G7 में मोदी ने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा, होर्मुज सुरक्षा पर दुनिया का ध्यान खींचा
G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा और हाल ही में हुई मौतों का मुद्दा वैश्विक नेताओं के सामने प्रमुखता से उठाया। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर लगातार बढ़ रहे खतरों के बीच प्रधानमंत्री ने समुद्री सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर करता है। ऐसे में नाविकों और समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विशेष रूप से उन भारतीय नाविकों का उल्लेख किया जो हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव और हमलों के कारण प्रभावित हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
G7 सम्मेलन में मौजूद कई देशों के नेताओं ने समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता को बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति जताई। बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद थे, जिससे इस मुद्दे को और अधिक वैश्विक महत्व मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा यह मुद्दा उठाना भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें विदेशों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। साथ ही, यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और समुद्री सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक महत्वपूर्ण विषय बनी रह सकती है। ऐसे में G7 जैसे मंच पर भारत द्वारा इस मुद्दे को उठाना वैश्विक समुद्री सुरक्षा बहस को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

