फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत, सपा ने उठाए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल
पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बड़ी जीत दर्ज की है। बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने भारी मतों के अंतर से चुनाव जीतकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है। इस जीत के बाद जहां बीजेपी इसे जनता का समर्थन बता रही है, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) ने चुनाव परिणामों पर सवाल खड़े किए हैं।
फाल्टा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा को कुल 1,49,666 वोट मिले। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को एक लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान चुनाव में चौथे स्थान पर रहे और उनकी जमानत तक जब्त हो गई। यह परिणाम इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि इस सीट पर पिछले कई वर्षों से टीएमसी का दबदबा रहा है।
सपा ने चुनाव परिणामों पर जताया संदेह
बीजेपी की इस बड़ी जीत के बाद समाजवादी पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि फाल्टा विधानसभा सीट के इतिहास में बीजेपी कभी इतनी मजबूत स्थिति में नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई दशकों में बीजेपी इस सीट पर तीसरे स्थान तक भी मुश्किल से पहुंची थी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को करीब 71 हजार वोट मिले थे और वह बड़े अंतर से चुनाव हार गई थी। लेकिन इस बार अचानक पार्टी को भारी समर्थन मिलना कई सवाल खड़े करता है। सपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था को प्रभावित किया गया है और यह सामान्य जनादेश नहीं लगता।
हालांकि चुनाव आयोग या किसी अन्य आधिकारिक संस्था की ओर से अब तक चुनाव प्रक्रिया में किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की गई है। बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह जनता के भरोसे और राज्य में बदलते राजनीतिक माहौल का परिणाम है।
चुनाव से पहले ही पीछे हट गए थे टीएमसी उम्मीदवार
इस उपचुनाव की सबसे बड़ी चर्चा टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान का चुनाव प्रचार से पीछे हटना भी रहा। पुनर्मतदान से कुछ दिन पहले उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी थी। हालांकि, नाम वापस लेने की समय सीमा खत्म हो चुकी थी, इसलिए उनका नाम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में बना रहा।
टीएमसी ने उस समय इसे जहांगीर खान का निजी फैसला बताया था। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर पार्टी के प्रदर्शन पर भी पड़ा। चुनाव परिणाम में खान को केवल 7,783 वोट मिले, जो कुल मतों के मुकाबले बेहद कम थे।
वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार शंभू नाथ कुर्मी 40,645 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक मोल्ला को 10,084 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।
टीएमसी के गढ़ में बीजेपी की बड़ी बढ़त
फाल्टा विधानसभा सीट लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। साल 2011 से इस सीट पर लगातार टीएमसी का कब्जा रहा है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने लगभग 57 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी।
लेकिन इस बार चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदलती दिखाई दी। बीजेपी को उपचुनाव में करीब 71.2 प्रतिशत वोट मिले, जो 2021 के मुकाबले काफी अधिक हैं। पिछली बार बीजेपी का वोट शेयर लगभग 36.75 प्रतिशत था। दूसरी ओर, टीएमसी का वोट प्रतिशत घटकर केवल 3.7 प्रतिशत तक पहुंच गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है। वहीं कुछ विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
