दिग्विजय सिंह की पदयात्रा: उज्जैन से अयोध्या तक 1000 किमी यात्रा का ऐलान, राम मंदिर चढ़ावा विवाद बना वजह
भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा और दान राशि में अनियमितताओं के मुद्दे पर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने 2 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती) से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक लगभग 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है।
दिग्विजय सिंह का कहना है कि यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि आस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा में किसी भी राजनीतिक पार्टी का झंडा या बैनर नहीं रहेगा और भगवान राम में आस्था रखने वाला कोई भी व्यक्ति इसमें शामिल हो सकता है।
दिग्विजय सिंह ने क्यों किया पदयात्रा का ऐलान?
भोपाल स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने एक बैनर भी लगाया, जिस पर लिखा था कि “राम मंदिर के चंदा चोरों और चढ़ावा चोरों का प्रवेश वर्जित है।”
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का चंदा दिया था। अब जब कथित वित्तीय अनियमितताओं की खबरें सामने आई हैं तो वे अयोध्या की अदालत में अपना चंदा वापस मांगने के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे। उनका कहना है कि यदि राशि वापस मिलती है तो उसे किसी धार्मिक ट्रस्ट को दान कर देंगे।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
हाल के दिनों में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों पर चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। इस मामले की जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ हुई और कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है।
जांच एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। इस विवाद के बाद मंदिर में दान और चढ़ावे की पारदर्शी व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।
यात्रा कब और कहां से शुरू होगी?
यात्रा की मुख्य बातें
- शुरुआत: 2 अक्टूबर 2026
- स्थान: उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर
- समापन: अयोध्या
- कुल दूरी: लगभग 1000 किलोमीटर
- दैनिक पैदल यात्रा: 10 से 15 किलोमीटर
- स्वरूप: गैर-राजनीतिक यात्रा
दिग्विजय सिंह का कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करना है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी हुईं तेज
दिग्विजय सिंह के इस ऐलान के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
- कांग्रेस इसे आस्था और पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बता रही है।
- भाजपा का कहना है कि विपक्ष इस विषय का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।
- विभिन्न धार्मिक संगठनों ने भी मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
पहले भी पदयात्राएं कर चुके हैं दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह इससे पहले भी कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर लंबी यात्राएं निकाल चुके हैं। इस बार उनकी यात्रा महाकाल की नगरी उज्जैन से भगवान राम की नगरी अयोध्या तक होगी, जिसे धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने सही हैं और किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है।
दूसरी ओर, 2 अक्टूबर से प्रस्तावित दिग्विजय सिंह की पदयात्रा पर भी पूरे देश की नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। एक ओर विपक्ष इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे राजनीतिक कदम मान रहा है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और पदयात्रा दोनों पर देशभर की निगाहें रहेंगी।

