हंता वायरस को लेकर बढ़ी चिंता, डव्ल्यूएचओ ने कहा- कोरोना जैसी स्थिति की आशंका फिलहाल नहीं
दुनियाभर में एक बार फिर वायरस संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। इस बार चर्चा हंता वायरस को लेकर हो रही है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या यह वायरस भी कोरोना की तरह तेजी से फैल सकता है और क्या दुनिया किसी नई महामारी की ओर बढ़ रही है। इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डव्ल्यूएचओ) ने इस मामले पर अहम जानकारी साझा करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है, हालांकि फिलहाल इसे कोविड-19 जैसी वैश्विक स्थिति नहीं माना जा रहा है।
क्रूज शिप पर मिले कई मामले, तीन लोगों की मौत
हंता वायरस का यह मामला डच झंडे वाले लग्जरी क्रूज शिप एमवी होंडियस से जुड़ा हुआ है। जहाज पर कुछ यात्रियों में रहस्यमयी सांस संबंधी बीमारी के लक्षण दिखाई दिए थे। बाद में जांच में पांच लोगों में हंता वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके अलावा तीन अन्य लोगों को संदिग्ध मरीज माना जा रहा है। अब तक इस घटना में तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जहाज पर पहला संक्रमित व्यक्ति 6 अप्रैल को बीमार पड़ा था। उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। शुरुआती दौर में डॉक्टरों को हंता वायरस का संदेह नहीं हुआ क्योंकि मरीज में सामान्य सांस संबंधी संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दे रहे थे। इसी वजह से शुरू में वायरस की विशेष जांच नहीं कराई गई।
जब जहाज पर दूसरे यात्री भी बीमार होने लगे, तब स्वास्थ्य एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया और हंता वायरस की जांच शुरू की। इसके बाद कई संक्रमित मामलों की पुष्टि हुई।
डव्ल्यूएचओ ने कोरोना से तुलना करने से किया मना
डव्ल्यूएचओ की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. मारिया वैन केरखोव ने स्पष्ट किया है कि हंता वायरस की तुलना कोरोना वायरस से नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह वायरस कोविड-19 की तरह नहीं फैलता।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकतर हंता वायरस इंसान से इंसान में संक्रमण नहीं फैलाते हैं। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों, उनके मल-मूत्र या शरीर से निकलने वाले कणों के संपर्क में आने से फैलता है। हालांकि, इस मामले में एंडीज स्ट्रेन का संदेह जताया जा रहा है। यह हंता वायरस का एक दुर्लभ प्रकार माना जाता है, जिसमें सीमित स्तर पर इंसानों के बीच संक्रमण फैलने की क्षमता देखी गई है।
यही कारण है कि डव्ल्यूएचओ और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस सामान्य परिस्थितियों में कोरोना की तरह तेजी से नहीं फैलता।
छह हफ्तों तक दिख सकते हैं लक्षण
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि हंता वायरस की इन्क्यूबेशन अवधि यानी संक्रमण के बाद लक्षण दिखने का समय काफी लंबा हो सकता है। कई मामलों में इसके लक्षण छह हफ्तों बाद तक सामने आ सकते हैं। इसी वजह से अलग-अलग देशों में यात्रियों की निगरानी की जा रही है।
डव्ल्यूएचओ ने उन 12 देशों को अलर्ट भेजा है, जहां के यात्री इस क्रूज शिप से सेंट हेलेना में उतरे थे। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन यात्रियों की मेडिकल जांच कर रही हैं ताकि संक्रमण के संभावित फैलाव को रोका जा सके।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डव्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों के साथ नीदरलैंड और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल की टीमें भी जहाज पर पहुंच चुकी हैं। ये टीमें यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संक्रमण जहाज के अंदर फैला या फिर कुछ यात्री पहले से संक्रमित थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंद जगहों, खासकर क्रूज शिप जैसी जगहों पर लंबे समय तक एक साथ रहने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल डव्ल्यूएचओ ने इसे वैश्विक महामारी जैसी स्थिति नहीं माना है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को साफ-सफाई का ध्यान रखने, चूहों और संक्रमित वातावरण से दूरी बनाए रखने और किसी भी तरह के गंभीर सांस संबंधी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दे रहे हैं।
