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उज्जैन ज़मीन विवाद: 335 एकड़ भूमि खरीद को लेकर CM मोहन यादव पर कांग्रेस के आरोप, BJP ने बताया राजनीतिक साजिश

न्यूज़ क्रिटिक (News Critic) का न्यूज़ ग्राफिक जिसमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की तस्वीर है। बैकग्राउंड में एक बड़े भूखंड (जमीन) का दृश्य है जिस पर '335 एकड़ जमीन' का पिन लगा है। ग्राफिक में बड़े अक्षरों में लिखा है: "उज्जैन की जमीन पर घमासान! 335 एकड़ जमीन के मामले को लेकर कांग्रेस ने सीएम मोहन यादव की घेराबंदी शुरू कर दी है।" साथ ही "पारदर्शिता के बिना सरकार कर रही सौदा" का आरोप और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की तस्वीर भी है।
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भोपाल/उज्जैन। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों उज्जैन जमीन विवाद चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार पर उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में भूमि खरीदने के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का दावा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार की ओर से जमीन खरीद में तेजी आई, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इन आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बता रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, यह विवाद उज्जैन में भूमि खरीद, मास्टर प्लान 2035 और सिंहस्थ 2028 से जुड़े विकास कार्यों के बीच सामने आया है, जिससे राज्य की राजनीति गरमा गई है।

कांग्रेस ने लगाए 335 एकड़ जमीन खरीदने के आरोप

कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों के पास उज्जैन व आसपास के क्षेत्रों में कुल 335 एकड़ जमीन है।

विपक्ष का दावा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार से जुड़ी कंपनियों ने बड़ी संख्या में प्लॉट खरीदे, जिनका क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ बताया जा रहा है। इन जमीनों की अनुमानित कीमत करीब 45 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

कांग्रेस का कहना है कि जिन इलाकों में जमीन खरीदी गई, वहां भविष्य में सड़क, हाईवे, बायपास और मास्टर प्लान के तहत विकास परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।

कांग्रेस ने क्या-क्या आरोप लगाए?

मध्य प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि—

  • मुख्यमंत्री बनने से पहले और बाद में जमीन खरीद में तेजी आई।
  • विकास योजनाओं की जानकारी का निजी लाभ उठाया गया।
  • मास्टर प्लान 2035 के तहत भूमि उपयोग परिवर्तन से जमीनों की कीमत बढ़ने की संभावना थी।
  • पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए।
  • मुख्यमंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफा दें।

कांग्रेस नेताओं ने इसे “मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा लैंड स्कैम” बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

किन कंपनियों का नाम सामने आया?

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि परिवार से जुड़ी कई रियल एस्टेट कंपनियों के माध्यम से भूमि खरीदी गई। इनमें प्रमुख रूप से—

  • श्री सिद्धिविनायक देवकॉन्स प्राइवेट लिमिटेड
  • मंगलमूर्ति इंफ्रा
  • श्री अन्नपूर्णा एंटरप्राइजेज
  • श्रेयान्वी डेवलपर्स

इन कंपनियों के जरिए परिवार के कई सदस्यों द्वारा जमीन खरीदने का आरोप लगाया गया है।

CMO और BJP ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बनने के बाद न तो मोहन यादव और न ही उनकी पत्नी ने व्यक्तिगत रूप से कोई नई जमीन खरीदी है।

BJP का कहना है कि—

  • यादव परिवार लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा है।
  • सभी खरीद कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई हैं।
  • कांग्रेस राजनीतिक लाभ लेने के लिए झूठे आरोप लगा रही है।
  • विकास कार्यों को विवादित बनाने की कोशिश की जा रही है।

प्रदेश भाजपा नेताओं ने इसे मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का प्रयास बताया है।

आखिर विवाद की वजह क्या है?

इस पूरे विवाद की जड़ उज्जैन का मास्टर प्लान 2035 और सिंहस्थ 2028 की तैयारियां मानी जा रही हैं।

सरकार शहर में—

  • नए रोड कॉरिडोर
  • बायपास
  • हाईवे
  • इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं
  • लैंड यूज परिवर्तन

जैसी योजनाओं पर काम कर रही है।

विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित विकास क्षेत्रों के आसपास जमीन खरीदने से निजी लाभ मिलने की संभावना थी। हालांकि सरकार और BJP इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रही है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस मुद्दे पर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं।

वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि यह पूरा विवाद केवल राजनीतिक एजेंडा है और इसका वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले विधानसभा सत्र में यह मुद्दा प्रमुखता से उठ सकता है।

क्या हो सकती है आगे की कार्रवाई?

फिलहाल किसी जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

यदि इस मामले में स्वतंत्र जांच होती है, तो उसके बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।

दोनों पक्ष फिलहाल अपने-अपने दावों पर कायम हैं और मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।

निष्कर्ष

उज्जैन जमीन विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है। एक ओर कांग्रेस इसे हितों के टकराव और पारदर्शिता का मामला बता रही है, वहीं भाजपा इसे पूरी तरह राजनीतिक हमला करार दे रही है। जब तक किसी सक्षम जांच एजेंसी की रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक आरोप और जवाब दोनों ही राजनीतिक दावों के दायरे में हैं।

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