मानसून 2026 अपडेट: मुंबई में 7-8 दिन की देरी, 103 जिलों में सामान्य बारिश; राजस्थान समेत कई राज्यों में चिंता बढ़ी
मानसून 2026 अपडेट: मुंबई में 7-8 दिन की देरी,
नई दिल्ली, 17 जून 2026। देशभर में मानसून की प्रगति इस वर्ष उम्मीद के मुताबिक नहीं चल रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल पहुंचने के बाद अब पश्चिमी तट पर धीमा पड़ गया है, जिसके कारण मुंबई और कोंकण क्षेत्र में मानसून की पूर्ण एंट्री में लगभग एक सप्ताह की अतिरिक्त देरी होने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर, देश के 103 जिलों में सामान्य बारिश दर्ज की गई है, जबकि राजस्थान, गुजरात और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्से अभी भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
पश्चिमी तट पर धीमा पड़ा मानसून
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अरब सागर से आने वाली नम हवाओं की गति कमजोर पड़ने और कुछ क्षेत्रों में शुष्क हवाओं के प्रभाव के कारण मानसून की रफ्तार थम गई है। इसका सबसे अधिक असर महाराष्ट्र और पश्चिमी तट के राज्यों पर दिखाई दे रहा है।
मुंबई में सामान्य तौर पर मानसून 10 से 11 जून के बीच सक्रिय हो जाता है, लेकिन इस बार इसकी पूरी तरह दस्तक 18 से 20 जून के बीच होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, शहर और आसपास के क्षेत्रों में प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं, लेकिन व्यापक और लगातार बारिश अभी शुरू नहीं हुई है।
मुंबई और महाराष्ट्र में बढ़ी जल संकट की चिंता
मानसून में देरी का असर सीधे जल संसाधनों पर पड़ रहा है। मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली प्रमुख झीलों में जल स्तर लगातार कम हो रहा है। जल भंडारण क्षमता चिंताजनक स्तर तक पहुंचने के कारण स्थानीय प्रशासन जल संरक्षण और संभावित जल कटौती की तैयारी में जुट गया है।
महाराष्ट्र में 1 से 15 जून के बीच सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका असर कृषि क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। किसानों को खरीफ फसलों की बुआई में देरी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
किन इलाकों में हो रही है सामान्य बारिश?
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, देश के 103 जिलों में अब तक सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। इनमें दक्षिण भारत के कुछ राज्य, पूर्वोत्तर भारत और मध्य भारत के चुनिंदा क्षेत्र शामिल हैं।
केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक के कुछ हिस्सों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। इन क्षेत्रों में कृषि गतिविधियां सामान्य गति से आगे बढ़ रही हैं।
राजस्थान में गर्मी और सूखे की दोहरी मार
राजस्थान इस समय सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है। मानसून की देरी के कारण कई जिलों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है और हीटवेव जैसी परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं।
बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की कमी बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग ने कुछ जिलों में आगामी दिनों के लिए बारिश की संभावना जताई है, लेकिन पूरे राज्य में व्यापक वर्षा होने में अभी समय लग सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की प्रगति अगले कुछ दिनों तक धीमी रही, तो कृषि और पेयजल दोनों क्षेत्रों पर इसका असर और गहरा हो सकता है।
देशभर में सामान्य से कम बारिश
1 जून से अब तक देश में कुल वर्षा सामान्य स्तर से काफी कम दर्ज की गई है। उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में बारिश का घाटा बना हुआ है।
गुजरात, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इससे कृषि, जल संसाधन और बिजली की मांग पर दबाव बढ़ रहा है।
El Niño का दिख रहा असर
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 का मानसून एल नीनो (El Niño) प्रभाव से प्रभावित हो सकता है। इसी कारण बारिश का वितरण असमान और कमजोर दिखाई दे रहा है।
भारतीय मौसम विभाग ने जून से सितंबर तक के मानसून सीजन के लिए औसत से कम वर्षा का अनुमान व्यक्त किया है। वहीं निजी मौसम एजेंसियों ने भी सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है।
एल नीनो की स्थिति मजबूत होने पर मानसून की सक्रियता और कमजोर पड़ सकती है, जिसका असर कृषि उत्पादन, जलाशयों और अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है।
किसानों और आम जनता पर क्या असर?
मानसून की अनियमितता का सबसे बड़ा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। धान, मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी खरीफ फसलें समय पर बारिश पर निर्भर होती हैं। बारिश में देरी होने से बुआई प्रभावित हो रही है।
वहीं शहरी क्षेत्रों में गर्मी से राहत नहीं मिलने के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। मुंबई, पुणे, अहमदाबाद और कई अन्य शहरों में जल संकट की आशंका बढ़ती जा रही है।
आगे कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ सकता है। यदि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं तो पश्चिमी तट पर भी मानसून की गति तेज हो सकती है।
हालांकि जहां बारिश की कमी चिंता बढ़ा रही है, वहीं कुछ क्षेत्रों में अचानक भारी वर्षा, जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं।
निष्कर्ष
मानसून 2026 फिलहाल चुनौतीपूर्ण स्थिति में दिखाई दे रहा है। मुंबई और महाराष्ट्र में बारिश की देरी से जल संकट गहराने लगा है, जबकि राजस्थान समेत कई राज्यों में सूखे जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं। हालांकि 103 जिलों में सामान्य बारिश राहत की खबर है, लेकिन देशभर में कुल वर्षा का घाटा अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में किसानों, प्रशासन और आम नागरिकों को मौसम अपडेट पर नजर रखने और जल संरक्षण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
मौसम विभाग के अनुसार मुंबई में पूर्ण मानसून 18 से 20 जून 2026 के बीच पहुंचने की संभावना है।
मौसम विभाग ने पूरे सीजन के लिए सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है, इसलिए मानसून औसत से कमजोर रह सकता है।
केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक के कुछ हिस्सों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश दर्ज की गई है।
राजस्थान के कई जिलों में अभी भी बारिश का इंतजार है। गर्मी और कम वर्षा के कारण कृषि पर असर पड़ रहा है।
El Niño के कारण समुद्री तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है और सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है।

