ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन से मदद? भारत के दावे पर चीन और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
भारत और पाकिस्तान के बीच 7 से 10 मई, 2025 के बीच हुए सैन्य संघर्ष, जिसे भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया, को लेकर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने दावा किया है कि पाकिस्तान को इस ऑपरेशन के दौरान चीन और तुर्किए से सैन्य मदद मिली। भारत का कहना है कि इस संघर्ष को चीन ने “लाइव टेस्टिंग ग्राउंड” की तरह इस्तेमाल किया, जहां उसने विभिन्न हथियार प्रणालियों का परीक्षण किया।
हालांकि, पाकिस्तान और चीन ने इन दावों को खारिज किया है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने किसी भी तरह की बाहरी सैन्य सहायता से इनकार किया है, जबकि चीन ने अपने जवाब में पाकिस्तान के साथ “सामान्य रक्षा सहयोग” की बात कही है।
भारत का आरोप: चीन ने की पाकिस्तान की प्रत्यक्ष मदद
भारतीय सेना के डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि पाकिस्तान अकेला नहीं था। उसके पीछे चीन की पूरी मदद थी और साथ ही तुर्किए ने भी हथियार आपूर्ति में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन ने अपने उपग्रहों का इस्तेमाल कर भारतीय सेना की गतिविधियों की निगरानी की और यह जानकारी पाकिस्तान को दी गई। इस दौरान पाकिस्तान की सेना को डीजीएमओ स्तर पर फोन कॉल के जरिए सूचनाएं मिलती रहीं, जिससे स्पष्ट होता है कि उन्हें किसी तीसरे पक्ष से सहायता मिल रही थी।
चीन का जवाब: पाकिस्तान हमारा पारंपरिक मित्र है
भारत के इन दावों पर जब सोमवार (7 जुलाई) को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि,
“मैं इन विवरणों से वाकिफ नहीं हूं, लेकिन मैं यह ज़रूर कह सकती हूं कि चीन और पाकिस्तान अच्छे पड़ोसी और पारंपरिक मित्र हैं। हमारे बीच रक्षा और सुरक्षा में सहयोग सामान्य है और यह किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं है।”
माओ निंग के इस बयान को कुछ विश्लेषक यह संकेत मान रहे हैं कि चीन ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान को मदद दी हो सकती है, लेकिन चीन ने सीधे तौर पर इसे स्वीकार नहीं किया।
राफेल विमानों को लेकर चीन की प्रतिक्रिया
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया कि चीन ने भारत के राफेल फाइटर जेट्स के प्रदर्शन पर संदेह फैलाने के लिए अपने दूतावासों को निर्देश दिए हैं। इस पर माओ निंग ने साफ कहा कि उन्हें इस विषय की जानकारी नहीं है और वे इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहतीं।
साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत और चीन के संबंध इस समय एक अहम मोड़ पर हैं और बीजिंग भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने की इच्छा रखता है।
पाकिस्तान का रुख: किसी बाहरी मदद से किया इनकार
पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने भारत के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान ने न तो चीन से और न ही तुर्किए से कोई मदद ली। उनका दावा है कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने दम पर ही मोर्चा संभाला।
हालांकि भारत के दावों और जनरल राहुल आर सिंह के बयानों से यह स्पष्ट है कि भारत को इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि पाकिस्तान को न केवल हथियारों की आपूर्ति की गई, बल्कि सैन्य रणनीति और खुफिया जानकारी में भी सहायता प्रदान की गई।
चीन की भूमिका: तटस्थता या रणनीतिक समर्थन?
माओ निंग ने अपने बयान में कहा कि चीन, भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेदों को बातचीत और परामर्श के ज़रिए सुलझाने की कोशिशों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा,
“हमने हाल के हफ्तों और महीनों में भारत-पाकिस्तान के घटनाक्रमों पर नजर रखी है। चीन हमेशा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहा है।”
यह बयान चीन की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें वह सार्वजनिक रूप से तटस्थ रहने की कोशिश करता है, लेकिन पर्दे के पीछे रणनीतिक सहयोग करता है।
ऑपरेशन सिंदूर: घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में 7 मई को “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया था। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह संघर्ष चार दिन तक चला और 10 मई को समाप्त हुआ।
इस दौरान भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंक के खिलाफ उसकी नीति कठोर है और सीमा पार से होने वाली किसी भी गतिविधि का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद की यह बहस यह स्पष्ट करती है कि दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति कितनी संवेदनशील है। जहां भारत अपने दावों पर अडिग है, वहीं चीन और पाकिस्तान सफाई दे रहे हैं।
हालांकि, चीन और पाकिस्तान की पुरानी रणनीतिक साझेदारी और हालिया बयानों के बीच फर्क को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि पर्दे के पीछे कुछ ना कुछ सहयोग अवश्य रहा होगा। आने वाले समय में इस पर और खुलासे हो सकते हैं, जिससे इन दावों की सच्चाई पूरी तरह सामने आ सकेगी।
