आ गए नए क्रिमिनल लॉ, गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी नए कानूनों की जानकारी
आज यानि एक जुलाई 2024 से देश में नए क्रिमिनल लॉ लागू हो गए हैं। इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की जगह भारत न्याय संहिता (बीएनएस) आ गया है। बीएनएस लागू होने के बाद पहला रिएक्शन देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरल भाषा में सिलसिलेवार ढंग से बताया कि नए प्रावधानों के तहत क्या कुछ बदला गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यह बातें आज दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहीं। उन्होंने कहा, “75 साल के बाद कानूनों पर विचार हुआ है और यह कानून आज से हर थाने में काम करना चालू करेगा। इंडियन पीनल कोड, जिसे आईपीसी कहते थे, अब उसकी जगह बीएनएस ने ले ली है।”
केंद्रीय गृहमंत्री के अनुसार, बीएनएस के तहत ऐसे ढेर सारे प्रावधान किये गए हैं। जिससे कई समूहों को फायदा होगा। पहले कानूनों में कई सारी ऐसी चीजें थी जिससे नागरिकों को परेशानी होती थी। उन्हें हटाकर नए प्रावधान लाये गए हैं। दफाओं और चैप्टर्स की प्राथमिकता तय की गई है, जबकि महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता दी गई है। गैंगरेप के लिए अब 20 साल की सजा या आजीवन कारावास होगी और नाबालिग के साथ रेप में मौत की सजा दी जाएगी।
ऑनलाइन एफआईआर की व्यवस्था
नए कानूनों की जानकारी देते हुए अमित शाह ने आगे कहा कि अब महिला पीड़ितों का बयान उनके घर पर महिला अधिकारीयों और उनके परिजनों की उपस्थिति में लेने का प्रावधान लाया गया है। ऑनलाइन एफआईआर की व्यवस्था की गयी है, जिसका फायदा महिलाओं को होगा। पहली बार मॉब लिंचिंग को भी परिभाषित किया गया है। गृहमंत्री ने आगे कहा कि आजादी के इतने सालों के बाद ये कानून में बदलाव हुआ है, जो हमारे संविधान की स्पिरिट का बहुत बड़ा परिचायक है।
दंड की जगह न्याय होगा–केंद्रीय गृहमंत्री
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कोंग्रेस के दौरान कहा, “मैं विश्वास से कहता हूं कि तीनों कानून देशभर में सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली का सृजन करेंगे और इससे विश्व की सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली बनेगी। 75 साल बाद इन कानूनों पर विचार हुआ। आज से जब ये कानून काम करना शुरू होंगे तब दंड की जगह न्याय होगा। देरी की जगह तेजी से काम होगा। इन कानूनों के लागू होने से कह सकते हैं कि यह भारतीय कानून की आत्मा होगी।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान और क्या कहा
* राजद्रोह कानून अंग्रेजों ने शासन व्यवस्था बनाए रखने को बनाया था। हमने इसे बदला। देशद्रोह कानून लागू किया। यह विश्व की सबसे अत्याधुनिक न्याय प्रणाली होगी।
* लोकसभा में 9 घंटे 29 मिनट और राज्यसभा में 7 घंटे 10 मिनट इस बिल पर चर्चा हुई। यह भी झूठ है कि सबको निकालने के बाद यह बिल पास हुआ था।
* मैंने खुद पत्र लिखकर 2020 में सभी सासंदों और सभी मुख्यमंत्रियों से सुझाव मांगे थे। सभी जजों से इस बारे में सुझाव मांग गए थे।
* तीन महीने गृह विभाग की समिति ने सभी सासंदों से सुझाव लिए। 93 बदलाव के बाद बिल को पारित किया गया है।
* इस सुधार को राजनीतिक रंग देना ठीक नहीं है। इस कानून पर राजनीति नहीं करिए। राजनीति करने के लिए और भी कई मुद्दे हैं। राजनीति से ऊपर उठें सभी दल और चर्चा करें।
* भारत की आजादी के बाद किसी भी कानून पर इतनी लंबी चर्चा नहीं हुई है, जितनी इसपर हुई। चार साल तक इस बिल पर विचार किया गया है।
* स्पष्ट कर हूँ कि रिमांड का समय 15 दिन का ही है। भ्रांति फैलाई गई है कि इसे बढ़ाया गया है।
