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अमेरिकी चुनाव में ट्रंप की पार्टी को बड़ा झटका, डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों सदनों पर कब्जा किया; विवेक रामास्वामी भी हारे

अमेरिकी संसद में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की हार और विपक्षी डेमोक्रेट्स को मिला पूर्ण बहुमत - न्यूज़ क्रिटिक

अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को हुए मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति को बड़ा झटका दिया है। रिपब्लिकन पार्टी को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत गंवाना पड़ा है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस परिणाम के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए आने वाले दो साल राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

इस चुनाव में केवल संसद की सीटों पर ही मुकाबला नहीं था, बल्कि कई राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव हुए। इसी दौरान ओहायो में रिपब्लिकन उम्मीदवार और भारतीय मूल के अमेरिकी नेता विवेक रामास्वामी को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने हरा दिया। ट्रंप ने रामास्वामी का समर्थन किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जीत नहीं मिली।

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को क्यों लगा झटका?

अमेरिका में हर चार साल में राष्ट्रपति चुनाव होता है, जबकि हर दो साल में कांग्रेस के चुनाव आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच होने वाले इन चुनावों को मिडटर्म इलेक्शन कहा जाता है।

3 नवंबर 2026 को हुए चुनाव में अमेरिकी मतदाताओं ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट के लिए अपने प्रतिनिधियों का चुनाव किया। इसके साथ ही कई राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी मतदान हुआ।

इस बार रिपब्लिकन पार्टी राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में चुनाव मैदान में थी। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी ने महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, सरकारी कामकाज और ट्रंप प्रशासन की नीतियों को प्रमुख मुद्दा बनाया।

चुनाव परिणामों में डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में जीत मिली। इससे रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर नियंत्रण समाप्त हो गया।

एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने सीनेट में कम से कम सात सीटें रिपब्लिकन से छीन लीं। वहीं प्रतिनिधि सभा में भी पार्टी ने दो दर्जन से अधिक सीटों पर बढ़त हासिल की।

सीनेट और प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को बहुमत

अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन होते हैं। पहला सीनेट और दूसरा प्रतिनिधि सभा। दोनों सदनों की भूमिका देश के कानून बनाने और सरकारी नीतियों की निगरानी में महत्वपूर्ण होती है।

इस चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में बहुमत रखती थी। लेकिन 2026 के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने दोनों जगह अपनी स्थिति मजबूत कर ली।

सीनेट में डेमोक्रेट्स ने टेक्सास, आयोवा, ओहायो, कंसास, मेन और नॉर्थ कैरोलिना जैसे राज्यों में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। साउथ कैरोलिना में भी पार्टी को सफलता मिली।

प्रतिनिधि सभा में भी कई ऐसे क्षेत्रों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जीते, जहां पहले रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत प्रभाव माना जाता था।

इस बदलाव के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी को ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर सवाल उठाने और सरकारी नीतियों की जांच कराने के लिए अधिक संसदीय शक्ति मिल गई है।

विवेक रामास्वामी को ओहायो में मिली हार

इस चुनाव का एक बड़ा परिणाम ओहायो के गवर्नर पद से जुड़ा रहा। यहां रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने हरा दिया।

रामास्वामी भारतीय मूल के अमेरिकी कारोबारी और राजनीतिक नेता हैं। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की ओर से गवर्नर पद का चुनाव लड़ा था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनके समर्थन में प्रचार किया था।

दूसरी ओर एमी एक्टन ने अपने चुनाव अभियान में महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को प्रमुख मुद्दा बनाया।

चुनाव के दौरान दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। रामास्वामी ने अपने निजी संसाधनों से भी चुनाव प्रचार पर बड़ी रकम खर्च की थी। इसके बावजूद एमी एक्टन ने जीत हासिल की।

इस जीत के साथ एमी एक्टन ओहायो की पहली निर्वाचित महिला गवर्नर बनने जा रही हैं। उनकी जीत ने राज्य में लगभग 16 वर्षों से चले आ रहे रिपब्लिकन शासन का अंत कर दिया है।

ट्रंप ने किया था विवेक रामास्वामी का समर्थन

विवेक रामास्वामी को रिपब्लिकन पार्टी के बड़े नेताओं का समर्थन प्राप्त था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनके चुनाव अभियान का समर्थन किया था।

रामास्वामी पहले 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भी रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने की दौड़ में शामिल हुए थे। हालांकि, आयोवा कॉकस में चौथे स्थान पर रहने के बाद उन्होंने अपना अभियान समाप्त कर दिया था।

इसके बाद वह ट्रंप के करीबी राजनीतिक सहयोगियों में शामिल हुए। सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) की योजना में भी उन्होंने एलन मस्क के साथ काम किया था।

ओहायो गवर्नर चुनाव में रामास्वामी ने राज्य की अर्थव्यवस्था, टैक्स में कटौती और सरकारी व्यवस्था में बदलाव जैसे मुद्दे उठाए।

हालांकि, एमी एक्टन ने स्थानीय मुद्दों और परिवारों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को केंद्र में रखकर प्रचार किया। आखिरकार मतदाताओं ने उन्हें चुना।

महंगाई और ईरान युद्ध बने चुनाव के बड़े मुद्दे

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में मतदाताओं के बीच महंगाई और रोजमर्रा की बढ़ती लागत प्रमुख मुद्दे रहे।

एसोसिएटेड प्रेस के मतदाता सर्वेक्षण के अनुसार, बड़ी संख्या में मतदाताओं ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर असंतोष जताया। लोगों के लिए घर का खर्च, सामान की कीमतें और आर्थिक अनिश्चितता महत्वपूर्ण चिंताएं बनी रहीं।

इसके अलावा ईरान युद्ध और सरकारी भ्रष्टाचार को लेकर भी मतदाताओं में नाराजगी देखने को मिली।

डेमोक्रेटिक पार्टी ने इन मुद्दों को अपने चुनाव अभियान का हिस्सा बनाया। पार्टी ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

वहीं ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में कई रैलियां की थीं। उन्होंने मतदाताओं से पार्टी को समर्थन देने की अपील भी की थी।

लेकिन चुनाव परिणामों में डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में जीत मिली।

ट्रंप ने चुनावी हार पर क्या कहा?

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पार्टी की हार को व्यक्तिगत राजनीतिक हार मानने से इनकार किया।

उन्होंने कहा कि वह चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे और रिपब्लिकन उम्मीदवारों की गुणवत्ता भी नतीजों को प्रभावित करने वाला कारण रही।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया दी और डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाली संसद से आने वाले विधेयकों को वीटो करने की बात कही।

दूसरी ओर डेमोक्रेटिक नेताओं ने परिणामों को अपनी नीतियों और चुनावी अभियान के समर्थन के रूप में पेश किया।

सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने पार्टी की जीत को महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव बताया। वहीं प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा कि अमेरिकी जनता बदलाव चाहती है।

अब ट्रंप सरकार के सामने क्या होंगी चुनौतियां?

कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत गंवाने के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए कानून बनाना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है।

अमेरिकी व्यवस्था में किसी विधेयक को कानून बनाने के लिए संसद के दोनों सदनों की मंजूरी जरूरी होती है। ऐसे में डेमोक्रेटिक बहुमत ट्रंप प्रशासन के प्रस्तावों को रोक सकता है या उनमें बदलाव की मांग कर सकता है।

इसके अलावा डेमोक्रेट्स सरकारी विभागों, प्रशासनिक फैसलों और राष्ट्रपति से जुड़े मामलों की संसदीय जांच भी कर सकते हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक नेताओं ने ट्रंप प्रशासन के कामकाज की विस्तृत जांच कराने के संकेत दिए हैं।

हालांकि, ट्रंप के पास राष्ट्रपति के रूप में वीटो का अधिकार बना रहेगा। इसलिए आने वाले दो वर्षों में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना है।

निष्कर्ष

अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में बहुमत गंवाना पड़ा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। वहीं ओहायो के गवर्नर चुनाव में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी को एमी एक्टन के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

इन नतीजों से अमेरिकी राजनीति में सत्ता का संसदीय संतुलन बदल गया है। अब डेमोक्रेट्स को ट्रंप प्रशासन के फैसलों की निगरानी और विरोध करने का अधिक अवसर मिलेगा। वहीं ट्रंप के सामने अपने कार्यकाल के शेष दो वर्षों में कांग्रेस के साथ तालमेल बनाने की चुनौती होगी। अब देखना होगा कि यह राजनीतिक बदलाव अमेरिकी सरकार की नीतियों और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों को किस तरह प्रभावित करता है।

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