अखिलेश यादव का आरोप: अब्बास अंसारी की सदस्यता जानबूझकर छीनी गई, जाति के आधार पर हो रहे फैसले
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के नेता और मऊ सदर से विधायक रहे अब्बास अंसारी की विधायकी रद्द किए जाने को “जानबूझकर किया गया कदम” बताया है। अखिलेश का कहना है कि उत्तर प्रदेश में न्याय नहीं, बल्कि जाति और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने अब्बास अंसारी की सदस्यता जाने को बताया साजिश
अखिलेश यादव ने कहा कि अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता को सोची-समझी साजिश के तहत रद्द किया गया है। उनका आरोप है कि मौजूदा सरकार कुछ खास जातियों और समुदायों को टारगेट कर रही है, और उसी आधार पर विधायकों की सदस्यता रद्द की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ लोगों को पोस्ट करके, दबाव बनाकर फैसले कराए जा रहे हैं और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक बताया।
डिप्टी सीएम पर परोक्ष निशाना
अखिलेश यादव ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का नाम लिए बिना उन्हें भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि “डीएनए पूछने वालों की सदस्यता क्यों नहीं जा रही? उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती?” सपा प्रमुख ने यह सवाल उठाकर राज्य सरकार की कथित पक्षपातपूर्ण नीति पर सवाल खड़ा किया।
डीजीपी की नियुक्ति पर टिप्पणी
राज्य में नए डीजीपी की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि अधिकारी अच्छे लग रहे हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि वे उस ‘जाल’ से कैसे बाहर निकल पाएंगे जो मौजूदा व्यवस्था ने बुना है। उन्होंने यह इशारा किया कि सरकार में जो राजनीतिक दबाव होता है, उससे कोई भी अधिकारी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकता।
यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में हालत यह हो गई है कि पुलिस खुद पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रही है। उन्होंने कहा कि जब पुलिस से राजनीतिक दबाव में आकर गलत काम कराए जाएंगे, तो फिर यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे ईमानदारी से काम करें।
रिवर फ्रंट पर शिवाजी की प्रतिमा का ऐलान
अखिलेश यादव ने भविष्य की समाजवादी पार्टी की सरकार के विज़न को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर सपा सत्ता में आती है तो लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट पर मराठा वीर शिवाजी की भव्य प्रतिमा लगाई जाएगी। खास बात यह रहेगी कि शिवाजी जिस सिंघासन पर बैठेंगे, वह सोने का होगा। उन्होंने यह वादा करके खुद को राष्ट्रवादी और सांस्कृतिक गौरव से जोड़ा।
गोमती रिवर फ्रंट में भ्रष्टाचार के आरोप
सपा प्रमुख ने राज्य सरकार पर गोमती रिवर फ्रंट से जुड़े फव्वारों की चोरी का भी आरोप लगाया। उन्होंने सरकार को “फव्वारा चोर सरकार” तक कह डाला और पूछा कि करोड़ों रुपये की परियोजना से ये फव्वारे कैसे गायब हो गए? उन्होंने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिर से गर्मी ला सकती है। उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर जातिवाद, प्रशासनिक पक्षपात और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही, उन्होंने अपनी पार्टी की सरकार बनने पर सांस्कृतिक धरोहरों को सम्मान देने के भी वादे किए। अब देखना यह होगा कि भाजपा इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और जनता किसके पक्ष में खड़ी होती है।

