआई की टीम रायपुर लेकर पहुंची थी। उसे निजी विमान से दिल्ली से छत्तीसगढ़ की राजधानी लाया गया। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसे सीबीआई कार्यालय ले जाया गया। बुधवार को उसे विशेष सीबीआई अदालत के सामने पेश किया जाना है।

इससे पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 तक या उससे पहले रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाए। इसी आदेश के आधार पर एजेंसी उसे दिल्ली से रायपुर लेकर आई।

अब रायपुर की अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। सीबीआई आरोपी से मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ करना चाहती है। इसके लिए एजेंसी कस्टोडियल रिमांड की मांग कर सकती है। अदालत इस मांग पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्णय लेगी।

दिल्ली कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड पर हुई थी सुनवाई

सौरभ चंद्राकर को भारत लाने के बाद सीबीआई ने सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया था। एजेंसी ने उसे रायपुर ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड मांगी थी। अदालत ने सीबीआई की अर्जी स्वीकार करते हुए दो दिन की अनुमति दे दी।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने प्रत्यर्पण से जुड़ी शर्तों पर सवाल उठाए थे। सौरभ के वकील की दलील थी कि ओमान में भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध और अलग-अलग जांच एजेंसियों के मामलों को लेकर कानूनी सवाल मौजूद हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि प्रत्यर्पण की अनुमति जिन मामलों के आधार पर मिली है, कार्रवाई उन्हीं के दायरे में होनी चाहिए।

दूसरी ओर, सीबीआई ने आरोपी के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत से जारी गैर-जमानती वारंट का हवाला दिया। एजेंसी ने कहा कि उसे संबंधित अदालत के सामने पेश करना जरूरी है। दिल्ली की अदालत ने उस समय ट्रांजिट रिमांड के सवाल पर फैसला दिया था। प्रत्यर्पण की शर्तों और आगे की कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर संबंधित अदालत में विचार हो सकता है।

ओमान से भारत लाया गया सौरभ चंद्राकर

सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाने की प्रक्रिया जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण रही है। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था। इसके आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। इसके बाद भारत की ओर से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सौरभ को 1 नवंबर 2026 को भारत लाया गया था। इसके बाद उसे दिल्ली की अदालत में पेश किया गया। वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने पर सीबीआई की टीम उसे रायपुर लेकर पहुंची।

सौरभ चंद्राकर लंबे समय से भारत से बाहर रह रहा था। जांच एजेंसियां महादेव ऐप से जुड़े कथित नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही थीं। अब उसकी भारत वापसी के बाद जांच का अगला चरण अदालत की अनुमति और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

क्या है महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप का मामला?

महादेव ऑनलाइन बुक ऐप का नाम देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े बड़े मामलों में सामने आया है। सीबीआई के अनुसार, सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने इस ऐप को प्रमोट किया था। आरोप है कि इसके जरिए क्रिकेट, फुटबॉल और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी कराई जाती थी।

जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क में अलग-अलग पैनल और शाखाएं बनाई गई थीं। इनके माध्यम से लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था। अलग-अलग स्थानों पर काम करने वाले पैनल कथित तौर पर ग्राहकों से रकम जमा कराते थे। इस तरह नेटवर्क का संचालन कई स्तरों पर किया जाता था।

सीबीआई की जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजा जाता था। एजेंसी के अनुसार, कुछ खातों का इस्तेमाल रकम को इधर-उधर करने के लिए किया गया। इसके बाद हवाला सहित अन्य माध्यमों से पैसा विदेश भेजे जाने का आरोप है।

करीब 6,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप

महादेव ऐप मामले में करीब 6,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का जिक्र सामने आया है। यह रकम जांच और मीडिया रिपोर्टों में बताए गए अनुमान से जुड़ी है। इसे अदालत द्वारा साबित हो चुका नुकसान नहीं माना जाना चाहिए।

सीबीआई इस मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। एजेंसी ने संबंधित मामलों में आरोपपत्र भी दाखिल किए हैं। सौरभ चंद्राकर को इन मामलों में प्रमुख आरोपियों में शामिल किया गया है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित सट्टेबाजी नेटवर्क को चलाने के लिए अलग-अलग स्तर पर लोगों की भूमिका थी। इसमें वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क के संचालन से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे सिस्टम में किसकी क्या भूमिका थी।

CBI और ED अलग-अलग पहलुओं की कर रही हैं जांच

महादेव ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय दोनों की कार्रवाई महत्वपूर्ण है। सीबीआई छत्तीसगढ़ में दर्ज मामलों और उनसे जुड़े कथित अपराधों की जांच कर रही है। वहीं, ईडी का ध्यान मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कमाई से जुड़ी संपत्तियों पर है।

दोनों एजेंसियों की जांच का दायरा आपस में जुड़ सकता है, लेकिन उनकी कानूनी कार्रवाई और मामले अलग हैं। सीबीआई की ओर से दर्ज मामलों में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप शामिल हैं। दूसरी ओर, ईडी कथित अपराध से प्राप्त रकम और उसके इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है।

सौरभ की रायपुर अदालत में पेशी के बाद यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रत्यर्पण की शर्तों को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर अदालत क्या रुख अपनाती है। बचाव पक्ष और जांच एजेंसी के तर्क सुनने के बाद ही आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

कस्टोडियल रिमांड में किन सवालों पर हो सकती है पूछताछ?

यदि अदालत सीबीआई की रिमांड अर्जी स्वीकार करती है, तो एजेंसी आरोपी से मामले के कई पहलुओं पर पूछताछ कर सकती है। जांच का मुख्य उद्देश्य कथित सट्टेबाजी नेटवर्क की संरचना और उसके संचालन से जुड़ी जानकारी जुटाना हो सकता है।

पूछताछ में इन विषयों पर जानकारी मांगी जा सकती है:

  • महादेव ऐप के संचालन और प्रमोशन में अलग-अलग लोगों की भूमिका।
  • कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी से प्राप्त रकम का हिसाब।
  • बैंक खातों और विदेश में हुए वित्तीय लेन-देन की जानकारी।
  • कथित हवाला नेटवर्क और पैसों को भेजने के तरीकों का विवरण।
  • नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और सहयोगियों की भूमिका।
  • सरकारी अधिकारियों को कथित प्रोटेक्शन मनी दिए जाने के आरोप।

ये जांच के संभावित विषय हैं। इन्हें पूछताछ में सामने आए प्रमाण या स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। सीबीआई को किसी भी आरोप के समर्थन में साक्ष्य जुटाने होंगे। वहीं, आरोपी को अपना पक्ष रखने और कानूनी बचाव का अधिकार है।

आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं निगाहें

रायपुर की विशेष अदालत में होने वाली पेशी इस मामले की आगे की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण चरण है। सीबीआई की रिमांड मांग पर अदालत का निर्णय आने के बाद ही पूछताछ की अवधि और शर्तें स्पष्ट होंगी। यदि रिमांड नहीं मिलती है, तो अदालत कानून के अनुसार आगे का आदेश दे सकती है।

इसके अलावा, प्रत्यर्पण से जुड़ी शर्तों पर बचाव पक्ष की आपत्तियां भी आगे की सुनवाई में अहम हो सकती हैं। जांच एजेंसी और आरोपी पक्ष के बीच इन कानूनी सवालों पर बहस जारी रह सकती है। इसलिए मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अदालत के आदेश का इंतजार करना जरूरी है।

महादेव ऐप मामले में अब तक कई वित्तीय और आपराधिक पहलुओं की जांच हुई है। सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियों को उससे सीधे सवाल करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, जांच में सामने आने वाली जानकारी की पुष्टि कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

निष्कर्ष

महादेव ऐप केस में सौरभ चंद्राकर की रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेशी पर सबकी नजर है। सीबीआई उससे पूछताछ के लिए कस्टोडियल रिमांड मांग सकती है। वहीं, बचाव पक्ष प्रत्यर्पण की शर्तों से जुड़े कानूनी सवाल उठा सकता है।

अब अदालत का फैसला तय करेगा कि जांच एजेंसी को आरोपी से हिरासत में पूछताछ की अनुमति मिलती है या नहीं। इस मामले में कथित सट्टेबाजी नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और अन्य आरोपियों की भूमिका से जुड़े तथ्य आगे की जांच में महत्वपूर्ण रहेंगे। अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *