May 19, 2026

News Critic

Latest News In Hindi

भारत-पाकिस्तान सीजफायर में, अमेरिका की भूमिका से पाकिस्तान ने भी किया इनकार

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए सीमा तनाव और सीजफायर के मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में यह स्पष्ट रूप से कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की प्रक्रिया में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं रही। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि सऊदी अरब ने इस तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के साथ बातचीत की थी।

इशाक डार ने बताया कि पाकिस्तान की रिक्वेस्ट पर सऊदी अरब ने भारत से संपर्क किया और दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को शांत करने के लिए मध्यस्थता की। उन्होंने कहा कि 6-7 मई की रात जब पाकिस्तान भारत के जवाब में सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा था, तब भारत ने नूर खान और शोरकोट नामक दो प्रमुख एयरबेस पर दोबारा हमला किया। इस हमले से इन एयरबेसों को नुकसान भी पहुंचा।

सऊदी अरब ने निभाई कूटनीतिक भूमिका

डार ने बताया कि भारतीय हमलों के लगभग 45 मिनट बाद सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल ने उन्हें फोन किया। फोन पर उन्होंने पूछा कि क्या वे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात कर सकते हैं, ताकि तनाव को रोका जा सके। डार ने इस पहल पर सहमति जताई। उन्होंने कहा, “मैंने कहा कि अगर भारत भी रुकने के लिए तैयार है तो हम भी हमला नहीं करेंगे।”

कुछ देर बाद सऊदी प्रिंस ने फिर से डार को फोन किया और बताया कि उन्होंने एस. जयशंकर से संपर्क कर लिया है और पाकिस्तान की स्थिति से उन्हें अवगत भी करा दिया है। इस खुलासे से यह स्पष्ट होता है कि सऊदी अरब ने युद्धविराम की दिशा में एक अहम भूमिका निभाई और कूटनीतिक तरीके से दोनों देशों को टकराव से दूर रखा।

अमेरिका की भूमिका को दोनों देशों ने किया खारिज

भारत पहले ही अमेरिका की मध्यस्थता की किसी भी भूमिका को नकार चुका है। और अब पाकिस्तान ने भी यह साफ कर दिया है कि सीजफायर को लेकर अमेरिका ने कोई भूमिका नहीं निभाई थी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक रूप से यह दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में भूमिका निभाई है। लेकिन इस बार पाकिस्तान के वरिष्ठ मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से इन दावों को नकारने से इन बयानों की सच्चाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा तनाव

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बड़े आतंकी हमले के बाद हुई थी, जिसमें कई निर्दोष लोग मारे गए थे। इसके बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर समेत पाकिस्तान की सीमा के अंदर स्थित 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी हमला किया।

इन हमलों में 100 से ज्यादा आतंकवादियों के मारे जाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश की, लेकिन भारत की रणनीतिक बढ़त के सामने उसके प्रयास असफल रहे। इसी स्थिति में सऊदी अरब की पहल के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर हुआ।

इशाक डार के इस बयान से अब यह साफ हो गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात को टालने में सऊदी अरब ने निर्णायक भूमिका निभाई। वहीं अमेरिका द्वारा किया गया मध्यस्थता का दावा अब दोनों ही देशों द्वारा खारिज कर दिया गया है। यह घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि वैश्विक राजनीति में जब भी दो पड़ोसी परमाणु शक्तियों के बीच तनाव बढ़ता है, तब प्रभावशाली क्षेत्रीय देशों की कूटनीति महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *