भारत-पाक संघर्ष पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बड़ा बयान: “हमारा निशाना आतंकवाद था, सेना नहीं”
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव के संदर्भ में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से अपने सभी लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करना था, और इसमें भारत ने उल्लेखनीय सफलता पाई है।
आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम
जयशंकर ने साफ किया कि भारत ने आरंभ से ही पाकिस्तान को संदेश दे दिया था कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य सिर्फ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाना है, न कि उनकी सेना को। इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से इस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि भारत ने 10 मई की सुबह पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकवादी संरचना को बुरी तरह तबाह कर दिया। इस कार्रवाई के प्रमाण उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के जरिए सामने आए हैं, जिनमें देखा गया कि पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ है, जबकि भारत को नगण्य क्षति हुई।
चीन के सैटेलाइट से पाकिस्तान को मदद
इस संघर्ष के दौरान विदेश मंत्री ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान को चीन के सैटेलाइट की मदद मिली। हालांकि, इसके बावजूद भारत ने अपने लक्ष्य में सफलता प्राप्त की। जयशंकर ने यह भी बताया कि इस अभियान के दौरान भारत को विश्व भर से समर्थन मिला। विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अन्य देशों की प्रतिक्रिया भारत के पक्ष में रही।
सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत होगी
पाकिस्तान के साथ बातचीत के मसले पर विदेश मंत्री ने दो टूक कहा कि भारत का रुख स्पष्ट है – किसी भी तरह की बातचीत सिर्फ और सिर्फ द्विपक्षीय होगी और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होगी। यह रुख वर्षों से भारत की राष्ट्रीय सहमति का हिस्सा रहा है। जयशंकर ने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान को यदि बातचीत करनी है, तो पहले उसे आतंकवादी गतिविधियों को पूरी तरह से बंद करना होगा और भारत को आतंकवादियों की पूरी सूची सौंपनी होगी।
सिंधु जल संधि पर कड़ा रुख
सिंधु जल संधि को लेकर विदेश मंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को पूर्ण रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित ही रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कश्मीर पर कोई बातचीत होगी, तो वह सिर्फ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को खाली करने को लेकर होगी। भारत का मानना है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, और इस पर किसी तरह की बहस की आवश्यकता नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन को लेकर संतोष
जयशंकर ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को मिले अंतरराष्ट्रीय समर्थन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने होंडुरास दूतावास के उद्घाटन समारोह के दौरान विशेष रूप से होंडुरास का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के समय भारत के साथ एकजुटता दिखाई थी। विदेश मंत्री ने कहा कि यह समर्थन भारत के वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है और यह दिखाता है कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय समुदाय गंभीरता से ले रहा है।
भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता पर विदेश मंत्री की टिप्पणी
भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता को लेकर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा कि यह वार्ताएं बेहद जटिल होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सभी पक्षों में संतुलन नहीं बन जाता, तब तक किसी निर्णय पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यापारिक समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी होना चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक किसी भी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता।”
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के हालिया बयानों से यह साफ है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर और निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि जब तक वह आतंकवादी ढांचे को खत्म नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की सामान्य बातचीत या सहयोग संभव नहीं है। भारत ने अपने रक्षा हितों को पूरी मजबूती से सुरक्षित किया है और वैश्विक मंच पर भी मजबूती से अपनी स्थिति को रखा है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और अंतरराष्ट्रीय समर्थन भारत की कूटनीतिक और सामरिक क्षमता को दर्शाता है।
